8 मार्च..ये दिन काफी खास होता है। क्योंकि दुनियाभर में इसे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के तौर पर मनाया जाता है। वैसे तो महिलाओं को सम्मान देने के लिए एक दिन काफी नहीं, ये हर दिन किया जाना चाहिए। लेकिन उनको स्पेशल फील कराने के लिए ये दिन मनाया जाता है। आज के समय की बात करें तो महिलाओं को सामान महत्व दिए जाने लगा है। चाहे कोई भी क्षेत्र हो, महिलाओं आज कहीं पर भी पीछे नहीं। हर जगह कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।
लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। पहले महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कमतर समझा जाता था। उनको वो हक नहीं मिले थे, जो पुरुषों को मिला करते थे। अपने अधिकारों के लिए महिलाओं को लंबा संघर्ष लड़ना पड़ा। बात अगर आज की करें तो आज भी कई महिलाएं ऐसी हैं, जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं।
हमारे देश में ऐसे कई अधिकार है, जो महिलाओं को मिलते हैं। लेकिन कई महिलाएं ऐसी भी होती है, जिनको इसके बारे में जानकारी नहीं होती। आज हम आपको ऐसे ही कुछ अधिकारों के बारे में बताते है, जिसके बारे में हर महिला को पता होना बेहद जरूरी है…
– सबसे पहले बात करते हैं संपत्ति से जुड़े अधिकारों की। अगस्त 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पिता की संपत्ति पर बेटी का भी बेटों की तरफ बराबर का अधिकार है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला को पुरुष के मुकाबले ही बराबर हक हैं।
– आज हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों के बराबर हैं। हर महिला को समान वेतन का भी अधिकार मिलता है। समान पारिश्रमिक अधिनियम के मुताबिक वेतन या मजदूरी में लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं हो सकता।
– घरेलू हिंसा आज भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। इसके लिए भी अधिनियम बनाया गया, जिसके मुताबिक कोई भी महिला अगर अपने पति, लिव इन पार्टनर या फिर किसी दूसरे घर के पुरुष द्वारा हिंसा का शिकार होना पड़ता है, तो इसके तहत कार्रवाई का प्रावधान है। हिंसा मौखिक, शारीरिक, आर्थि, मानसिक या मौनिक हो सकती है। जिसकी शिकायत महिला खुद या किसी दूसरे के द्वारा कर सकती है।
– हर महिला को प्रेग्नेंसी के दौरान पेड लीव मिलती है, जो 12 से 26 सप्ताह की होती है।
– महिलाओं की गिरफ्तारी रात में नहीं हो सकती। कानून के मुताबिक कोई भी पुलिसकर्मी महिलाओं को सूरज ढलने के बाद गिरफ्तार नहीं कर सकता। इसके लिए सूरज उगने का इंतेजार करना होगा।
– काम पर हुए यौन उत्पीड़न अधिनियम के अनुसार यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का पूरा अधिकार है।