Ajit Pawar Plane Crash : हाल ही में मुंबई के पास पर एक दुखद घटना हुई. अचानक हुए प्लेन क्रैश में कई लोगों की जान चली गई, जिनमें 66 साल के NCP नेता और महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार भी शामिल थे. माना जा रहा है कि यह हादसा खराब मौसम की वजह से हुआ. अजीत पवार आज बारामती में कई राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने वाले थे.
उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन
आज सुबह लगभग 9 बजे के आसपास बारामती एयरपोर्ट (Baramati Airport) से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई. जिसमे कई लोगो की मौत हो गयी. इस हादसे में 66 साल के NCP नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया. वही रिपोर्ट्स भी बताते अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत हो गई. दरअसल, अजित पवार (Ajit Pawar) चुनाव प्रचार के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे, विमान के लैंडिंग के दौरान ये हादसा हुआ. आपको बता दें कि अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा गांव में हुआ था. उनके पिता अनंतराव पवार और मां का नाम आशाताई पवार था..वे शरद पवार के छोटे भाई के बेटे हैं, शरद पवार महाराष्ट्र के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं.
महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजीत पवार की प्लेन क्रैश में मौत, हादसे में तीन और लोगों की मौत. बारामती में लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा…#Maharashtra #MaharashtraPlaneCrash #AjitPawar #planecrash #Nedricknews pic.twitter.com/TV4kjUsU5L
— Nedrick News (@nedricknews) January 28, 2026
अजित पवार के करियर की शुरुआत
ग्रामीण भारत की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के बीच बड़े होते हुए, उन्हें किसानों और कृषि समुदाय को प्रभावित करने वाले मुद्दों की समझ मिली…अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के राजनीतिक नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में प्रवेश किया, जनता और समर्थकों के बीच वह ‘दादा’ के नाम से लोकप्रिय थे…अजित पवार ने राजनीति की शुरुआत 1982 में की, जब वह 20 साल के थे, उन्होंने सबसे पहले एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़ा, 1991 पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने, 16 साल तक इस पद पर रहे…इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, उन्होंने कृषि, बागवानी, बिजली और जल संसाधन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया.
महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वाकांक्षी और प्रभावशाली नेता
अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वाकांक्षी और प्रभावशाली नेता माना जाता है..2009 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने उप मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन उस समय यह पद छगन भुजबल को मिला..हालांकि, दिसंबर 2010 में वह पहली बार उप मुख्यमंत्री बने. 2013 में उनका नाम सिंचाई घोटाले से जुड़े विवाद में आया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. बाद में उन्हें क्लीन चिट मिली और वह फिर से पद पर लौटे, अजित पवार को एक मजबूत संगठनकर्ता और प्रशासनिक अनुभव वाले नेता के रूप में देखा जाता रहा. राजनीतिक मतभेदों के बाद भी उन्होंने हमेशा खुद को शरद पवार का अनुयायी बताया है..अजित पवार के निधन पर पीएम मोदी ने दुख जताया है. उन्होंने देवेंद्र फडणवीस से फोन पर बातचीत करके जानकारी ली है.





























