इतिहास के पन्नों में खो गए ये 5 स्वतंत्रता सेनानी!
By: Rajni
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क्या आप उन गुमनाम चेहरों को जानते हैं, जो महज़ 17 साल की उम्र में फांसी पर झूल गए?
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73 वर्ष की मातंगिनी हाजरा को अंग्रेजों ने 3 गोलियां मारीं। लेकिन उन्होंने आखिरी सांस तक तिरंगे को नीचे नहीं गिरने दिया।
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पटना के पीर अली खान किताबों की आड़ में क्रांतिकारियों की गुप्त बैठकें कराते थे। अंग्रेजों ने उन्हें सरेआम फांसी दे दी थी।
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असम की कनकलता बरुआ महज 17 साल की थीं। 1942 में पुलिस थाने पर तिरंगा फहराते समय अंग्रेजों ने उन पर गोलियां चला दी थीं।
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तमिलनाडु के कुमारन पर अंग्रेजों ने इतनी लाठियां बरसाईं कि उनकी मौत हो गई, लेकिन बेहोश होने तक भी उनके हाथ से तिरंगा नहीं छूटा।
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1857 की क्रांति में लखनऊ से अंग्रेजों को खदेड़ने वाली बेगम हजरत महल ने महल की सुख-सुविधाएं छोड़कर जंग का मैदान चुना था।
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