By: Shikha Mishra

Source: Google

कैंची धाम से वृंदावन तक, आखिर नीम करोली बाबा ने क्यों चुनी कृष्ण की नगरी?

Source: Google

कैंची धाम सबसे प्रसिद्ध है। पर बाबा का आख़िरी सफ़र वहाँ ख़त्म नहीं हुआ। 

Source: Google

सितंबर 1973 सीने में दर्द के बाद वो आगरा में डॉक्टर को दिखाकर रात की ट्रेन से कैंची लौट रहे थे।  

Source: Google

रास्ते में तबीयत बिगड़ गई और साथियों के साथ वो मथुरा स्टेशन पर उतरे। वहाँ से उन्हें वृंदावन ले जाया गया। 

Source: Google

अस्पताल में उन्होंने एक ही बात बार-बार दोहराई जय जगदीश हरे।

Source: Google

अस्पताल में उन्होंने एक ही बात बार-बार दोहराई जय जगदीश हरे। 11 सितंबर 1973 को उन्होंने वृंदावन में शरीर छोड़ दिया।

Source: Google

उनका वृंदावन आश्रम एक चौड़ी सड़क पर स्थित है। यहाँ पहला मंदिर 1967 में बनाया गया था।