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Nepal violence News: नेपाल में राजशाही समर्थक आंदोलन ने तूल पकड़ा, काठमांडू में हिंसा...

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Nepal violence News: नेपाल में राजशाही समर्थक आंदोलन एक नया मोड़ लेता हुआ नजर आ रहा है, जिससे देश की राजधानी काठमांडू में तनाव बढ़ गया है। शुक्रवार (29 मार्च) को राजशाही के समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हिंसक झड़पों के बाद हालात बेकाबू हो गए। इस झड़प में एक टीवी कैमरामैन सहित दो लोगों की मौत हो गई और एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। इसके बाद, काठमांडू में सेना को तैनात किया गया और कई इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया।

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राजशाही के पुनर्निर्माण की मांग- Nepal violence News

यह आंदोलन पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह के समर्थकों द्वारा चलाया जा रहा है, जो 2008 में समाप्त हुई राजशाही को फिर से बहाल करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने राजशाही की वापसी के लिए सड़कों पर उतरकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना के बाद से स्थिति बिगड़ गई है और राजशाही के वापस लौटने से देश की स्थिति बेहतर हो सकती है।

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वाम मोर्चे का विरोध और चेतावनी

वहीं, नेपाल के वाम मोर्चे ने इस आंदोलन के खिलाफ रैली की और पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र को चेतावनी दी कि यदि वह सिंहासन वापस प्राप्त करने की कोशिश करेंगे तो यह उनके लिए महंगी साबित हो सकती है। रैली में पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड और माधव कुमार नेपाल समेत कई नेताओं ने हिस्सा लिया। वाम मोर्चे ने राजशाही समर्थक ताकतों के उभार को केपी शर्मा ओली की सरकार का परिणाम बताया और इसे उनके कुशासन का परिणाम करार दिया।

हिंसा और झड़पों का उभार

शुक्रवार को सुबह से ही राजशाही समर्थक तिनकुने इलाके में एकत्र होने लगे थे। करीब 11:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर मार्च करना शुरू किया, जिससे पुलिस को उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश की, तो झड़प शुरू हो गई। इसके बाद, प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में आग लगा दी, दुकानों में लूटपाट की और एक राजनीतिक पार्टी के कार्यालय पर हमला किया। यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस को काठमांडू में कर्फ्यू लगाने का आदेश देना पड़ा।

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हादसा और जनहानि

इस हिंसा में एक चैनल के लिए रिपोर्टिंग कर रहे कैमरामैन सुरेश रजक की भी मौत हो गई। इसके अलावा, 30 लोग घायल हुए, जिनमें से आधे पुलिसकर्मी थे। झड़पों के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने एक घर को आग लगा दी और कई वाहनों को भी जला दिया। इसके अलावा, बाणेश्वर में सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट्स पार्टी के कार्यालय पर हमला किया और चाबाहिल में भटभटेनी सुपरमार्केट को लूट लिया। कांतिपुर टेलीविजन और अन्नपूर्णा पोस्ट अखबार के कार्यालयों में भी तोड़फोड़ की गई।

कर्फ्यू और प्रशासन की कार्रवाई

काठमांडू जिला प्रशासन ने शांतिनगर पुल और मनोहरा नदी पुल के बीच के क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया। कर्फ्यू का दायरा तिनकुने, कोटेश्वर, बाणेश्वर चौक और गौशाला तक फैला हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि हवाई अड्डे तक जाने वाले यात्रियों को अपना टिकट दिखाने पर जाने की अनुमति दी गई।

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Kamakhya Express Derailed: ओडिशा में बड़ा रेल हादसा, बेंगलुरु-कामाख्या सुपरफास्ट एक्स...

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Kamakhya Express Derailed: ओडिशा के कटक जिले में रविवार (30 मार्च) को एक बड़ा रेल हादसा हुआ, जब बेंगलुरु से कामाख्या जा रही सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन के 11 एसी डिब्बे पटरी से उतर गए। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और सात अन्य यात्री घायल हो गए। हादसा कटक जिले के चौद्वार इलाके के मंगुली पैसेंजर हॉल्ट के पास हुआ। इस घटना के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है।

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हादसे के कारण और तत्काल कार्रवाई- Kamakhya Express Derailed

