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Exclusive: सरकार की 4 सबसे बड़ी फार्मा कंपनियों में एक ही महिला का राज, ये कोइंसिडेंस तो नहीं हो सकता!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 29 Jun 2024, 12:00 AM | Updated: 31 Dec 2025, 05:53 AM

भारत सरकार के मंत्रालयों में भ्रष्टाचार की खबरें कोई नयी बात नहीं हैं. पहले के समय में भ्रष्टाचार की चीजें थोड़ी जल्दी निकल कर सामने आती थी लेकिन अब समय के साथ-साथ भ्रष्टाचारियों ने भ्रष्टाचार करने के अपने तरीकों में भी बदलाव किया है, जिसका नतीजा यह हुआ है कि चीजें छन-छन कर सामने आती हैं. ऐसा ही एक मामला भारत सरकार के उर्वरक और रसायन मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल से निकल कर सामने आया है, जिसके बारे में जानकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे. यह मामला कुछ ऐसा है, जिसे प्रथम दृष्टया देखने पर यही प्रतीत होता है कि इसमें ऊपर से लेकर नीचे तक सब के सब मिले हुए हैं. मंत्री संतरी से लेकर सरकारी कंपनियों के MD तक इस धांधली में शामिल प्रतीत होते हैं.

समझिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, उच्च क्षमता वाले फार्मास्यूटिकल्स उद्योग के विकास पर अधिक ध्यान दिया जा सके, इसके लिए साल 2008 में तत्कालीन सरकार द्वारा रसायन और उर्वरक मंत्रालय में एक अलग डिपार्टमेंट बनाया गया, जिसे डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल नाम दिया गया. इसी विभाग के अंतर्गत फार्मा की 5 सरकारी कंपनियों (CPSEs) को लाया गया, जिन्हें आम तौर पर CPSEs यानी सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज कहा जाता है.

डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल के अंतर्गत आने वाली कंपनियों में कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (KAPL), इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (IDPL), हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड (HAL), बंगाल केमिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (BCPL) और राजस्थान ड्रग एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (RDPL) शामिल हैं. इन कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी से ज्यादा है यानी सरकार इन कंपनियों को अपने हिसाब से मैनेज करती है.

लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इन 5 में से 1 कंपनी तो पहले ही बंद हो गई. बाकी की 4 में से 3 कंपनियां भयंकर नुकसान में हैं और 1 कंपनी जो लगातार पिछले 13 सालों से लाभ कमा रही थी, अब सरकारी तंत्र उसका भी  बेड़ा गर्क करने की तैयारी में है. जी हां, सरकारी तंत्र ही इन कंपनियों को डूबाने में जी-जान से जुटा हुआ है. वो कैसे, चलिए समझते हैं.

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1 महिला के इर्द गिर्द घूम रही हैं सरकारी फार्मा कंपनियां

डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स के अंतर्गत आने वाली कंपनी हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड (HAL) में MD के पोस्ट पर एक महिला नीरजा श्रॉफ की नियुक्ति हुई. सरकार के मुताबिक यह पद 5 साल के लिए ही होता है लेकिन वो यहां साल 2016 से लेकर अभी तक यानी करीब 8 सालों से काम कर रही हैं. 5 साल का एक टर्म पूरा होने के बाद उन्हें डिपार्टमेंट की ओर से फिर 5 साल का एक्सटेंशन दिया गया था.

HAL के MD के रूप में काम करते हुए नीरजा श्रॉफ को राजस्थान ड्रग एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (RDPL) का एडिशनल चार्ज दिया गया. जब उन्हें RDPL का चार्ज मिला तो कंपनी करीब 250 करोड़ के नुकसान में थी लेकिन इन्होंने भी कंपनी को बचाने और संवारने के लिए कुछ खास कदम नहीं उठाए और कंपनी बंद हो गई. इसके बावजूद HAL की एमडी के पद पर रहने के दौरान ही उन्हें इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (IDPL) और बंगाल केमिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (BCPL) का एडिशनल चार्ज दिया गया. भारत सरकार की ये दोनों कंपनियां भी लंबे समय से नुकसान में ही चल रही है.

आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि नीरजा श्रॉफ के पास BCPLका एडिशनल चार्ज पिछले 3-4 सालों से है, जबकि सरकारी कंपनियों में एडिशनल चार्ज को लेकर सरकार के नियम कायदे ये कहते हैं कि एडिशनल चार्ज के पोस्ट पर कोई भी व्यक्ति 3 महीने से ज्यादा समय तक नहीं रह सकता. किसी आवश्यक परिस्थिति में उसका टेन्योर 3 महीने और बढ़ाया जा सकता है यानी एडिशनल चार्ज के पोस्ट पर काम करने वाला कोई भी शख्स किसी भी परिस्थिति में उस पद पर 6 महीने से ज्यादा दिनों तक काम नहीं कर सकता है. लेकिन इसके बावजूद नीरजा श्रॉफ के पास पिछले 3-4 सालों से BCPL का एडिशनल चार्ज है.

अब KAPL का बेड़ा गर्क कर रही हैं नीरजा श्रॉफ

अब हाल ही में कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (KAPL) के एमडी सुनील कैमल की मृत्यु के बाद नीरजा श्रॉफ को KAPL का एडिशनल चार्ज दिया गया. दरअसल, 25 मार्च 2024 को कैंसर पीड़ित सुनील कुमार की मृत्यु हो गई. कैंसर जैसी घातक बीमारी का असर उन्होंने कंपनी के काम पर नहीं आने दिया था. जब इन्हें KAPL की कमान मिली तब कंपनी का टर्नओवर 300 करोड़ रुपये था लेकिन इनके जबरदस्त काम ही असर रहा कि इनके 5 सालों के कार्यकाल में कंपनी का टर्नओवर 200 करोड़ बढ़कर 500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. जुलाई 2024 में इनका कार्यकाल पूरा होने वाला था. कंपनी के प्रॉफिट को देखते हुए यह लगने लगा था कि सुनील कैमल के कार्यकाल को विस्तार दिया जा सकता है लेकिन कार्यकाल पूरा होने के 3 महीने पहले ही 25 मार्च 2024 को इनकी मृत्यु हो गई.

इनकी मृत्यु के अगले दिन ही 26 मार्च 2024 को नीरजा श्रॉफ को KAPL का एडिशनल चार्ज दे दिया गया.  KAPL की कमान अपने हाथ में लेते ही नीरजा ने बदलाव करने शुरु कर दिए. ये बदलाव कुछ ऐसे थे कि उससे कंपनी के लाभ की संभावना न के बराबर थी. फिर क्या था, इनके खिलाफ कंपनी के वर्कर्स ने मंत्रालय को एक लेटर लिखा और KAPL में जल्द से जल्द MD नियुक्त करने की मांग की. इसके बाद नीरजा भड़क गईं और उन्होंने बिना किसी वैलिड प्रोसिजर के वेकेंसी फ्लॉट कर दिया.

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साथ ही KAPL के काम को संभाल रहे सर्विस एजेंट, हॉस्पिटल स्टॉकिस्ट और सी&एफ एजेंट का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं किया. इनका कॉन्ट्रैक्ट हर साल रिन्यू हो जाता है लेकिन इस बार नीरजा श्रॉफ ने इन्हें फिर से टेंडर के लिए रिअप्लाई करने को कहा है. अभी तक KAPL के टेंडर पोजिशनिंग को लेकर कोई भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. 1 जुलाई से KAPL में काम कर रहे सभी सर्विस एजेंट, हॉस्पिटल स्टॉकिस्ट और सी&एफ एजेंट का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो जाएगा और सारा का सारा काम ठप्प पड़ जाएगा लेकिन इसके बावजूद अभी तक नीरजा श्रॉफ की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है.

पहले क्वार्टर में ही हो गया 25-30 करोड़ का नुकसान

हालांकि, इसके पीछे भी नीरजा श्रॉफ की मानसिकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ध्यान देने वाली बात है कि सरकार की जिन भी कंपनियों में नीरजा श्रॉफ बतौर एमडी और एडिशनल चार्ज के रुप में काम कर रही हैं. उन कंपनियों में आउटसोर्सिंग को लेकर बवाल मचा हुआ है. दरअसल, एक प्राइवेट कंपनी कृत्रिका रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड को नीरजा श्रॉफ ने करीब इन सभी सरकारी कंपनियों में प्रोडक्शन से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक की जिम्मेदारी सौंप रखी है. यहां तक कि HAL में कृत्रिका रेमेडीज की सिस्टर कंपनी PROTECH BIOSYSTEMS PVT LTD को कंपनी के प्रोडक्शन प्लांट्स भी लीज पर दिए गए हैं, जो सरकारी नियमों के खिलाफ है.

