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अविश्वास प्रस्ताव का पूरा प्रोसेस क्या है और क्या है इसकी हिस्ट्री ?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 09 Aug 2023, 12:00 AM | Updated: 09 Aug 2023, 12:00 AM

What is No Confidence Motion in Hindi – 2024 में होने वाले चुनाव की रणनीतियों व तैयारियों का ट्रेलर आज संसद में दिखने वाला है. मणिपुर में डबल इंजन की सरकार होने के बाद भी हिंसा तथा हालात को काबू करने में सरकार नाकामयाब नजर आई, जिसके कारण विपक्ष ने लोकसभा में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. बीते दिन मंगलवार से इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरु हो गई है.

कांग्रेस की ओर से गौरव गोगोई ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरु की. अगले 3 दिनों तक इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी, जिसमें सरकार को कई सवालों के जवाब देने होंगे. खबरों की मानें तो पीएम नरेंद्र मोदी 10 अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव पर अपना जवाब दे सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अविश्वास प्रस्ताव होता क्या है, इसका प्रोसेस क्या है? कब शुरु हुआ? अविश्वास प्रस्ताव से अब तक कितनी सरकारें गिरी है? आज के इस लेख में हम आपको अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ी हर एक बात बताएंगे.

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अविश्वास प्रस्ताव का पूरा प्रोसेस

अविश्वास प्रस्ताव सामान्यत: विपक्षी दल द्वारा लोकसभा (What is No Confidence Motion) में पेश किया जाता है. इस प्रस्ताव को पास करने के लिए 50 सांसदों का समर्थन होना जरुरी होता है और यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो 10 दिनों के अंदर इस पर चर्चा होती है. प्रस्ताव की जानकारी सदन को लिखित में देनी होती है और साथ ही लिखित जानकारी में यह भी बताना होता है कि इस प्रस्ताव के लिए 50 संसदों का समर्थन प्राप्त है. अविश्वास प्रस्ताव विपक्षी दल द्वारा तब पेश किया जाता है जब उन्हें किसी मुद्दे पर नाराजगी रहती है या वह सरकार के कामकाज से खुश नहीं रहते है या उन्हें लगता है कि सदन में सरकार ने विश्वास खो दिया है. अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद सरकार को सदन में बहुमत हासिल करना होता है और यदि सरकार बहुमत प्राप्त करने में नाकाम होती है तो पूरे मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना पड़ता है.

मोदी सरकार (No Confidence Motion against Modi Government) के विरोध यह अभी तक दूसरा अविश्वास प्रस्ताव है. इससे पहले 2018 में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था. मौजूदा समय में एनडीए गठबंधन पूर्ण बहुमत में है और विपक्ष यह जानता है कि अविश्वास प्रस्ताव (What is No Confidence Motion) से मोदी सरकार को कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन इसके बावजूद अविश्वास प्रस्ताव लाना एक रणनीति की ओर इशारा करता है. विपक्ष मोदी सरकार से मणिपुर में पैदा हुए हालात को लेकर जवाब चाहता है. विपक्ष चाहता है कि पीएम मोदी खुद इस मसले पर जवाब दें.

अविश्वास प्रस्ताव का इतिहास क्या है ?

लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव (History of No Confidence Motion) नियम 198 के तहत पेश किया जाता है. नियम 198 के अनुसार, सदन के सदस्य यदि सरकार के विरुद्ध है तो वह लोकसभा अध्यक्ष को लिखित में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे सकते हैं. आजादी के बाद अभी तक भारत में 28 अविश्वास प्रस्ताव पेश हो चुके हैं, जिसमें सबसे ज्यादा कांग्रेस पार्टी के खिलाफ पेश हुए हैं. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ 15 बार अविश्वास प्रस्ताव लाये गए थे. भारतीय इतिहास में अविश्वास प्रस्ताव के कारण दो बार सरकार गिरी है. पहली मोरारजी देसाई (No Confidence Motion against Morarji Desai) की सरकार व दूसरी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार सदन में बहुमत हासिल नही कर पाई थी और उनके पूरे मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना पड़ा था.

अगर हम सदन में पेश हुए पहले अविश्वास प्रस्ताव की बात करें तो यह देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विरुद्ध लाया गया था. 1963 में लोकसभा में जे बी कृपलानी ने नेहरु सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था  और इस प्रस्ताव के पक्ष में 62 वोट पड़े थे, जबकि इसके विरोध में 347 वोट थे जिसके कारण यह प्रस्ताव गिर गया था. नेहरु के बाद देश में लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बनें. उनके समय में 3 बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया लेकिन वह तीनों ही बार बहुमत हासिल करने में सफल साबित हुए. उनके बाद इंदिरा गांधी पीएम बनीं थी और उनके समय में सबसे ज्यादा 15 अविश्वास प्रस्ताव पेश हुए थे लेकिन हर बार वह सरकार को बचाने में कामयाब रही थीं.

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अविश्वास प्रस्ताव से दो बार गिरी है सरकार

What is No Confidence Motion – लोकसभा में 1978 को मोरारजी देसाई सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया और उस समय सरकार बहुमत हासिल करने में नाकाम हो गई. अपनी हार का अंदाजा होने पर मोरारजी देसाई ने वोटो की गिनती से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया और इस तरह भारत में अविश्वास प्रस्ताव से पहली बार सरकार गिरी. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के विरुद्ध 2 बार अविश्वास प्रस्ताव पेश हुए. पहली बार वाजपेयी अपनी सरकार बचाने में सफल हुए लेकिन दूसरी बार वह अपनी सरकार नहीं बचा पाए थे. आपको बता दें कि 2008 में सीपीएम ने मनमोहन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था. कारण था अमेरिका के साथ हुआ परमाणु समझौता. मनमोहन सरकार ने तब मामूल अंतर से बहुमत हासिल किया था और सरकार गिरते गिरते बची थी.

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