दांव पर लगी है बांके बिहारी की प्राचीन विरासत, सरकार को खून से खत लिखने की आई नौबत

By Reeta Tiwari | Posted on 24th Jan 2023 | देश
Banke Bihari Ancient Heritage

बांके बिहारी मंदिर पर भी बनेगा कॉरिडोर 

वाराणसी (Varanasi) में भव्य काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Temple Corridor) का निर्माण करने के बाद अब उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) की योगी सरकार (Yogi goverment) वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर पर फोकस कर रही है, वृंदावन में स्थित भगवान बांके बिहारी मंदिर के आसपास के 5 एकड़ क्षेत्र के सर्वेक्षण और बिहारीजी कॉरिडोर (Bihariji Corridor) के निर्माण के फैसले से शहर के निवासियों और व्यापारियों में में हाहाकार मच गया है.  सबसे ज्यादा विरोध यहां बिहारीजी मंदिर का गोस्वामी परिवार कर रहा है, जिसके पीछे दुकानदार हैं और  यहाँ के स्थानीय लोग, इस प्रस्तावित विकास के विरोध में दुकानदारों ने 36 घंटे के लिए अपना कारोबार बंद कर दिया है। इतना ही नहीं बांके बिहारी मंदिर के गोस्वामी परिवार की सारी  महिलाएं भी मंदिर का गेट बंद कर जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहीं हैं । 

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2022 में  योगी सरकार ने किया था वादा

वृन्दावन में कॉरिडोर (Vrindavan Corridor) बनाने की घोषणा उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने साल 2022 के अगस्त महीने में ही कर दी थी  योगी सरकार ने कहा था कि यमुना से भक्तों के आसान आवागमन की गारंटी के लिए जल्द ही एक समर्पित कॉरिडोर(गलियारा) विकसित किया जाएगा। मथुरा के प्रतिष्ठित बांके बिहारी मंदिर के लिए रिवरफ्रंट का निर्माण किया जायेगा । प्रस्तावित 5 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित कॉरिडोर विकसित करने के लिए योगी सरकार ने आठ सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. वहीं समिति का गठन इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 20 दिसंबर 2022 को जिला प्रशासन को अनुमानित लागत के साथ एक विकास योजना प्रस्तुत करने का आदेश देने के बाद किया गया था। पिछले साल प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांके बिहारी कॉरिडोर का बजट 248 करोड़ रुपए तक होगा और मंदिर ट्रस्ट द्वारा भी मंदिर परिसर के पुनर्विकास में योगदान दिए जाने की संभावना है।

जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कॉरिडोर के बारे में सोचा तो उसी वक़्त इस बात की पुष्टि कर दी थी कि मंदिर की मुख्य संरचना, साथ ही मान्यताओं और परंपराओं का किसी भी तरह से उल्लंघन नहीं किया जाएगा और न ही संरचना के साथ कोई छेड़छाड़ . पुनर्विकास परियोजना की अनदेखी के लिए गठित समिति ने कहा है कि बांके बिहारी कॉरिडोर परंपराओं और आधुनिक सुविधाओं का मिश्रण होगा, जिसमें मंदिर का मुख्य भाग में कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा जबकि मंदिर तक पहुंचे वाले रास्ते और आसपास के क्षेत्रों को चौड़ा और विकसित किया जाएगा जो की एक समय में करीब 5000 भक्तों को आराम और सुगम तरीके से समायोजित कर सकता है ।

कॉरिडोर बनाने का उद्देश्य

मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को समायोजित करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। लोग अंदर जाने का मौका नहीं मिलने पर मंदिर के बाहर और संकरी गलियों में जाम लगा देते हैं। इससे मौके पर अफरातफरी, भीड़भाड़ और धक्का-मुक्की होती है। यहां तक कि अगर पुलिस बैरिकेड्स लगाती है, तो भीड़भाड़ वाली जगह में अक्सर भक्त एक-दूसरे को धक्का देते हैं। प्रस्तावित लेआउट के अनुसार, तीन प्रवेश द्वार होंगे जिनसे श्रद्धालु कॉरिडोर में प्रवेश कर सकते हैं। पहला प्रवेश जुगल घाट से, दूसरा प्रवेश विद्यापीठ चौक से और तीसरा प्रवेश बांके बिहारी जादौन पार्किंग क्षेत्र से होगा। इसके अलावा कॉरिडोर दो मंजिला होगा। इन दोनों मंजिलों में जूता स्टैंड, सामान स्टैंड, पीने का पानी, स्नानघर, चिकित्सा और शिशु देखभाल सुविधाएं जैसी सुविधाएं होंगी। वीआईपी रूम और वेटिंग रूम भी बनेंगे। निचला स्तर शीर्ष स्तर से बड़ा होगा।

टूटेंगी दुकाने और मिलेगा मुआवजा

कॉरिडोर के निचले भाग में पूजा की दुकानों को 800 वर्ग मीटर जगह होंगी. जहाँ से भक्त पूजा के सामान और अन्य प्रसाद सामग्री खरीद सकते हैं, समिति ने कहा है कि अस्त-व्यस्त सड़कों के दोनों तरफ की दुकानों को नवनिर्माण के लिए तोडा जायेगा । लेकिन दुकानदारों और व्यापारियों की कमाई और जिन्दगी पर कोई असर न पड़े इसलिए इसी स्थान पर दोबारा दुकानों का निर्माण किया जाएगा हालांकि, बनने वाली दुकानों की संख्या अभी भी तय नहीं है। लेकिन अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दूकान का आकार और डिजाइन वही रहेगा, सरकार की अनुमानित के अनुसार बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर के लिए राज्य द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली 325 संपत्तियों के मालिकों को भी मुआवजा देगी। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार ने इन मकानों और दुकानों के मालिकों को कुल 200 करोड़ रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की गई है।

दुकानदारों और व्यापारियों ने किया प्रदर्शन

वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के चारों ओर प्रस्तावित कॉरिडोर के निर्माण के खिलाफ पुजारियों, व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने मंगलवार को अपना आंदोलन तेज कर दिया और परियोजना के प्रस्तावित डिजाइन की बैनर्स जलाए, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से लिखे 108 पत्र भी भेजे, जिसमें परियोजना को बंद करने और वृंदावन की विरासत को बचाने का आग्रह किया गया। मंदिर के पास के बाजार लगातार तीसरे दिन बंद रहे क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने धरना दिया। पिछले साल जन्माष्टमी समारोह में मंदिर में भगदड़ के दौरान दो श्रद्धालुओं के मारे जाने और आधा दर्जन के घायल होने के बाद, सरकार ने इस घटना की जांच करने और उपचारात्मक उपाय सुझाने के लिए एक समिति का गठन किया था।

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Reeta Tiwari
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रीटा एक समर्पित लेखक है जो किसी भी विषय पर लिखना पसंद करती है। रीटा पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ, विदेश, राज्य की खबरों पर एक समान पकड़ रखती हैं। रीटा नेड्रिक न्यूज में बतौर लेखक काम करती है।

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