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क्या आपको भी है भूख न लगने की समस्या तो बस आज ही अपनाएं ये घरेलू उपचार, जानिए…

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भूख क्यों नहीं लगती – आमतौर पर भूख न लगना अस्‍थायी और प्रतिवर्ती होता है. जो ज्यादातर तनाव, चिंता और अवसाद जैसी तमाम मनोवैज्ञ‍ानिक कारणों से संबंधित होता है. इतना ही नहीं कई मेडिकल समस्‍याएं जैसे हाइपोथायरायडिज्‍म, बैक्‍टीरियल संक्रमण,हैपेटाइटिस, लीवर की समस्‍या, हार्ट फैल्‍योर और डिमेंशिया आदि भी भूख न लगने की वजह होते हैं. जो लोगों दवाईयों का सेवन करते हैं तो उन्हें कुछ दवाईयों की वजह से भी ऐसी समस्या हो सकती है.

बता दें कि भूख कम लगाना या फिर भूख न लगने से शरीर को पूरा और जरूरी आहार नहीं मिल पाता है. जिसके चलते कई तरह के अन्य बीमारी होने का भी खतरा बढ़ जाता है, लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि आज जो हम आपके लिए घरेलू उपाय लेकर आए हैं उन्हें अपनाकर आप अपनी इन समस्याओं से राहत पा सकेंगे, तो आइए आपको बताते हैं…

हरा धनिया का पीएं रस

अगर आपको भूक से संबंधित समस्या है तो आपको रोजाना सुबह के समय हरा धनिया पीस लेना है और उसमें एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर पीना है. बता दें कि धनिया और नींबू में कई तरह के गुण मौजूद होते हैं जो पाचन तंत्र को सुचारू बनाते हैं. इसका सेवन करने से आपकी भूख न लगने की समस्या पूरी तरह से खत्म हो सकती है और आप की सेहत भी अच्छी रह सकती है.

मूली का सेवन – भूख क्यों नहीं लगती

रोजाना एक से दो मूली का सेवन करें हो सके तो अपने भोजन में मोली को सलाद के तौर पर सेवन करें या फिर इसकी सब्जी भी बनाकर खा सकते हैं. इसकी मदद से आपकी पाचन तंत्र की क्रिया एकदम सुचारू हो जाएगी और आपको भूख भी लगने लगेगी. लेकिन ध्यान रहे कि मूली का सेवन करने के तुरंत बाद आपको पानी नहीं पीना है.

अदरक का सेवन

आपको रोजाना खाना खाने से आधे घंटे पहले अदरक का सेवन करना है. अगर आप इसे ऐसे नहीं खा सकते हैं तो आप अदरक के साथ थोड़ा सा नमक लेकर भी सा सकते हैं. ऐसा करने से आपकी भूख बढ़ेगी और आपके शरीर को कई तरह से फायदा भी होगा, लेकिन ध्यान रहे आपको इसका सेवन हमेशा खाने खाने के आधे घंटे पहले ही करना है.

काला नमक

भूख न लगने की समस्या में काला नमक काफी अच्छा माना जाता है. इसमें कई ऐसे गुण मौजूद होते है जो इस तरह की समस्या को चुटकियों में दूर कर देते हैं. बता दें कि कला नमक पाचन तंत्र को एकदम सुचारू बना देता है. इतना ही नहीं काला नमक बदहजमी की समस्या को भी दूर करने में काफी मददगार साबित है. इसलिए रोजाना एक चम्मच काला नमक का सेवन जरूर करें.

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प्लास्टिक की बोतलों की बजाए बांस की बोतलों की बढ़ी मांग, जानिए इसके फायदे…

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Bamboo Bottles Price and Detail in Hindi – ज्यादातर हम सभी को अपनी सेहत का ख्याल रहता है जिसके चलते हम उन्ही चीजों का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, जिससे हमारी सेहत ठीक रहे. लोगों में अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधानी देखते हुए असम के एक उद्यमी ने ऐसा आ‌विष्कार किया है, जिसे लेकर वो इन दिनों सुर्खियां बटोरने में रहे हैं. दरअसल, उन्होंने बांस की बोतलों का आविष्कार किया है. जिस वजह से इन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी एक जगह बना ली है.

आपको बता दें कि धृतिमान बोरा ने बांस की बोतलों का आविष्कार किया है, जो गुवाहाटी के बिश्वनाथ चाराली के रहने वाले हैं. इन्होंने जो बांस की बोतल बनाई हैं वो सौ प्रतिशत लीक प्रूफ हैं यानि कि इसमें आप पानी रख सकते हैं और जोकि लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है.

