Shraddha Rape & Murder Case: लव जिहाद या युवाओं की नासमझी, पहले भी हो चुके हैं इस तरह के वारदात

By Reeta Tiwari | Posted on 17th Nov 2022 | क्राइम
aftab and sharadha

ऐसे "प्यार" को क्या नाम दिया जाए ? 

श्रद्धा रेप एंड मर्डर केस (Shraddha Rape & Murder Case) पिछले कुछ दिनों से पूरे देश में हलचल पैदा किये हुए है। ये केस युवा पीढ़ी के लिए एक सिख भी है, जो अपने माँ-बाप की बात ना सुन कर एक ऐसे शख्स के पीछे भागने लगते हैं जो कहीं-न-कहीं एक दूसरे का इस्तेमाल कर रहा होता है।  इस केस में आरोपी "आफताब पूनावाला"  ने अपने लिव-इन पार्टनर श्रद्धा की गला दबाकर हत्या कर दी।  इसके बाद उसने शव के 35 टुकड़े कर फ्रिज में स्टोर कर दिया। फिर धीरे धीरे करके उसने इन टुकड़ों को जंगल में फेंक दिया। इस खौफनाक खूनी वाकया ने सबके मन में एक सवाल खड़ा कर दिया है की आखिर ऐसे "प्यार" को क्या नाम दिया जाए ? एक कहावत है की "इश्क और जंग में सब जायज़ है ", लेकिन क्या सच में इश्क में अपने चाहनेवाले को मौत के घाट उतार देना जायज़  है? ऐसा पहली बार नहीं हो रहा जब किसी ने अपने पार्टनर या पत्नी को बेरहमी से मार दिया हो। पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ। 

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लव जिहाद या युवाओं की नासमझी ?

 कुछ लोग जहां इसे धर्म से बांध कर लव जिहाद का नाम दे रहे, वहीं कुछ लोग इसे युवा पीढ़ी की नासमझी की तरह देख रहे हैं। आप अगर श्रद्धा मर्डर केस को सच में युवा पीढ़ी की नासमझी की तरह देख रहे हैं तब तो समाज और युवा के लिए सच में ये एक सीख है, लेकिन अगर आप इसे धर्म की तराजू पर तौल रहे है तो ये हमारे देश के लिए एक चिंता का विषय है। अगर आप इतिहास में इस तरह की घटनाये ढूंढे तो आपको बहुत सारे ऐसे मामले मिल जायेंगे जहां दोनों इंसान एक ही धर्म के है, यहां तक की कुछ लोगों ने तो शादी के बाद भी इस तरह के गुनाह के अंजाम दिया है। 

देहरादून मर्डर केस 

देहरादून में पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी ने झगड़ा होने के बाद अपनी पत्नी अनुपमा गुलाटी को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद उसने शव के 72 टुकड़े कर दिए थे। पुलिस जांच के दौरान उसके घर में एक डीप फ्रीजर के भीतर अनुपमा के शरीर के टुकड़े पाए गए। राजेश ने अपने दोनों बच्चों को ये बताया था कि उनकी मां दिल्ली गई हैं और कुछ दिन में आ जाएगी। अनुपमा का भाई सिद्धांत प्रधान जब देहरादून आया तब अनुपमा की मौत का खुलासा हुआ। 

तंदूर मर्डर केस 

तंदूर कांड के नाम से कुख्यात घटना में सुशील शर्मा (तत्कालीन युवा कांग्रेस नेता) ने दिल्ली में अपनी पत्नी नैना साहनी की गोली मार कर हत्या कर दी थी। 2 जुलाई, 1995 को सुशील ने इस घटना को अंजाम दिया था। उसको अपनी पत्नी का किसी और के साथ संबंध होने का शक था। उसने नैना को मौत के घाट उतारने के बाद उसके शरीर के अंगों को काटकर एक लोकप्रिय रेस्तरां की छत पर तंदूर (मिट्टी के ओवन) में जला दिया। तंदूर से धुआं उठता देख मौके पर पहुंची पुलिस को नैना की क्षत-विक्षत और अधजली लाश मिली। लापता हुए शर्मा को एक सप्ताह के भीतर ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सुशील शर्मा को इस जुर्म के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया।

