Avimukteshwaranand Notice Prayagraj: संगम की पवित्र रेती पर चल रहे माघ मेले में धर्म और प्रशासन के बीच जारी तनाव अब कानूनी मोड़ पर आ गया है। मौनी अमावस्या के दिन हुए हंगामे के बाद धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने औपचारिक नोटिस थमाया है। इस नोटिस में उनके ‘शंकराचार्य’ संबोधन की वैधता पर सवाल उठाया गया है और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला दिया गया है।
नोटिस का अहम सवाल: शंकराचार्य पद की वैधता (vimukteshwaranand Notice Prayagraj)
प्रशासन ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि वे अपने आपको ‘ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य’ के रूप में कैसे प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। मेला प्राधिकरण ने अविमुक्तेश्वरानंद को अपना पक्ष रखने के लिए केवल 24 घंटे का समय दिया है। यह कदम मौनी अमावस्या के बाद उनके विरोध और धरने की कार्रवाई के कारण उठाया गया। स्वामी इस समय अपने शिविर में नहीं बल्कि खुले में धरने पर बैठे हुए हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का हवाला
नोटिस की कानूनी बुनियाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व आदेश पर टिकी है। प्रशासन ने कहा है कि जब तक हाईकोर्ट ज्योतिष्पीठ के पट्टाभिषेक के संबंध में कोई अंतिम आदेश नहीं देता, कोई भी धर्माचार्य आधिकारिक रूप से खुद को शंकराचार्य नहीं बता सकता। इस पद का विवाद अभी अदालत में विचाराधीन है। प्रशासन का तर्क है कि इस दौरान पद का उपयोग करना नियमों के खिलाफ हो सकता है और इससे विवाद और बढ़ सकता है।
मौनी अमावस्या पर हुआ विवाद
मौनी अमावस्या के दिन अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और प्रशासन के बीच तीखी बहस हुई थी। सूत्रों के अनुसार, उस दौरान अधिकारियों ने उनके शिष्यों के साथ मारपीट की। इस घटना से आहत होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम में पवित्र स्नान करने से मना कर दिया और विरोध स्वरूप धरने पर बैठ गए। तब से वे शिविर में प्रवेश नहीं कर रहे हैं।
माफी और ससम्मान स्नान की मांग पर अड़े स्वामी
स्वामी का कहना है कि प्रशासन का व्यवहार अपमानजनक था। उनकी मांग है कि जब तक संबंधित अधिकारी स्वयं आकर माफी नहीं मांगते और उन्हें ससम्मान संगम स्नान नहीं कराते, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। उन्होंने साफ कहा कि माघ मेले की पूर्णिमा तक वे इसी तरह धरने पर रहेंगे और भविष्य में भी प्रशासन उन्हें सम्मान नहीं देगा तो संगम स्नान नहीं करेंगे।
माघ मेले का महत्व और चुनौती
प्रयागराज का माघ मेला इस समय अपने चरम पर है। महाशिवरात्रि पर अखाड़ों के अंतिम स्नान के साथ ही यह मेला समाप्त होगा। वर्ष 2026 में अब तक करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं और संगम तट पर हर दिन लाखों की भीड़ उमड़ रही है। ऐसे में एक बड़े धर्माचार्य और प्रशासन के बीच यह विवाद सुरक्षा और व्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। नोटिस ने धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस भी शुरू कर दी है, और यह देखना बाकी है कि अविमुक्तेश्वरानंद प्रशासन को अपना पक्ष कब और कैसे पेश करेंगे।





