धृतिमान (Founder of Bamboo Bottles) का कहना है कि कटाई, सुखाने, पॉलिशिंग जैसे दूसरे प्रोसेस में एक बांस की बोतल बनाने में न्यूतम चार से पांच घंटे लगते हैं. इस तरह की बोतल इसलिए बनाई गई है ताकि प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग बंद हो जाए और हर किसी की सेहत अच्छी रहे. उन्होंने आगे कहा कि बांस की बोतलों को बनाने में करीब 17 साल लग गए हैं. जोकि एकदम वॉटर प्रूफ बोतल हैं. फिनिशिंग लुक देने के लिए इन बोतलों की बाहरी परत को वाटरप्रूफ ऑयल से पॉलिश किया गया है. इतना ही नहीं इन बोतलों का ढक्कन भी बांस से ही बनाया गया है.

आपको बता दें कि बांस की ये बोतले पूर्ण रूम में जैविक हैं. ये चिलचिलाती गर्मियों के समय भी पानी को ठंडा रखने में मददगार साबित है. धृतिमान चाहते हैं कि हमारा देश पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त हो जाए, उन्होंने इको फ्रैंडली चीजें, बांस और जूट के उत्पादों का ही प्रयोग करने की सलाह दी है.

Bamboo Bottles Price and Detail in Hindi – जानकारी के लिए बता दें कि आपको ये बांस की बोतले आसानी से ऑनलाइन मिले जाएगी, जिसमें आपको तरह-तरह के आकार और डिजाइन्स भी देखने को मिलेंगे. अगर बात की जाए इन बोतलों के कीमत की तो ये 400 से 600 रुपए की कीमत में आपको मिल जाएगी.

वहीं देश में लगातार पर्यावरण को बचाने के लिए तरह-तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण शुद्ध और प्लास्टिक से मुक्त रहे, तो वहीं मोदी सरकार द्वारा मेक इन इंडिया यानि अपनी स्वदेशी चीजों का प्रयोग करने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी.

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जानिए रुद्राभिषेक की महिमा से लेकर इससे जुड़ी खास बातें, शिव जी की बनेगी विशेष कृपा

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Importance of Rudrabhishek in Hindi – सावन में विशेषतौर पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है. माना जाता है जो व्यक्ति सचे मन से शिव जी की आराधना करता है, उन पर भगवान शिव की विशेष कृपा होती है, लेकिन क्या आपको इस बारे में जानकारी है कि भगवान शिव अपने भक्तों पर रुद्राभिषेक से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं. अगर आप शिव जी का सबसे प्रिय रुद्राभिषेक करना भूल गए हैं, तो अभी भी देर नहीं हुई है आप सावन माह में किसी भी दिन या फिर सोमवार के दिन भी रुद्राभिषेक कर सकते हैं, तो आइए आपको रद्राभिषेक की महिमा से लेकर उससे जुड़ी सभी जरूरी बातें बताते हैं…

पुराणों के मुताबिक शिव जी की आराधना करने मानव को अपने कई जन्मों के पुण्य का फल प्राप्त होता है. ज्योतिष की मानें तो जो लोग सावन में महादेव को जल्दी से प्रसन्न करना चाहते हैं उनके लिए रुद्रभिषेक सबसे अचूक उपाय है. बता दें कि शिव और रूद्र एक दूसरे के पर्यायवाची शब्द हैं, रूद्र शिव जी का प्रचंड रूप है. इनकी कृपा जिस पर हो जाए उसका साभी ग्रह बाधाओं और समस्याओं का नाश हो जाता है.

आपको बता दें कि जब शिवलिंग पर मंत्रों के साथ खास तौर पर सभी चीजें चढ़ाईं जाती हैं, तो इस पद्धति को ही रुद्राभिषेक कहा जाता है. जिसमें शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का खासतौर पर पाठ किया जाता है.

किस शिवलिंग पर करना चाहिए रुद्राभिषेक ?

वैसे तो मंदिर के शिवलिंग पर ही अगर आप रुद्राभिषेक करेंगे तो ऐसा करना बहुत उत्तम होता है, लेकिन अगर आप घर में ही पार्थिव शिवलिंग पर अभिषेक कर सकते हैं. इसके अलावा आप शिवलिंग के अभाव में अंगूठे को भी शिवलिंग मानते हुए अभिषेक कर सकते हैं. शिवलिंग का अभिषेक करने की ये परंपरा बहुत पुरानी है. तो आइए आपको आगे बताते हैं कि रुद्राभिषेक किन-किन चीजों की जरूरत पड़ती है…

