जब लाखों लोगों ने 5 घंटे में गिरा दिया बाबरी मस्जिद का ढांचा

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Published: 05 Dec 2022, 12:00 AM | Updated: 05 Dec 2022, 12:00 AM

अयोध्या में लाखों कारसेवकों ने गिरा दिया विवादित बाबरी मस्जिद का ढांचा 

देश की राजनीति में 6 दिसंबर की तारीख इतिहास को पन्ना है जब अयोध्या में बनी बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया. इस दिन वो सब हुआ जिसकी आशंका कई सालों से जताई जा रही थी। कई सालों से अयोध्या की बाबरी मस्जिद को लेकर चल विवाद की आग इस दिन इतनी भड़क गयी कि देखते-देखते ही अयोध्या में लाखों कारसेवकों ने विवादित बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया। 

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बाबर के सेनापति ने कराया मस्जिद का निर्माण

अयोध्या जहाँ पर भगवान राम का जन्म हुआ था और भगवान राम के जन्मस्थान की याद में यहां पर मंदिर बनाया गया लेकिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या में इस राम मंदिर को तोड़कर मुगल सम्राट बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया।

भगवान राम की मूर्तियां हुई प्रकट

दिसंबर 1949 में, बाबरी मस्जिद के अंदर भगवान राम की मूर्तियां ‘प्रकट’ हुई। जिसके बाद इस मस्जिद का विरोध शुरू हुआ। मुसलमानों और हिन्दुओं दोनों पक्षों द्वारा इस विरोध के मामले दर्ज कराए गए। बाद के वर्षों में हाशिम अंसारी ने मुसलमानों के लिए और निर्मोही अखाड़े ने हिंदुओं के लिए एक मुकदमा दायर किया और सरकार ने स्थल को विवादित घोषित कर ताला लगा दिया। 

देश भर में निकली रथयात्रा

इसके बाद साल 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्मभूमि आंदोलन को जारी रखने का प्रण किया। तब भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को स्थल पर एक भव्य ‘राम मंदिर’ के निर्माण के अभियान का नेता और चेहरा बने इस विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने के लिए लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने देश भर में रथयात्रा निकाली। इन रथयात्रा के बाद देश में राम मंदिर निर्माण की हवा तेज हो गयी और आलम ये था कि तब यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव 30 पुलिस को बाबरी मस्जिद की ओर मार्च कर रहे हिंदुत्ववादी भीड़ पर गोलियां चलाने का आदेश दिया, जिसमें सरकार के अनुसार 16 कारसेवक मारे गए थे।

5 घंटे में गिर गया  बाबरी मस्जिद का ढांचा

इसके बाद दिन आया 6 दिसंबर जब सुबह लालकृष्ण आडवाणी कुछ लोगों के साथ विनय कटियार के घर गए थे। जिसके बाद वो विवादित स्थल की ओर रवाना हुए। मुरली मनोहर जोशी और विनय कटियार के साथ आडवाणी उस जगह पर पहुंचे, जहां प्रतीकात्मक कार सेवा होनी थी। वहां, उन्होंने तैयारियों का जायजा लिया। इसके बाद आडवाणी और जोशी ‘राम कथा कुंज’ की ओर चल दिए, जो उस जगह से करीब दो सौ मीटर दूर था। वहां वरिष्ठ नेताओं के लिए मंच तैयार किया गया था, यह स्थल विवादित ढांचे के ठीक सामने था। वहीं  उस समय तेजी से उभरती भाजपा की युवा नेता उमा भारती भी वहां उपस्थित थी।

कहा जाता है कि 6 दिसंबर को अयोध्या में लगभग डेढ़ लाख कारसेवक मौजूद थे। बताया यह भी जाता है कि भीड़ ने 5 घंटे में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया। इस घटना के बाद जो कुछ भी हुआ वह देश की एकता-अखंडता के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं था। देशभर में अलग-अलग जगह सांप्रदायिक दंगे भड़क गए। इन दंगों में कई लोगों की जान चली गई। चरों तरफ अयोध्या जय श्री राम, राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे, के नारों से गूंज रही थी। लेकिन ये आग फिर कुछ समय बाद ठंडी हो गयी और एक बार ये मामला उच्चतम न्यायालय में चला गया.

 इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई  FIR

बाबरी मस्जिद को गिराने के मामले में हजारों अज्ञात कार सेवकों पर  डकैती, चोट पहुंचाने, सार्वजनिक पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाने/अपवित्र करने, धर्म के आधार पर दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने आदि का आरोप लगाया गया था। राम कथा कुंज सभा मंच से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में भाजपा, विहिप, बजरंग दल और आरएसएस के आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर और आठ नामित आरोपियों में लालकृष्ण आडवाणी, अशोक सिंघल, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी रितांबरा, मुरली मनोहर जोशी, गिरिराज किशोर और विष्णु हरि डालमिया के खिलाफ FIR दर्ज हुई. परन्तु, अब सभी लोगों को बरी कर दिया गया है

9 नवंबर को आया ऐतिहासिक फैसला 

फिर आई नौ नवंबर, 2019 की वो तारिख जब अयोध्या में राम जन्मभूमि को लेकर दशकों तक चले विवाद पर Supreme court ऐतिहासिक फैसला दिया. इस मामले पर प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने फैसले सुनते हुए 2.77 एकड़ विवादित जमीन को ‘राम लला’ के पक्ष में देने का आदेश दिया और केंद्र सरकार को अयोध्या में पांच एकड़ जमीन मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का निर्देश दिया था।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में घटी यह घटना इतिहास में प्रमुखता के साथ दर्ज है। इससे देश के दो संप्रदायों के बीच दरार और गहरा गई थी। तब से बाबरी विध्वंस की बरसी पर एक पक्ष ‘शौर्य दिवस’ मनाता रहा जबकि दूसरा पक्ष इस दिन को काला दिवस ने रुप में मनाती है.

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