क्या आपको भी चाहिए हथियार रखने का Licence (Weapon Licence) ? क्या है इसका पूरा Process ?

By Reeta Tiwari | Posted on 13th Jan 2023 | शिक्षा
Weapon License

कैसे Weapon Licence ले सकते हैं आप ?

पैगम्बर मुहम्मद पर विवादित बयान देने वाली नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) को अब हथियार रखने की मंजूरी मिल गई है और इसके लिए उन्हें Weapon Licence भी मिल गया है लेकिन आप ये जरूर सोच रहे होंगे कि इनको ये हथियार रखने का लाइसेंस क्यों और कैसे मिला ? आपको क्यों और कैसे मिलेगा ये लाइसेन्स आज इसकी कानूनी प्रक्रिया क्या है ये आपको बताएँगे ?

नूपुर शर्मा का विवादित किस्सा क्या है ?

नूपुर शर्मा BJP (Bhartiya Janta Party) की पूर्व प्रवक्ता थी लेकिन अब नहीं हैं जिसकी वजह है पैगम्बर मुहम्मद पर उनका विवादित बयान। पैगम्बर मुहम्मद पर नुपुर शर्मा ने एक ऐसा बयान दिया जिससे देश और दुनियाभर में इस्लामिक और गैर-इस्लामिक (Non-Islamic) देशों ने जमकर विरोध किया और बाद में दबाव में आकर भाजपा को इन्हें पद से तत्काल बर्खास्त करना पड़ा। नुपुर के खिलाफ राज्य भर में सैकड़ों FIR (First Information Report ) दर्ज हुई जिसके चलते नुपुर का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया और अब उन्हें हथियार रखने का लाइसेंस मिल गया। अब नुपुर को ये लाइसेंस कैसे मिला इसके क्या कानूनी नियम हैं हम आपको पूरी जानकारी देंगे।


किसे है लाइसेंस जारी करने का अधिकार, कौन होते हैं ये अधिकारी ?

शस्त्र अधिनियम (Arm Act),1959 के शस्त्र आशोधन अधिनियम, 2019 के अनुसार, किसी भी हथियार के लाइसेंस को जारी करने का अधिकार राज्य के गृह विभाग के पास होता है। अलग-अलग राज्यों के जिलाधिकारी (District Majistrate), जिला कलेक्टर, कमिश्नर या फिर इसी रैंक के अन्य अधिकारी इसका लाइसेंस जारी करते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में पुलिस थाना और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की भी अहम भूमिका होती है.

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क्या है Arm Act 1959 ?

इस एक्ट के अनुसार, इस अधिनियम का उद्देश्य 'हथियारों और गोला-बारूद से संबंधित कानून को समेकित और संशोधित करना है। 'इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य हथियारों और गोला-बारूद के संचलन को विनियमित और प्रतिबंधित करना है, जो अवैध थे ताकि इन हथियारों से होने वाली हिंसा को काफी हद तक रोका जा सके। उसी शस्त्र अधिनियम की धारा 13(2) के तहत नए शस्त्र का लाइसेंस लेने के लिए आवेदन करने का प्रावधान भी है. शस्त्र अधिनियम, 1959 में साल 2016 और 2019 में महत्वपूर्ण संशोधन भी किए जा चुके हैं.

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क्या है आवेदन के तरीके ?

देश के हर राज्य में हथियार के लिए लाइसेंस जारी करने की अपनी प्रक्रिया है. यूपी में गन लाइसेंस हासिल करने के लिए सबसे पहले एक नियमानुसार दिए हुए फॉर्म को भरकर (आर्म्स रूल 2016 प्रारूप घ-4) में आवेदन करना होता है. फिर यह आवेदन शस्त्र अधिनियम (Arm Act), 1959 की धारा 13(2) के तहत दाखिल किया जाता है. इसमें तीन तरह के प्रारूप होते हैं. देश के कई राज्यों में ये प्रक्रिया ऑनलाइन भी है. 


आवेदन के वक्त देनी होगी हथियार की पूरी जानकारी

लाइसेंस का आवेदन करते वक्त आपको इस बात की पुष्टि करनी होगी कि किस तरह के हथियार को रखने और चलाने के लिए आपको लाइसेंस लेना है. मसलन पिस्तौल, रिवॉल्वर जैसे छोटे हथियार या फिर राइफल, एकनाली या दोनाली जैसी बड़ी बंदूक लेनी है. कुछ हथियार ऐसे हैं जो पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं और उनका लाइसेंस नहीं दिया जा सकता है इन प्रतिबंधित हथियारों में 38 बोर, 9 एमएम और 303 जैसे हथियार शामिल हैं.

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कैसे करती है पुलिस और LIU अपनी जांच ?