कल्याणकारी है रुद्राभिषेक – Importance of Rudrabhishek in Hindi

    • गाय के दूध से शिवलिंग पर अभिषेक करने से आरोग्य प्राप्त होता है.
    • शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करने से हर तरह की बीमारियां सम्पात हो जाती हैं.
    • घी से शिवलिंग का अभिषेक करने से वंश का विस्तार होता है.
    • दूध में शक्कर मिलाकर अभिषेक करने से व्यक्ति विद्वान हो जाता है.
    • संतान की प्राप्ति के लिए जल में शक्कर मिलकर अभिषेक करने चाहिए.
    • भस्म से शिवलिंग का अभिषेक करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्त होती है.
    • इक्षुरस से शिवलिंग का अभिषेक करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

रुद्रभिषेक कब करना रहता है अच्छा

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ज्यादातर हर पूजा के लिए एक शुभ मुहूर्त जरूर होता है, ऐसमें आपको तिथियों का खास ध्यान रखना चाहिए, लेकिन सावन के महीने में तो सभी दिन शिव जी की पूजा के लिए शुभ है. माना जाता है कि सावन में रुद्राभिषेक करने से शिव की खास कृपा मिलती है.

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इस दिन झाड़ू खरीदने और लगाने पर रातों-रात चमक सकती है आपकी किस्मत

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झाड़ू कब खरीदना चाहिए – हिन्दू धर्म में झाड़ू को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है. इसलिए ज्यादातर घरों में झाड़ू का काफी आदर भी किया जाता है, ऐसा कहा जाता है कि जिस घर में झाड़ू का अपमान होता है उस घर में मां लक्ष्मी का अपमान माना जाता है. जिस घर में सुबह के 5 बजे और शाम के 5 बजे से पहले झाड़ू लगती है, उस घर में सदैव मां लक्ष्मी का वास रहता है. इतना ही नहीं जिस घर में झाड़ू हर किसी की नजर से दूर छुपाकर रखी जाती है. उनके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है.

आपको बता दें कि गलती से भी कभी झाड़ू पर पैर नहीं लगाना चाहिए, ऐसा करना भी मां लक्ष्मी का अपमान माना जाता है, ऐसा करने से आपको घर में कई तरह की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इतना ही नहीं जिस अलमारी या तिजोरी में आप पैसा या अन्य कीमती चीज रखते हैं तो उसके पास कभी भी झाड़ू नहीं रखनी चाहिए, वरना आपको धन हानि हो सकती है. जैसे हिन्दू शास्त्र में घर में झाड़ू लगाने का समय बताया गया है वैसे ही पुरानी झाड़ू खराब होने पर नई झाड़ू लगाने के लिए उचित दिन बताया गया है. इसके अलावा नई झाड़ू खरीदने के लिए भी उचित दिन बताया गया है तो आइए आपको बताते हैं…

झाड़ू कब खरीदना चाहिए

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में नई झाड़ू को शुक्रवार के दिन खरीदना चाहिए, इससे घर में मां लक्ष्मी का भी वास होता है, वहीं पुरानी झाड़ू को बदलकर नई झाड़ू का प्रयोग करने के लिए शनिवार का दिन बेहद शुभ माना जाता है. इसके अलावा कृष्ण पक्ष में भी नई झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष में झाड़ू खरीदने से आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए ध्यान रहे गलती से भी शुक्ल पक्ष में झाड़ू नहीं खरीदें.

आपको जानकारी के लिए बता दें कि कभी भी टूटी हुई झाड़ू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, अक्सर कई लोग झाड़ू टूट जाने के बाद भी उसे जोड़-तोड़ के अपने घर या दफ्तर में इस तरह की झाड़ू का प्रयोग करते हैं, लेकिन ऐसा करना वास्तु की दृष्टि से बिल्कुल गलत है. जैसे ही आपकी झाड़ू टूट जाती है उसे तुरंत बदल देना चाहिए, क्योंकि घर की सफाई टूटी हुई झाडू से करने पर आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

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इतने करोड़ की सम्पत्ति की मालकिन थीं सुषमा स्वराज, जानें अब किसका होगा इसपर हक?

बीजेपी की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व विदेश मंत्री मंगलवार रात इस दुनिया को अलविदा कह चुकी है. उन्होनें दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली. सुषमा स्वराज उन नेताओं में से थी जिसकी सिर्फ पक्ष ही नहीं विपक्ष भी तारीफ करता था. उन्होनें अपने काम करने के तरीके से सबका दिल जीत लिया था. उनके इस तरह अचानक दुनिया छोड़ कर जाने की खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया. हर कोई उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहा है.