टैटू गर्ल मर्डर केस 

फरवरी 2011 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक युवती नीतू सोलंकी की लाश एक बैग में पाई गई थी। नीतू के शरीर पर कई टैटू बने हुए थे।  इस मामले में नीतू का प्रेमी राजू गहलोत मुख्य संदिग्ध था। दोनों अपना घर छोड़कर दिल्ली में लिव-इन में रहते थे। नीतू राजू पर अपने परिजनों से संपत्ति में से हिस्सा मांगने का दवाब बना रही थी। इसके विरोध में राजू ने नीतू की हत्या कर दी। हत्याकांड के बाद करीब 8 साल तक राजू पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा।  इसके बाद गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में लिवर की बीमारी के कारण उसकी मौत हो गयी। 

बेलारानी दत्ता मर्डर केस

31 जनवरी, 1954 को कोलकाता में एक स्वीपर ने टॉयलेट के पास अखबार में लिपटा पैकेट देखा। अखबार पर खून के छींटे थे और उसमे इंसानी अंगुली लपेटी हुई थी। घटना की सूचना जब पुलिस को मिली तो उन्होंने जांच शुरू कर दी। इस मामले को लेकर जो खुलासा हुआ वो काफी चौंकाने वाले था। इस मामले में बीरेन नाम के एक युवक ने अपनी प्रेग्नेंट पत्नी बेलारानी को मौत के घात उतर दिया था। दरअसल बिरेन का संबंध बेलारानी और मीरा नाम की दो महिलाओं के साथ था। वह दोहरी जिंदगी जी रहा था। जब उसे पता चला बेलारानी प्रेग्नेंट है तो उसने उसे मार डाला।  इसके बाद उसके शरीर को टुकड़ों में काटकर घर की आलमारी में रख दिया और दो दिन तक सोता रहा। बाद में बीरेन ने टुकड़ों को शहर के अलग-अलग हिस्सों में फेंक दिया। इस मामले में दोषी पाए जाने पर उसे फांसी की सजा मिली थी।

शाकिरा नमाजी मर्डर केस 

मई 1991 में, 40 वर्षीय शाकिरा नमाजी को उसके दूसरे पति मुरली मनोहर मिश्रा उर्फ स्वामी श्रद्धानंद ने जिंदा दफन कर दिया था। ये घटना को श्रद्धानंद ने उनके बेंगलुरु के आवास के बैकयार्ड (backyard) में अंजाम दिया था। दरअसल नमाजी मैसूर के पूर्व दीवान की पोती थीं और श्रद्धानंद की नजर उसकी संपत्ति पर थी। श्रद्धानंद ने नमाजी की चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर उसे पिला दिया और उसे फिर एक ताबूत में रखकर अपने घर के बैकयार्ड में दफना दिया था। श्रद्धानंद को इस गुनाह के लिए पहले मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 2008 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को बिना किसी छूट के आजीवन कारावास में बदल दिया।

ये सारे मामले तो कुछ चुनिंदा केस है जहाँ आरोपी ने अपने प्यार या पार्टनर को दर्दनाक मौत दी है। ऐसे और भी कई मामले है जो आपको इंटरनेट पर मिल जायेंगे। आये दिन ऐसी खबरे आती रहती है की कभी प्यार को ठुकराने पर किसी को मौत के घाट उतार दिया जाता है तो कभी शादी का दवाब बनाने पर। और इन सबसे फिर से वही एक सवाल खड़ा हो जाता है की भला इस प्यार और रिश्ते को क्या नाम दिया जाए, जिसका अंजाम दर्दनाक मौत है।

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Reeta Tiwari
Reeta Tiwari
रीटा एक समर्पित लेखक है जो किसी भी विषय पर लिखना पसंद करती है। रीटा पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ, विदेश, राज्य की खबरों पर एक समान पकड़ रखती हैं। रीटा नेड्रिक न्यूज में बतौर लेखक काम करती है।

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