नियम ये कहते हैं कि किसी भी प्राइवेट कंपनी को सरकारी कंपनियों के प्लांट्स लीज पर नहीं दिए जा सकते. अगर कंपनी के पास ऑर्डर्स ज्यादा हैं, प्रोडक्शन का भार ज्यादा है, ऐसी परिस्थितियों में किसी प्राइवेट कंपनी को जिम्मेदारी दी जा सकती है लेकिन वो भी उसके प्लांट पर. समझने वाली बात ये है कि सरकार की ये सारी फार्मास्यूटिकल कंपनियां पहले से ही नुकसान में हैं, ऐसे में ज्यादा ऑर्डर मिलना या प्रोडक्शन का भार ज्यादा होने का दावा तो कतई नहीं किया जा सकता. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ये प्राइवेट कंपनी कृत्रिका रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड सरकारी प्लांट में अपने हिसाब से प्रोडक्शन करती है और पूरे देश में उसका डिस्ट्रीब्यूशन करती है लेकिन जब फाइनल प्रोडक्ट निकल कर बाहर आता है तो उस पर सरकारी कंपनियों का लेबल लगा होता है.

अब KAPL में भी कृत्रिका रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड को घुसाने के लिए नीरजा श्रॉफ की ओर से टेंडर फ्लॉट किया गया है! मौजूदा समय में नीरजा HAL की एमडी हैं और इस कंपनी को KAPL का कंपटेटर माना जाता है. एक ओर HAL लंबे समय से नुकसान में है तो वहीं KAPL ने सरकार को जबरदस्त प्रॉफिट बनाकर दिया है. ऐसे में KAPL का एडिशनल चार्ज हाथ में आते ही नीरजा ने इसके पूरे सिस्टम को डिस्टर्ब करना शुरु कर दिया है! प्रोडक्शन की पूरी टीम पर जांच बैठा दी गई है. इनके आने के बाद से प्रोडक्शन की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है. इन्होंने कंपनी के पूरे डिस्ट्रीब्यूशन चैनल को ही डिस्टर्ब कर दिया, जिसका सीधा असर सेल पर पड़ा. सूत्रों की मानें तो मार्च 2024 में नीरजा के एडिशनल चार्ज संभालने के बाद पहले क्वार्टर में ही KAPL को 25-30 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. इसके अलावा KAPL के काम को संभाल रहे सर्विस एजेंट, हॉस्पिटल स्टॉकिस्ट और सी&एफ एजेंट का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं हुआ है. ऐसे में 1 जुलाई  2024 से इस बात की पूरी संभावना है कि KAPL का पूरा काम लगभग ठप्प पड़ जाए.

किसी के पास नहीं हैं इन सवालों के जवाब

अब आप भी सोच रहे होंगे कि सरकार की ये 4 महत्वपूर्ण कंपनियां एक ही शख्स नीरजा श्रॉफ के इर्द गिर्द कैसे घूम रही है? सही मायने में कहें तो इसका जवाब हमारे पास भी नहीं है. एक महिला, एक ही समय पर सरकार की इन 4 बड़ी कंपनियों को एमडी और एडिशनल चार्ज जैसे पद पर रहते हुए कैसे संभाल सकती है, ये सोचने वाली बात है. एडिशनल चार्ज का मतलब समझे तो इस पद पर बैठे शख्स की जिम्मेदारी कंपनी के डे टू डे एक्टिविटी से जुड़ी होती है. कंपनी के हर दिन की एक्टिविटी में इस पद का रोल काफी अहम होता है लेकिन इसके बावजूद दिल्ली में बैठकर नीरजा चार अलग अलग जगहों पर स्थित इन 4 कंपनियों को कैसे संभाल पा रही हैं, इस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.

इसे लेकर सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं कि एक ही शख्स को इन सारी बड़ी कंपनियों में इतना अहम पद कैसे दिया जा सकता है? एक ही शख्स को सरकारी फार्मास्यूटिकल कंपनियों की जिम्मेदारी कैसे सौंपी जा सकती है? जिन CPSEs में लंबे समय से MD नहीं हैं, उन सरकारी कंपनियों में इस पद के लिए वेकेंसी क्यों नहीं निकाली जा रही है? अगर एडिशनल चार्ज पर कोई भी शख्स किसी भी कीमत पर 6 महीने से ज्यादा नहीं रह सकता, उन पदों पर नीरजा श्रॉफ 3-4 सालों से काम कैसे कर रही हैं? इन सरकारी कंपनियों में आउटसोर्सिंग को लेकर सरकार ने अपनी आंखों पर पट्टी क्यों बांध रखी है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब हर कोई ढूंढ रहा है.

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