सुषमा स्वराज ने बतौर विदेश मंत्री अपना काम काफी अच्छे से किया. वो अपने भाषणों के जरिए लोगों को देश ही नहीं पूरी दुनिया में वाह-वाही लूट चुकी है. संयुक्त राष्ट्र भी उनकी तारीफ कर चुका है. सुषमा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहा करती थी. उन्होनें ट्विटर के जरिए कई लोगों की मदद की है जो काफी सुर्खियों में भी रहे है. आइए आपको बताते है सुषमा स्वराज की संपत्ति के बारे में..कि आखिर उनके पास क्या-क्या था जिसे वो छोड़ कर गई है?

32 करोड़ की है सम्पत्ति

बता दें कि एडीआर इंडिया की वेबसाइट से मुताबिक 2018 के आखिरी एफिडेविट के अनुसार सुषमा और उनके पति के पास 32 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति थी. मिली हुई जानकारी के अनुसार उनके पास 19 करोड़ से ज्यादा की सेविंग है. जिसमें 17 करोड़ के एफडीआर शामिल हैं. इसके अलावा सुषमा और उनके पति के बैंक अकांउट में 30 लाख रुपये है. अगर गाड़ी की बात करें तो सुषमा स्वराज के पास कोई निजी गाड़ी नहीं थी. उनके पति के पास 36 लाख की कीमत की 2017 मॉडल की मर्सिडीज गाड़ी है.

सुषमा को था गहनों का शौक

2018 में राज्यसभा चुनाव के लिए सुषमा स्वराज ने जो इनकम एफिडेविड दिया था. उसके मुताबिक उनको गहनों का काफी शौक था. उनके पास सोने-चांदी के कुल 29 लाख से ज्यादा के आभूषण थे.

इतने करोड़ की है प्रॉपर्टी

अगर उनकी प्रॉपर्टी की बात करें तो सुषमा और उनके पति दोनों के पास मिलाकर करोड़ो की प्रॉपर्टी है. उनके पास हरियाणा के पलवल में खेती की अच्छी खासी जमीन है. जिसकी कीमत 98 लाख तक बताई जाती है. इसके अलावा दिल्ली के पॉश इलाके में सुषमा स्वराज का एक 3 बीएचके फ्लैट भी है. जिसकी कीमत 2 करोड़ के करीब की बताई जाती है.

सुषमा के पति के नाम पर दिल्ली और मुंबई में 2 फ्लैट है. मुंबई वाले फ्लैट की कीमत 6 करोड़ और दिल्ली वाले फ्लैट की कीमत 2 करोड़ रुपये तक है. लेकिन इन सब में बड़ी बात ये है कि सुषमा या उनके पति के ऊपर किसी भी तरह का कोई भी कर्ज नहीं है. सुषमा स्वराज के निधन के बाद अब इन सब सम्पितयों के मालिक उनके पति ही होंगे.

सुषमा स्वराज की वो जिद जिसके आगे घरवालों ने भी टेक दिए थे घुटने

भारतीय जनता पार्टी की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज ने मंगलवार को 67 की उम्र में दुनिया से अलविदा कह दिया। मंगलवार को हार्ट अटैक आने के बाद उन्हें दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां सुषमा ने अपनी अंतिम सांसें ली। बीजेपी की ऐसी कुशल नेता का यूं आकस्मिक तरीके से चले जाना, एक अविश्वसनीय घटना प्रतीत होती है। अपनी मनमर्ज़ी की मालिक, एक ज़िंदादिल इंसान, और एक सशक्त नेता ये सभी गुण किसी दुर्लभ व्यक्ति में ही मिलते हैं। और सुषमा उन्ही शख्सियतों में से एक थीं। बतौर विदेश मंत्री जहां पूरी दुनिया में उन्होंने बेबाक होकर भारत का पक्ष रखा, वहीं अपनी निजी जिंदगी के कुछ बड़े फैसले भी उन्होंने अपने मनमुताबिक ही लिए।

दर्ज हैं कई कीर्तिमान

सुषमा स्वराज

सुषमा का जीवनकाल एक से बढ़कर एक कीर्तिमानों से भरा हुआ है। वो दुनिया से तो चली गईं, लेकिन इनकी उपलब्धियां हमेशा देश को याद रहेंगी। 14 फरवरी 1952 में सुषमा स्वराज का जन्म हुआ। उनकी कुशलता के चलते 25 साल की उम्र में ही उन्हें सबसे युवा कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल चुका था। 1977 से 1979 तक इनको कल्याण, श्रम जैसे कई मंत्रालय मिले। कैबिनेट मंत्री बनने के महज दो साल बाद  हरयाणा में उन्हें जनता पार्टी का राज्य अध्यक्ष बना दिया गया। इसके अलावा उनके पास नेशनल पार्टी की पहली महिला सीएम, कैबिनेट मंत्री और पहली महिला प्रवक्ता के रूप में पहचान मिली। इंदिरा गांधी जैसी महान नेता के बाद विदेश मंत्री का पद संभालने वाली सुषमा दूसरी महिला थीं।  ये सात बार सांसद भी रह चुकी हैं।

