जानिए किस आधार पर मिली कतर को FIFA वर्ल्ड कप की मेजबानी, "शाम, दाम, दंड, भेद" से दिखाया अमेरिका-ब्रिटेन को औकात

By Reeta Tiwari | Posted on 24th Nov 2022 | स्पोर्ट्स
qatar  & FIFA

कतर को विश्व कप मेजबान चुनना एक ‘गलती’

कतर (Qatar) में 20 नवंबर से सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल के ‘महाकुंभ’ फीफा वर्ल्ड कप-2022 (FIFA World Cup 2022) की शुरुआत हो गई है। पूरा विश्व लगभग एक महीने के लिए फुटबॉल के रंग में रंग जायेगा।  कुल 32 टीमें इस वैश्विक प्रतियोगिता में भाग ले रही है। 2010 में तत्कालीन फीफा अध्यक्ष सेप ब्लाटर (FIFA President Sepp Blatter) ने जब कतर को 2022 फुटबॉल वर्ल्ड कप की मेजबानी सौंपी, तभी से इस देश को मेजबानी सौंपने के निर्णय का विरोध होना शुरू हो गया था।  खुद सेप ब्लाटर ने टूर्नामेंट के शुरू होने से एक हफ्ता पहले कहा कि कतर को विश्व कप मेजबान चुनना एक ‘गलती’ थी। आखिर क्यों इस बार का वर्ल्ड कप कई मायनों में अलग और विवादों से भरा है ?

FIFA की बात करें तो इसे यूनाइटेड नेशन ऑफ़ फुटबॉल  (United Nation of Football) भी कहा जाता है और इसके पीछे का कारण यह है की ये विश्व भर की 211 देशों को रिप्रेजेंट करती है। FIFA जैसे बड़े आर्गेनाईजेशन के बारे में बहुत सारी रिपोटें यह कहती हुई दिखती है की FIFA में भ्र्ष्टाचार नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार ही FIFA है। 

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घोटाले की नींव पर मिली कतर को मेजबानी 

 FIFA अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल का प्रबंधक है, जिसने 2010 में कतर को 2022 विश्व कप की मेजबानी सौंपी थी। जिसके बाद से फूटबाल का सबसे बड़ा टूर्नामेंट घोटालों के पेचीदा जाल में फंस गया है। 2010 में जब FIFA वर्ल्ड कप की मेजबानी के लिए बोली लग रही थी तभी इसमें घोटाले की नींव पड़ चुकी थी। वोटों की हेराफेरी, घुस और भ्रष्टाचार इस बिडिंग में आम बात हो गई थी। आप इस भ्रष्टाचार का अनुमान इससे भी लगा सकते है की अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश भी इस FIFA की मेजबानी चाहते थे, लेकिन अंत में कतर जैसे छोटे देश को इसकी मेजबानी मिलती है। यहां तक की ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भी नजर FIFA की मेजबानी पर टिकी हुई थी। 

  • कतर इस बिडिंग प्रोसेस में हिस्सा लेने लायक नहीं था

कुछ रिपोर्टों के अनुसार उस समय कतर इस फुटबॉल महाकुंभ के मेजबानी के लिए बिडिंग प्रोसेस में हिस्सा लेने के लायक भी नहीं था। ना उसके पास इंफ्रास्ट्रक्चर थे, ना ही उस हिसाब के फूटबाल ग्राउंड। 

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2010 में देश को टूर्नामेंट  मेजबानी मिलने के बाद से कतर में कम से कम 6,500 प्रवासी मजदूरों की मौत हो चुकी है। आपको अगर कतर में गर्मी का अनुमान होगा तो आपको ये आसानी से पता चल जायेगा की ये देश FIFA वर्ल्ड कप जैसे बड़े इवेंट की मेजबानी करने के लिए सही नहीं है। 

