By: Shikha Mishra
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सिर्फ फसल ही नहीं, साहस और बलिदान का प्रतीक भी है बैसाखी
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बैसाखी मुख्य रूप से खालसा पंथ की स्थापना (1699) की याद में और रबी की फसल (गेहूं) पकने की खुशी में मनाई जाती है।
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यह सिखों के लिए नए साल की शुरुआत, धार्मिक एकता और किसानों के लिए कड़ी मेहनत के फल का त्योहार है, जो 13 या 14 अप्रैल को धूमधाम से मनाया जाता है।
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सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी।
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सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी।
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उन्होंने 'पंज प्यारे' (पांच प्यारे) चुनकर सिखों को एक नई पहचान दी और जाति भेद मिटाया।
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पंजाब और हरियाणा में यह त्योहार रबी की फसल (विशेषकर गेहूं) के कटने की खुशी में मनाया जाता है। किसान अच्छी फसल के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।