माना जाता था आडवाणी कैंप का नेता

सुषमा स्वराज और लाल कृष्ण आडवाणी

अपने काम और स्वभाव के चलते सिर्फ जनता में ही नहीं बल्कि पार्टी के अंदर भी वे काफी लोकप्रिय थीं। उनकी परिपक्वता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीजेपी के कई दिग्गज नेता जैसे लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उन्होने काफी समय तक काम किया। हमेशा से ही उन्हें आडवाणी कैंप का नेता माना जाता था। न ही सिर्फ सत्ता के दौरान बल्कि विपक्ष के तौर पर भी उन्होंने सबका दिल जीता।

सुषमा ने की थी लव मैरिज

सुषमा स्वराज की शादी

इस बात से काफी लोग अनजान होंगे कि सुषमा की लव मैरिज हुई थी। आजकल के समय ये बात कहने या सुनने में भले ही सरल और स्वाभाविक लग रही है। लेकिन उस दौर में लड़कियों को अपनी मनमुताबिक शादी करने की इज़ाज़त नहीं थी। लोग लड़कियों को पर्दे में रखना पसंद करते थे। लेकिन सुषमा का स्वभाव शुरुआत से ही आज़ाद पंछी जैसा था। समाज की बेड़ियों में बंधकर रहना ,उनका शौक नहीं था। नतीजतन उन्होंने अपने घरवालों के सामने हिम्मत दिखाई और अपनी बात रखी। ये बात सच है कि परिवार को मनाने में उनको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन आख़िरकार सुषमा अपनी कोशिशों में सफल रहीं। 13 जुलाई 1975 में उन्होनें सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील स्वराज कौशल से शादी करी। और ऐसे दोनों की प्रेम कहानी को एक नई मंजिल मिली।

जानिए क्यों मनाई जाती है हरियाली तीज और क्या है इसका महत्व…

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Hariyali Teej Kaise Manaye full process in Hindi – हिन्दू धर्म में तीज त्यौहार का काफी महत्व होता है. ये शिव जी और पर्वती के अटूट प्रेम को दर्शाता है. हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर पड़ने वाले हरियाली तीज को देशभर में मनाया जा रहा है. सावन में हर तरफ हरियाली छाई होती है इसी बीच तीज पड़ता है, जिसे हरियाली तीज कहा जाता है.

वहीं जो सुहागन महिलाएं पहली बार इस त्यौहार पर व्रत रख रही हैं, उन्हें कुछ अहम बातों का ध्यान रखना चाहिए, तो आइए आपको बताते हैं हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है और ये सुहागिन महिलाओं के लिए क्यों खास होता है, साथ ही किन पांच बातों का ध्यान रखना चाहिए…

क्यों मनाया जाता है हरियाली तीज ?

कहा जाता है कि सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मां पार्वती ने शिव जी को कठिन तपस्या के बाद पाया था. जिनके तप से खुश होने के बाद शिव जी ने उन्हें पत्‍नी के तौर पर स्‍वीकार किया था. इसलिए इस पर्व को मां पार्वती को समर्पित है.

मान्यता है कि अगर किसी लड़की की शादी नहीं हो पा रही है और किसी न किसी तरह से विवाह में अड़चन आ रही है, तो उसे इस दिन मां पार्वती की पूजा-अर्चना और व्रत करना चाहिए. वहीं, सुहागिन महिलाओं को शिव जी और मां पार्वती दोनों की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.

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सुहागिनों के लिए है खास त्योहार 

हरियाली तीज सुहागिनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है. अगर आपकी इसी साल शादी हुई है और ये आपका पहला हरियाली तीज पड़ रहा है, तो इस व्रत जरूर रखें. इसके अलावा नवविवाहित महिलाएं इस त्यौहार को अपने मायके में ही मनाती हैं. इस दिन विवाहित महिलाओं को नई चूड़ियां, पैरों में अल्ता और मेहंदी सहित सोलह श्रृंगार जरूर करना चाहिए.