30 लाख की आबादी वाले देश ने अमरीका-ब्रिटैन को दिखाया औकात 

कतर के इतिहास को देखे तो 1971 में ब्रिटिश हुकूमत से आजाद होने के बाद देश में पैसे की बारिस होती है। इसका सबसे बड़ा कारण वहां के आयल और नेचुरल गैस को बताया गया। महज 30 लाख के आबादी वाला देश कतर, जहां बेसुमार दौलत है वो इस वर्ल्ड कप के पीछे क्यों पड़ी थी। इसका सबसे बड़ा कारण था कतर को विश्व में अपनी उपस्थिति दिखाना, या फिर प्रधानमंत्री मोदी (Prime minister Modi) की भाषा में कहें कतर विश्वगुरु बनना चाहता था। विश्वगुरु बनने का सबसे शॉर्टकट कतर को FIFA वर्ल्ड कप की मेजबानी ही दिखी। फिर क्या था कतर जैसा दौलतमंद देश शाम, दाम, दंड, भेद से इस मेजबानी के पीछे लग गया। 

कतर के पास इस मेजबानी के पीछे पड़ने का दूसरा सबसे बड़ा कारण था इस लोकप्रिय खेल का व्यूअरशिप (viewership)। बताया जाता है की FIFA वर्ल्ड कप के केवल टेलेविज़न व्यूअर पांच बिलियन  हैं, जबकि टूरिस्ट 1.5 मिलियन। इन सब से जो रेवेन्यू आता है उसका आकलन है कम-से-कम 17 बिलियन। मेजबानी का एक और कारण यह भी बताया जाता है की कतर और रूस जैसे देश इन लोकप्रिय खेलों के माध्यम से विश्व पटल पर अपनी अच्छाई भी दिखने की कोशिश में जुटी रहती है। 

  • इस मेजबानी के लिए कतर ने लगाया शाम, दाम, दंड, भेद

जहां बहुत सारा पैसा होता है वहां भ्रष्टाचार तो होता ही हैं, ये तो सभी जानते हैं। ठीक इस तरह कतर  ने पैसे, प्रभाव और अपने शक्ति से इस वर्ल्ड कप को अपने नाम कर लिया। सबसे पहले यह जान लेते हैं की इस FIFA की मेजबानी आखिर किसी देश को कैसे मिलती है ? FIFA ने पूरी दुनिया को 6 कंफेडेरशन में बांट रखा है, इन सभी राज्य संघों के अपने एग्जीक्यूटिव मेंबर्स होते है। इन 6 कंफेडेरशन से कुल 24 एग्जीक्यूटिव मेंबर्स है, जिनके वोट्स के आधार पर FIFA की मेजबानी किसी देश को दी जाती है। 

2010 में जब 2022 फीफा वर्ल्ड कप के लिए बिडिंग हो रहा था तब क़तर की तरफ से हसन-अल-थवादी (HASSAN AL-THAWADI )इसका नेतृत्व कर रहे थे। अमरीका और ब्रिटैन जैसे देश के सामने हसन-अल-थवादी ये तो जानते थे की यहां कर्म से नहीं बल्कि कांड से काम बनेगा। इसके बाद ये और लोगों के साथ मिल कर खरीदो या फसाओ की राजनीति करने लगे। इसके बाद क्या था कतर ने चाहे तो एग्जीक्यूटिव मेंबर्स को खरीद लिया और जो नहीं बाइक उनके देश की सरकारों के साथ अंडर द टेबल डील कर ली, जैसे की आयल डील, देश में इन्वेस्टमेंट इत्यादि, इत्यादि। 


खुलासे के बाद 16 मेंबर हुए सस्पेंड, कुछ गिरफ्तार  

6 कंफेडेरशन से कुल 24 एग्जीक्यूटिव मेंबर्स में से 14 वोट कतर को जाता है । इस पुरे मामला का खुलासा हसन-अल-थवादी के एक ट्रांसलेटर द्वारा किया जाता है। इस खुलासे के बाद 16 एग्जीक्यूटिव मेंबर को सस्पेंड कर दिया जाता है और इनमे से कुछ को गिरफ्तार भी किया जाता है, लेकिन कतर तो कतर है। कहा जाता है की उस समय कतर के पास केवल एक फुटबॉल स्टेडियम था, लेकिन आज के समय में कतर FIFA की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। 

Reeta Tiwari
Reeta Tiwari
रीटा एक समर्पित लेखक है जो किसी भी विषय पर लिखना पसंद करती है। रीटा पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ, विदेश, राज्य की खबरों पर एक समान पकड़ रखती हैं। रीटा नेड्रिक न्यूज में बतौर लेखक काम करती है।

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