हिमाचल भवन के बाद दिल्ली में बीकानेर हाउस को जब्त करने का आदेश, जानें क्या है पूरा मामला

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 21 Nov 2024, 12:00 AM | Updated: 21 Nov 2024, 12:00 AM

Bikaner House News: दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस की कुर्की का आदेश हाल ही में पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) ने जारी किया है। यह आदेश राजस्थान की नोखा नगर पालिका और एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच विवाद के चलते आया है। कोर्ट ने यह आदेश तब जारी किया जब नगर पालिका ने कंपनी को 50.31 लाख रुपए का भुगतान करने के आदेश का पालन नहीं किया।

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कोर्ट ने क्या कहा? (Bikaner House News)

कोर्ट ने 21 जनवरी 2020 को नोखा नगर पालिका (Nokha Municipality) को एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स को भुगतान के संबंध में आदेश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद नगर पालिका ने तय राशि का भुगतान नहीं किया। इस पर कोर्ट ने यह सख्त कदम उठाते हुए आदेश दिया कि जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, नगर पालिका को बीकानेर हाउस के संबंध में कोई निर्णय लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस संबंध में अगली सुनवाई 29 नवंबर को होनी है, जिसमें बीकानेर हाउस की बिक्री की शर्तों और अन्य प्रक्रियाओं पर विचार किया जाएगा।

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कोर्ट ने क्या कहा?

इससे पहले जज ने 18 सितंबर को पारित आदेश में कहा था कि कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। जज ने कहा कि यह देखते हुए कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद देनदार अपनी संपत्ति का हलफनामा पेश करने के निर्देश का पालन करने में विफल रहा है, कोर्ट डिक्री धारक (डीएच) की ओर से प्रस्तुत तर्कों से सहमत है और पाया कि यह देनदार की अचल संपत्ति यानी बीकानेर हाउस के खिलाफ कुर्की वारंट जारी करने के लिए उपयुक्त मामला है।

हिमाचल भवन को भी किया कुर्क

यह मामला एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम से जुड़ा है, जिसमें हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से भी विवाद खड़ा हो गया है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय (Himachal Pradesh High Court) ने दिल्ली के मंडी हाउस स्थित हिमाचल भवन को कुर्क करने का आदेश जारी किया है। यह आदेश राज्य सरकार द्वारा सेली हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी का बकाया न चुकाने के कारण दिया गया है। 2009 में सेली हाइड्रो कंपनी को एक प्रोजेक्ट मिला था, जिसके लिए उसने हिमाचल सरकार को 64 करोड़ रुपये का अग्रिम प्रीमियम दिया था। हालांकि, प्रोजेक्ट बंद होने के बाद सरकार ने कंपनी से मिले 64 करोड़ रुपये जब्त कर लिए।

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आर्बिट्रेशन कोर्ट में चुनौती

कंपनी ने इस फैसले को आर्बिट्रेशन कोर्ट में चुनौती दी और आर्बिट्रेशन कोर्ट ने सरकार को 7 प्रतिशत ब्याज के साथ 64 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया। लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक इस आदेश का पालन नहीं किया है। अब कंपनी पर सरकार का करीब 150 करोड़ रुपये बकाया है और कोर्ट ने इस बकाया के एवज में हिमाचल भवन को कुर्क करने और नीलाम करने का आदेश दिया है। हालांकि, हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

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