इन बातों का रखें ध्यान – Hariyali Teej Kaise Manaye

  • हरियाली तीज के दिन महिलाओं का सबसे पहले नहा लेना चाहिए, उसके बाद एक पटरे पर लाल कपड़ा बिछाकर मां पार्वती की मूर्ति को रेशमी वस्त्र और गहने से सजा दें. देवी के इस रूप को तीज माता भी कहा जाता है.
  • ध्यान रहें माता की मूर्ति अर्धगोले आकार वाली ही हो, ये आपको आसानी से बाजार में मिल जाएगी. जिन्हें आपको पूजा स्थान में रखकर पूजा करनी हैं.
  • इस त्यौहार की पूजा में विशेष महत्व व्रत कथा का है, जिसके चलते हरियाली तीज व्रत कथा जरूर सुनें और इस दौरान अपने घर-परिवार और खासतौर पर अपने पति का ध्यान करें.
  • आपको बता दें कि इस तीज में व्रत के दौरान पानी नहीं पिया जाता है. साथी महिलाओं को पूरी तरह दुल्हन के जैसे ही सजना होता है.
  • वहीं जब शाम होने वाली होती है तब सभी महिलाएं नाचती और गाती हैं. कुछ महिलाएं तो इस मौके पर झूला भी झूलती हैं.

भूलकर भी न करें पति-पत्नी ये 4 गलतियां, वरना आ जाएगी तलाक तक की नौबत

तलाक क्यों होता है – ज्यादातर लड़के-लड़कियों का ये सपना होता है कि उनकी शादी जिससे भी हो वो उनके साथ प्यार से रहें और उनकी हर बात को समझे, लेकिन जब किसी को उनके मन मुताबिक पार्टनर नहीं मिलता है और उनकी हर उम्मीद पर पानी फिर जाता है तो ऐसेमें में रिश्ते बनने से पहले ही बिखर जाते हैं और फिर दोनों के बीच प्यार कम लाड़ाई-झगड़ा ज्यादा देखने को मिलता है. जिनके साथ हमें पूरा जीवन काटना होता है उनके साथ प्यार और विश्वास होना भी बेहद जरूर होता है, लेकिन अगर किसी रिश्ते में शक की बुनियाद खड़ी हो जाती हो जाती है, तो पार्टनर्स के बीच झगड़े हर समय होने लगते हैं, जो एक दिन तलाक की वजह बन जाते हैं.

वहीं आज हम आपको ऐसी वजह बताने जा रहे हैं जिसके चलते पति-पत्नी के बीच तलाक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है, तो आइए बताते हैं आपको बाते हैं ऐसी 4 वजह जिसे जानने के बाद आप अपने बिगड़ते रिश्ते को बचा सकते हैं…

एक दूसरे का ख्याल न रखना

शादी के कुछ दिनों तक तो पति-पत्नी एक-दूसरे का बहुत अच्छे से ख्याल रखते हैं, हर छोटी सी छोटी चीजों के बारे में जानकारी लेते हैं लेकिन शादी के बाद जैसे-जैसे समय बीतता चला जाता है तो वैसे-वैसे पार्टनर भी एक दूसरे का ख्याल रखना छोड़ देते हैं, जोकि बेहद गलत है आपको जिनके साथ पूरी जिंदगी गुजारनी है और आप उनका ही ख्याल नहीं रखोंगे तो ये आगे आकर तलाक का कारण बन जाता है.

रोजाना लड़ाई-झगड़ा होना – तलाक क्यों होता है

जो पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई-झगड़ा करने लगते हैं, तो दोनों के संबंधों में दरार पड़ने में देर नहीं लगती है और बाद में फिर तलाक तक की नौबत आन पड़ती है. इसलिए हो सके तो एक-दूसरे को समझिए और हल निकालने की कोशिश करें कि आखिर आपके बीच में ऐसी लड़ाईयां क्यों होती हैं.

ज्यादा उम्मीद रखना

शादी से पहले और बाद में पार्टनर्स एक-दूसरे को लेकर काफी उम्मीद लगाने लगते हैं, जोकि बेहद गलत है क्योंकि बाद में जब आपकी उम्मीदें पूरी नहीं हो पाती हैं तो तलाक की नौबत आ जाती है.

जबरदस्ती में हुई शादी – तलाक क्यों होता है

ऐसा देखा गया कि जब किसी लड़के या फिरी लड़की की शादी घर वाले जबरदस्ती कर देते हैं तो वो दवाब में आकर तो शादी कर लेते हैं लेकिन इसका भुगतान उनके पार्टनर को देना पड़ता है और वो शादियां सफल नहीं हो पाती हैं. दोनों के बीच लड़ाईयां होने लगती हैं और प्यार तो रहता ही नहीं हैं जिसके चलते एक दिन तलाक होने पर सब खत्म हो जाता है.

