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4500 Year Underground Complex: मिस्र का छिपा रहस्य, पिरामिडों के नीचे 100 फुट गहराई में क्या है दफन?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 26 Oct 2025, 12:00 AM | Updated: 26 Oct 2025, 12:00 AM

4500 Year Underground Complex: मिस्र के गीजा पिरामिड दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक हैं, लेकिन अब उनसे महज तीन मील की दूरी पर एक और हैरान करने वाली खोज ने इतिहासकारों और वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इस जगह का नाम है जावेयत अल आर्यन (Zawyat Al Aryan) एक ऐसा भूमिगत कॉम्प्लेक्स जो करीब 4500 साल पुराना बताया जा रहा है और कई दशकों तक मिस्र की सेना के नियंत्रण में रहा है।

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गहराई में छिपा रहस्य- 4500 Year Underground Complex

इस जगह के बीचों-बीच चूना पत्थर की एक विशाल चट्टान को काटकर बनाया गया T-आकार का गड्ढा है। इसकी गहराई करीब 100 फुट बताई जाती है। सिर्फ इतना ही नहीं, इस संरचना में ग्रेनाइट के कई विशाल पत्थर लगे हैं, जिनमें से हर एक का वजन करीब 8,000 किलो तक है। इन विशाल पत्थरों को जिस तरह से काटा और जोड़ा गया है, उसने पुरातत्वविदों को भी चौंका दिया है।

सबसे रहस्यमय खोज: ग्रेनाइट का अंडाकार कंटेनर

इस कॉम्प्लेक्स के अंदर एक विशेष कमरा है जिसमें पूरी तरह ग्रेनाइट से बना अंडाकार कंटेनर रखा गया है। यह लगभग 10 फुट लंबा, 7 फुट चौड़ा और 5 फुट गहरा है। माना जाता है कि कभी इसमें कोई अज्ञात पदार्थ मौजूद था, जो अब लापता है। यही वजह है कि कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह जगह सिर्फ किसी राजा की कब्र नहीं थी, बल्कि शायद धार्मिक अनुष्ठानों या वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए इस्तेमाल होती रही हो। कुछ लोग तो इसे एलियंस से जुड़ी जगह भी मानते हैं।

वैज्ञानिकों की राय और ऐतिहासिक संदर्भ

इतिहासकारों का कहना है कि यह कॉम्प्लेक्स चौथे राजवंश के समय का हो सकता है। पास में मिली एक टूटी हुई पट्टी (इंसक्रिप्शन) से लगता है कि यह राजा जेडेफ्रे (Djedefre) से जुड़ा हो सकता है — वही राजा जो खुफू (Khufu) का पुत्र था। लेकिन बाकी पिरामिडों की तरह यहां ऊपर की कोई इमारत नहीं मिली, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह साइट शायद कभी पूरी नहीं हो पाई या फिर किसी प्रयोगात्मक परियोजना (Experimental Site) के रूप में बनाई गई थी।

क्यों कहा जाता है इसे मिस्र का “Area 51”

1960 के दशक के बाद मिस्र की सेना ने इस पूरे क्षेत्र को सील कर दिया, और तब से यहां आम लोगों या शोधकर्ताओं का प्रवेश वर्जित है। पिछले छह दशकों में यहां कोई नई खुदाई या आधिकारिक सर्वे नहीं हुआ। यही वजह है कि इसे अब “मिस्र का Area 51” कहा जाने लगा है क्योंकि यहां जो भी है, वो पूरी तरह रहस्य में लिपटा हुआ है।

एलियंस और खोई हुई तकनीक की थ्योरी

Daily Mail की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जगह की गुप्तता ने लोगों की जिज्ञासा और बढ़ा दी है। कुछ लोग मानते हैं कि यह साइट प्राचीन सभ्यताओं की खोई हुई तकनीक से जुड़ी है, जबकि कुछ इसे एलियन बेस कहकर चर्चाएं चला रहे हैं।

अब भी अनसुलझा है यह रहस्य

इस रहस्यमय जगह के शुरुआती रिकॉर्ड्स पुरातत्वविद एलेसेंड्रो बार्सांती ने 1900 के दशक की शुरुआत में बनाए थे। तब से लेकर अब तक इस जगह को लेकर कोई नया वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ। इतने वर्षों बाद जब इन पुरानी तस्वीरों को फिर से सार्वजनिक किया गया, तो एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ —
क्या यह अधूरी छोड़ी गई मिस्र की परियोजना है, या 4500 साल पुराना कोई ऐसा रहस्य जो आज तक दुनिया से छिपा हुआ है?

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