वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। Budget 2026 को सरकार ने सुधारों, रोजगार, कौशल और समावेशी विकास का रोडमैप बताया है। इस बजट में महिलाओं, युवाओं, किसानों, नौकरीपेशा लोगों, निवेशकों और अल्पसंख्यक समुदाय सभी के लिए अलग-अलग घोषणाएं की गई हैं। कुछ फैसलों से जहां आम आदमी और सैलरी क्लास को राहत मिली है, वहीं शेयर बाजार के एक खास सेगमेंट में निवेश करने वालों के लिए नियम सख्त किए गए हैं।
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शेयर बाजार निवेशकों को झटका | Budget 2026
Budget 2026 में स्टॉक मार्केट से जुड़े निवेशकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग को लेकर किया गया है। सरकार ने इस हाई-रिस्क सेगमेंट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया जाएगा, जबकि ऑप्शंस ट्रेडिंग पर STT बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है।
बजट के बाद वित्त मंत्री ने साफ किया कि सरकार F&O कारोबार के खिलाफ नहीं है, लेकिन छोटे निवेशकों को जोखिम से बचाना चाहती है। सेबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस सेगमेंट में 90 प्रतिशत से ज्यादा खुदरा निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है।
विदेशी निवेशकों और कंपनियों के लिए क्या बदला
बजट में विदेशी निवेश को लेकर भी कुछ अहम फैसले किए गए हैं। भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों (PROI) को अब पोर्टफोलियो निवेश योजना के जरिए भारतीय कंपनियों में निवेश की अनुमति मिलेगी।
व्यक्तिगत निवेश सीमा को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और कुल निवेश सीमा को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 24 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा शेयर बायबैक से होने वाले मुनाफे पर अब सभी शेयरधारकों को कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा और कंपनी प्रमोटर्स पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स भी लगेगा। न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) को ‘अंतिम कर’ बनाते हुए इसकी दर 15 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत कर दी गई है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत
Budget 2026 में सैलरी क्लास को कई मोर्चों पर राहत दी गई है। संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है, जिससे टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त समय मिलेगा। शिक्षा और मेडिकल खर्च के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसों पर TCS को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। विदेश यात्रा पैकेज पर भी TCS की दर 20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है।
इसके अलावा छोटे करदाताओं के लिए नियम-आधारित स्वचालित प्रक्रिया लागू होगी। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाले मुआवजे को टैक्स से बाहर रखा गया है। सरकार ने यह भी ऐलान किया कि 1 अप्रैल से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा, जो पुराने कानून की जगह लेगा।
किसानों की आय बढ़ाने पर खास जोर
बजट 2026 में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती से जुड़ी आजीविका को मजबूत करने की कोशिश साफ नजर आती है। मछली पालन के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट की घोषणा की गई है। पशुपालन सेक्टर में एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट को बढ़ावा देकर ग्रामीण इलाकों में अच्छी नौकरियां सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
बागवानी और डिजिटल खेती को बढ़ावा
बागवानी फसलों के लिए बड़े प्रोत्साहन की घोषणा की गई है। नारियल प्रोत्साहन योजना के तहत पुराने और कम पैदावार वाले पेड़ों को बेहतर किस्मों से बदला जाएगा, जिससे करीब 3 करोड़ लोगों को फायदा होगा, जिनमें 1 करोड़ किसान शामिल हैं। काजू और कोको के लिए खास कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे ताकि भारत 2030 तक इन्हें प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड बना सके। साथ ही भारतीय चंदन के इकोसिस्टम को फिर से मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
डिजिटल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने के लिए ‘भारत-विस्तार’ नाम का मल्टीलिंगुअल AI-आधारित प्लेटफॉर्म लाया जाएगा, जो किसानों को स्मार्ट खेती और बेहतर फैसले लेने में मदद करेगा। ग्रामीण महिलाओं के लिए SHE-मार्ट्स की स्थापना का भी ऐलान किया गया है।
शिक्षा, स्किल और युवाओं पर फोकस
बजट में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश का वादा किया गया है। पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन खोलने और इंडस्ट्रियल व लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाने का प्रस्ताव है।
लड़कियों की उच्च शिक्षा के लिए हर जिले में STEM संस्थानों के पास गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाएंगे। रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एस्ट्रोफिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी में चार नई या अपग्रेडेड टेलीस्कोप सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।
आम आदमी की जेब पर असर
Budget 2026 से टैक्स में राहत, बेहतर सड़क और ट्रांसपोर्ट सुविधा, रोजगार के नए मौके और डिजिटल सेवाओं के विस्तार की उम्मीद की जा रही है। कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान, डिजिटल उपकरण और आयातित कच्चा माल सस्ता हो सकता है, जबकि लग्जरी प्रोडक्ट्स और कुछ सेवाएं महंगी होंगी।
अल्पसंख्यक बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस बार अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का बजट बढ़ाकर करीब 3400 करोड़ रुपये किया गया है, जो पिछले संशोधित अनुमान से लगभग 1240 करोड़ रुपये ज्यादा है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे सकारात्मक बताया, लेकिन AIMPLB ने कहा कि अल्पसंख्यकों की जरूरतों के हिसाब से अभी और बढ़ोतरी की गुंजाइश है।
कुल मिलाकर Budget 2026 कैसा है?
कुल मिलाकर Budget 2026 एक संतुलित लेकिन सख्त बजट माना जा रहा है। सरकार ने जहां आम लोगों और नौकरीपेशा वर्ग को राहत दी है, वहीं जोखिम भरे निवेश पर लगाम लगाने की कोशिश की है। अब असली सवाल यही है कि बजट में किए गए वादे ज़मीन पर कितनी तेजी से नजर आते हैं।






