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20 सालों में कुछ इतना बदल गया कारगिल, इन 5 जगहों पर अद्भुत हैं नज़ारे

Tourist Places in Kargil – कारगिल युद्ध, हमारे जवानों की बहादुरी का वो किस्सा जो पीढ़ी दर पीढ़ी देशवासियों को सुनाया जाएगा। 1999 से अब तक इस शौर्य गाथा को 20 बरस बीत चुके हैं। हालांकि इन सालों में ये रणभूमि कई बदलावों के दौर से गुजरी। लेकिन शहीदों के उस अदम्य साहस की कहानी आज तक कारगिल की हर एक दीवार बयां करती हैं। यहां कदम रखते ही आपके दिल में खुद ब खुद देशभक्ति की लौ जाग्रत हो उठेगी। यहां मौजूद युद्धपोतों और शहीद रणबाकुरों को देखकर आपका सीना गर्व से फूल जायेगा।

जम्मू कश्मीर के मुख्य पर्यटन स्थलों में शुमार आज के कारगिल को देखकर ये कहना थोड़ा मुश्किल होगा कि कभी ये भारत-पाकिस्तान के बीच हुए महासंग्राम का अखाड़ा बन गया था। इसका नवीनीकरण सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करने में पूरी तरह से सफल रहा है। तो आइये देखें तब से अब तक कितना बदल गया कारगिल

वॉर मेमोरियल

वॉर मेमोरियल इस क्षेत्र के द्रास में स्थित है। ये उन शूरवीरों और अधिकारियों की याद में बनाया गया है जो कारगिल युद्ध में देश के लिए हंसते हंसते कुर्बान हुए थे। ये सैलानियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। यहां पर देश विदेशों से तमाम लोग आ कर फोटोशूट करवाते हैं। कई फिल्मों की शूटिंग भी इन खूबसूरत वादियों में हो चुकी है। यहां की मनोज पांडेय वॉर गैलरी में पाकिस्तानी सेना के वो हथियार और तोपें मौजूद हैं, जो युद्ध स्थल से बरामद हुए थे। यहां आप जून से सितंबर के महीने में आराम से घूम सकते हैं।

सुरु वैली – Tourist Places in Kargil

हिमालय पर्वतमाला में बसी सुरु वैली की तो छटा ही अद्भुत है। ये प्रकृति के उस खूबसूरत सपने जैसा है जिसके दीदार के लिए बार बार आंखें तरसती हैं। जब यहां से लहलहाती हुई सुरु नदी पर्वतों से निकलती है, तो वो दृश्य वाकई देखने लायक होता है। वसंत के महीने में इस जगह का आकर्षण दुगुना हो जाता है जब चारों ओर यहां खुबानी और सेब के पेड़ फलते फूलते नज़र आते हैं। मई के महीने में जा रहे लोग इन पेड़ों में पिघलती बर्फ को देख सकते हैं, जो यकीन मानिये आपके शानदार अनुभवों में से एक होगा। ट्रैकिंग और रॉक क्लाइम्बिंग के लिए भी ये जगह मशहूर है।

लामायुरू मोनेस्ट्री

ये लद्दाख के सबसे पुराने और सबसे बड़े मठों में से एक है। इस मठ का इतिहास 11वीं सदी से शुरू होता है जब बौद्ध भिक्षु अर्हत मध्यन्तिका ने लामायुरु में मठ की नींव रखी थी। माना जाता है कि महिद्ध नरोपा गुफा के पास साधना करने आए और झील सूख गई, इसके बाद यहां लामायुरु मठ की स्थापना हुई। शहर की चकाचौंध और शोर शराबे से दूर, इस जगह पर आपको बिल्कुल शांत वातावरण की अनुभूति होगी।

मुलबेख मोनेस्ट्री – Tourist Places in Kargil 

ये जगह यहां बसे एक मुलबेख नामक गांव में स्थित है जो कारगिल से लेह की ओर गुज़रते वक़्त रास्ते में पड़ता है। ये मठ रोड से 200 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है। मठ में मौजूद मैत्रीय बौद्ध की मूर्तियों से जुड़ी लोगों की बड़ी ही रोचक धारणा है। लोग मानते है कि ये मूर्तियां लद्दाख के उन मिशनरीज द्वारा लाई गईं हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म की शुरुआत की थी। इन मूर्तियों की कलाकृतियों से ये प्रतीत होता है, कि वो मिशनरीज तिब्बत से नहीं बल्कि किसी दूसरी जगह से आये थे।

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सनी मठ – Tourist Places in Kargil

सनी मठ सबसे पुराना और बौद्दों का प्रसिद्द धार्मिक स्थलों में से एक है। इसका निर्माण कुषाण राजा, कनिष्कब ने किया था। मठ के परिसर में एक छोटे सा पुस्तकगृह है जिसमें बौद्द और तिब्बती धर्म की पौराणिक किताबें रखी है। हर साल जुलाई- अगस्त के महीने में यहां आयोजित किया जाने वाला मास्क डांस आकर्षण का केंद्र है।

