1984 के सिख नरसंहार में बाल बाल बची थी अभिनेत्री तापसी पन्नू की फैमिली

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 28 Feb 2024, 12:00 AM | Updated: 28 Feb 2024, 12:00 AM

ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद इंदिरा गांधी की हत्या ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. उनकी हत्या के बाद पूरे देश में सिखों के खिलाफ माहौल बन गया था. कांग्रेस समर्थकों ने, यहां तक कि कई कांग्रेसी नेताओं ने भी राजधानी दिल्ली से लेकर देश के हर हिस्से में सिखों के खिलाफ जहर उगलना शुरु कर दिया था…नतीजा यह हुआ कि ढूंढ ढूंढ कर सिखों की हत्याएं की गई..गले में टायर डाल कर उन्हें जला दिया गया…सिख बहन बेटियों से रेप हुआ..सड़कों पर दौड़कर उनकी हत्या कर दी गई.

केवल दिल्ली में 3000 से अधिक सिखों की हत्या हुई थी..अगर पूरे देश में यह आंकड़ा देखा जाए तो नंबर बहुत बड़ा होगा.. भारतीय इतिहास में इसी घटना को सिख नरसंहार के नाम से जाना जाता है. इस लेख में आज हम आपको बताएंगे कि 1984 के सिख दंगों में अभिनेत्री तापसी  पन्नू का परिवार कैसे बचा था ?

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तापसी ने कही थी ये बात

मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में तापसी पन्नू ने इस घटना का जिक्र किया था..वो बताती  हैं कि उस समय उनके माता पिता की शादी नही हुई थी. पिता शक्ति नगर में अपने आवास में रहते थे जबकि मां ईस्ट दिल्ली में रहती थी. तापसी कहती हैं कि उस वक्त के बारे में मैं जितना भी जानती हूं ,उतना मैने उनसे ही सुना है. मेरी मां बताती हैं कि उनका मोहल्ला काफी सुरक्षित था जबकि पिता शक्ति नगर में रहते थे और वह इस इलाके में अकेले ऐसे व्यक्ति थे, जो सिख समुदाय से ताल्लुक रखता हो. हमारे घर के बाहर जोंगा खड़ी रहती थी. उस दौर में ज्यादातर लोगों के पास कार नही थी.

तापसी बताती हैं कि उस समय दंगाई पेट्रोल बम और तलवार लेकर आए थे. क्योंकि उनको इस बात की भनक थी कि शक्ति नगर में यही अकेला सिख परिवार है. मेरे घर वाले लाइट बंद कर अंदर कमरों में छुप गए थे. भागने का कोई रास्ता नही था क्योंकि उन्हें पता था कि घर को चारों और से घेर लिया गया है. मेरे पिता जिस मकान में किराए पर रहते थे वहां चार और परिवार रहते थे. लेकिन वह सब हिंदू थे. दंगाई हमारे घर के गेट तक आ गए और हमारे परिवार के बारे में पूछा तो वहां मौजूद हिंदू परिवारों ने उनसे झूठ बोल दिया कि वे भाग गए हैं. जब उनको पता लगा कि बाहर खड़ी जोंगा हमारी है तो दंगाइयों ने उसमें आग लगा दी. इस तरह आस पड़ोस के लोगों की होशियारी से पापा और परिवार वाले सुरक्षित बच पाए थे.

तापसी के अलावा हजारों सिख परिवार इस दंगे की आग में झुलसे थे. देश के  हर हिस्से में सिखों की हत्याएं हो रही थीं. दंगाइयों की भीड़ हर जगह उन्हें निशाना बना रही थी. सिखों को देखते ही मार दिया जाता था. इस नरसंहार के बाद काफी ज्यादा संख्या में सिखों ने भारत छोड़ दिया और  दुनिया के अन्य हिस्सों  में बस गए. सिख नरसंहार देश पर एक दाग के समान है, जिसे अपनी मन की तृप्ति के लिए कुछ राजनीतिक पार्टियों ने जानबूझकर कराया था.

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