जब लाइसेंस के लिए अप्लाई करते हैं, उसके बाद पुलिस की भूमिका भी बढ़ा जाती है। इस प्रारूप यानी फॉर्म की एक कॉपी जिसे अनुसूची 3 कहा जाता है, वो जांच के लिए पुलिस यानी एसएसपी या पुलिस कमिश्नर के ऑफिस जाती है. जहां से एक कॉपी संबंधित थाने के पास जाती है और कॉपी एलआईयू के पास जाती है. पुलिस को इस बात की पुष्टि करनी होती है कि लाइसेंस आवेदक बताए स्थान का ही रहने वाला है या नहीं। कहीं उसके ऊपर कोई आपराधिक मुकदमा है और अगर दर्ज है तो मामला क्या है ? इन सब बातों को कन्फर्म करने के लिए इस जांच की लिखित जानकारी DCRB (District Crime Record Bureau) को भेजी जाती है। ठीक इसी तरह LIU भी आवेदक की एक खुफिया जांच करती है जिसमे वो ये पता लगाती है की कहीं शख्स किसी देश विरोधी या कोई ऐसा काम तो नहीं करता है जिससे लोगों के मन में डर पैदा होता हो। अब ये रिपोर्ट सीओ या एसपी के पास जाती है जिस पर SHO का एफिडेविट भी होता है।

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डीएम कैसे करते हैं आवेदक के आवेदन पत्र और रिपोर्ट की जांच ?

थाने से जब रिपोर्ट जिला अधिकारी के पास पहुंचती है तब वो खुफिया तरीके से आवेदक के गाँव से लेखपाल को बुलाकर इस बात की पुस्टि करने भेजते है की आवेदक ने कहीं किसी की जमीन पर कब्ज़ा तो नहीं किया या किसी के साथ पारिवारिक विवाद तो नहीं है या फिर कोई सरकारी कर्जा तो नहीं इस बात की पुष्टि के बाद ये रिपोर्ट तहसीलदार के पास जाती है जिसपर तहसीलदार अपना हलफनामा लगाकर रिपोर्ट मजिस्ट्रेट के पास भेज देता है।

हथियार को लेकर आवेदक का वचन बंध और मेडिकल जांच

जब भी कोई आवेदक लाइसेंस के लिए अप्लाई करता है तो उसे अपने साथ लिखित तौर पर एक वचन बंध (Vachan Bandh) देना पड़ता है जिसमे वो यह लिखता है की वो उस हथियार और उसकी गोलियों को सुरक्षित तरीके से रखेगा और कभी उसका गलत कामों में उपयोग नहीं करेगा और हथियार की सुरक्षा के लिए भी सही इंतजामात करेगा जिससे की चोरी न हो। जिससे वो 1959 के आर्म एक्ट के अधिनियम का पालन करेगा। अगर वो इन नियमों का पालन नहीं करते तो उनका लाइसेंस रद्द हो सकता है और साथ ही आवेदक का मेडिकल टेस्ट होगा जिसमे आपके मानसिक संतुलन की रिपोर्ट ली जाती है।

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आवेदन के साथ लगने वाले दस्तावेज

अगर आप कभी भी कोई फॉर्म या किसी चीज़ की मांग करने जाते हैं तो आपको उससे सम्बंधित दस्तावेज की जरूरत तो पड़ती ही है। ठीक वैसे ही हथियार के लिए आवेदन के लिए कुछ जरूरी डाक्यूमेंट्स (Documents) भी लगाने होते हैं जैसे आधार, या पहचान प्रमाण पत्र, एड्रेस प्रूफ(Address Proof), मेडिकल सर्टिफिकेट(Medical Certificate), आयु प्रमाण पत्र (आपकी उम्र 21 वर्ष या उससे अधिक), चरित्र प्रमाण पत्र(Character Certificate) और साथ में तीन साल की ITR आदि जमा करना ज़रूरी है.

केवल रजिस्टर्ड दुकानों से खरीद सकते हैं हथियार

जब डीएम या कमिश्नर से लाइसेंस जारी हो जाता है तब सबसे ध्यान देने वाली बात होती है की आवेदक वही हथियार खरीदेगा जिसके लिए लइसेंस मिला है और सरकार द्वारा रजिस्टर्ड दुकानों से ही ये हथियार खरीद सकता है। हथियार खरीदने के बाद आवेदक को नजदीकी थाने में भी उसकी रिपोर्ट देनी पड़ती है।

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हथियार को एक राज्य से दूसरे या पूरे देश में ले जाने की प्रक्रिया ?

वैसे तो लाइसेंस वाले हथियार को सिर्फ अपने ही राज्य में ले जाने का अधिकार होता है, जिस राज्य के लिए आपको लाइसेंस जारी हुआ है लेकिन अगर आवेदक अपना हथियार राज्य के बाहर देश के किसी अन्य राज्य में ले जाना चाहता तो यह भी 1962 अधिनियम के उपाधिनियम 53 के अनुसार पूरे देश के लिए बनवा सकता है। आपका लाइसेंस राज्य द्वारा ही एक प्रोसेस के तहत आल इंडिया परमिट कर दिया जाता है. लेकिन सभी केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिए जाते हैं कि अगर किसी का लाइसेंस पूरे देश के लिए लागू होता है तो उसे गृह मंत्रालय से अनुमति लेनी होती है और शायद यही वजह है की इतने नियम और कानूनों की वजह से ही आज देश भर में बंदूकों की संख्या कम है।

आपको हमारी जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं और इन नियमों क्या किसी बदलाव की जरूरत है या नहीं ये भी हमें जरूर बताएं

Reeta Tiwari
Reeta Tiwari
रीटा एक समर्पित लेखक है जो किसी भी विषय पर लिखना पसंद करती है। रीटा पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ, विदेश, राज्य की खबरों पर एक समान पकड़ रखती हैं। रीटा नेड्रिक न्यूज में बतौर लेखक काम करती है।

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