ICC के इस नियम पर नहीं थम रहा विवाद, मामले में आया एक नया ट्विस्ट

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साल 2019 का क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल मैच। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसी दो धुरंधर टीमों के बीच बोले तो पैसा वसूल मैच का ज़बरदस्त पैकेज।  जिसमें एक्शन, इमोशन, ड्रामा, थ्रिलर और मैच के आखिरी सेकंड तक सस्पेंस यानि कि सब कुछ था।  मैच तो खत्म हो गया. लेकिन अपने पीछे खड़े कर गया सुपर ओवर बाउंड्री नियम को लेकर कुछ सवाल। जिनके जवाब तलाशने में अब तक ICC माथापच्ची कर रही है। आइये देखें क्या हैं इस विवाद में आया नया ट्विस्ट और क्या कहता है नियम।

ज़ाहिर सी बात है कि अगर दो टीमें विश्व कप फाइनल मैच के मैदान में एक दूसरे से टकराने उतरी हैं, तो इसके पीछे इनकी खून पसीने की मेहनत एक ठोंस वजह है।  लेकिन जब फाइनल के मुकाम तक पहुंचकर रनों का लक्ष्य हासिल करने के बाद भी प्रतिद्वंदी टीम को हार का मुंह देखना पड़े , तो फैंस का खून खौलना तो लाज़मी है।

कहां से उगे विवाद के बीज 

दरअसल इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड के बीच खेला गया विश्व कप फाइनल का मैच टाई हो गया। वर्ल्ड कप की चमकती ट्रॉफी का सरताज किसी एक को ही चुना जाना था। इसीलिए नौबत सुपर ओवर करवाने की आ गई। फैंस की दिल की धड़कनों ने स्पीड तब पकड़ी जब सुपरओवर भी टाई हो गया। अब बारी थी मैच के परिणाम की। फिर क्या था , ICC क्रिकेट बोर्ड का फैसला आया जिसने न्यूजीलैंड के वर्ल्ड कप चैंपियन बनने के सपनों को अपने एक नियम के तले रौंद दिया।

क्या है ICC का नियम

दरअसल मैरीलिबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने क्रिकेट के कुछ नियम स्थापित किये हैं, जो  इस खेल को खेलने के विषय में जानकारी देते हैं।  इन नियमों में किसी टीम के जीतने और बल्लेबाज के आउट होने के तरीकों से लेकर पिच को तैयार करने और उसके रख-रखाव तक के सभी पहलुओं की जानकारी शामिल है।

ICC के नियमानुसार, अगर किसी टूर्नामेंट का फाइनल या सेमीफाइनल का मैच टाई हो जाता है, तो विजेता तय करने के लिए एक सुपर ओवर का प्रावधान है। इस ओवर में भी अगर मैच टाई की स्थिति बरक़रार रहती है, तो मैच का विजेता ओवर में लगाई गई बाउंड्री से घोषित किया जाता है।  इसमें जिस भी टीम की बाउंड्री ज्यादा है , वो ही मैच विनर होगा। इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड के विश्व कप फाइनल मैच में भी कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला था। इंग्लैंड की बाउंड्री ज्यादा थी इसलिए उसे विजेता बनाया गया।

कई खिलाड़ियों ने उठाये सवाल

इस नियम पर बवाल तब शुरू हुआ जब क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर समेत विश्व के कई दिग्गज खिलाड़ियों ने इस पर सवाल उठाने शुरू किये।  सचिन ने कहा , “मुझे लगता है कि दोनों टीमों की बाउंड्री पर विचार करने के बजाय एक अन्य सुपर ओवर से विजेता का फैसला होना चाहिए था। केवल विश्व कप फाइनल ही नहीं, प्रत्येक मैच महत्वपूर्ण है। “

नियम से नाराज़ पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने भी इसे मूर्खतापूर्ण नियम करार दिया।  गौतम ने ट्वीट किया, “ये कैसा नियम है, जहां बाउंड्री के आधार पर वर्ल्ड चैंपियन का फैसला हो रहा है।  ये मैच टाई होना चाहिए था। ये बिल्कुल मूर्खतापूर्ण नियम है।

न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग ने भी इस नियम के खिलाफ ट्वीट कर अपनी नाराज़गी जताई थी। अब इस विवाद को सुलझाने का जिम्मा पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान अनिल कुंबले को सौंपा गया है। कुंबले की अगुआई में ICC की अगली बैठक होगी, जहां इस वर्ल्ड कप के दौरान उठे सभी मुद्दों पर गहनता से विचार किया जायेगा।