यह घटना उस समय हुई जब ट्रेन नंबर 12551 बेंगलुरु से कामाख्या की ओर जा रही थी। खबरों की मानें तो, ओडिशा के कटक में चौद्वार के पास बेंगलुरु-कामाख्या सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन आज (30 मार्च) 11.54 बजे पटरी से उतर गई। ट्रेन के 11 एसी कोच पटरी से उतर गए, जिसके बाद नीलाचल एक्सप्रेस, धौली एक्सप्रेस, पुरुलिया एक्सप्रेस का रूट डायवर्ट कर दिया गया है।

हालांकि ट्रेन की गति कम थी, जिसके कारण नुकसान कम हुआ, लेकिन इससे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। लोग चिल्लाते हुए इधर-उधर दौड़ने लगे और कई यात्री बुरी तरह घबराए हुए थे। रेलवे अधिकारियों ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। हादसे की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, दमकल और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में जुट गई।

इसके अलावा, रेलवे ने यात्रियों और उनके परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर 8991124238 जारी किया है।

मदद के लिए टीमों की तैनाती

ओडिशा और असम सरकार के अधिकारियों ने भी इस हादसे के बाद त्वरित कार्रवाई की। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने घटना की जानकारी मिलने के बाद ओडिशा सरकार और रेलवे के अधिकारियों से संपर्क किया। उन्होंने ट्वीट किया, “मुझे ओडिशा में कामाख्या एक्सप्रेस से जुड़ी घटना की जानकारी है। हम प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति से संपर्क करेंगे।” इसके अलावा, कटक के स्थानीय विधायक प्रकाश चंद्र सेठी ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और प्रशासन की ओर से राहत सामग्री वितरित की गई।

स्पेशल ट्रेन का इंतजाम

ईस्ट कोस्ट रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही भुवनेश्वर से एक स्पेशल ट्रेन भेजी जाएगी, ताकि सभी फंसे हुए यात्रियों को कामाख्या के लिए रवाना किया जा सके। यह ट्रेन यात्रियों को कटक स्टेशन से कामाख्या के लिए लेकर जाएगी, और फिर ट्रेन के पटरी से उतरने की जगह को ठीक करने का काम शुरू किया जाएगा।

हादसे की जांच जारी

फिलहाल इस हादसे के कारण के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। रेलवे विभाग की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच चल रही है और जल्द ही इसका कारण सामने आ जाएगा। हादसे के बाद से यात्रियों को कटक स्टेशन पर जाने और दूसरी ट्रेन से यात्रा जारी रखने का विकल्प दिया गया। इस दौरान, रेलवे विभाग ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि सभी यात्री सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचे।

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UP News: बांदा में नौकरी के झांसे में युवतियों के साथ दुष्कर्म, पुलिस ने मास्टरमाइंड ...

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UP News: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें तीन युवतियों के साथ नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म किया गया। आरोप है कि आरोपियों ने युवतियों को नशीले पदार्थ जैसे बीयर और सिगरेट पिलाकर उनके साथ इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने उन्हें निर्वस्त्र कर डांस कराया और छह महीने तक यौन उत्पीड़न किया। इस गंभीर मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश के लिए चार पुलिस टीमें बनाई गई हैं।

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नौकरी का झांसा और यौन उत्पीड़न- UP News

यह घटना शहर कोतवाली क्षेत्र की है, जहां तीन युवतियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उनके मुताबिक, तीन आरोपियों ने उन्हें नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया। आरोप है कि जब युवतियां आरोपियों के झांसे में आईं, तो उन्हें नशे की हालत में रखा गया, सिगरेट और बीयर पिलाई गई, और निर्वस्त्र कर डांस कराया गया। इसके बाद आरोपियों ने उनका आपत्तिजनक वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी और छह महीने तक उनका यौन उत्पीड़न किया। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपियों ने लगातार जान से मारने की धमकी दी और उन्हें शोषण का शिकार बनाया।

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आरोपियों का कृत्य और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि कई अन्य लड़कियां भी आरोपियों के झांसे में आकर परेशान हो रही थीं, जिनके साथ भी घिनौनी हरकत की गई थी। इन घटनाओं के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश के लिए चार टीमें बनाई गई हैं। एसपी अंकुर अग्रवाल ने इस मामले में पुष्टि की है कि कुछ महिलाओं ने उत्पीड़न के बारे में शिकायत की है और उनके पास कुछ वीडियो के पेन ड्राइव भी हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे जेल भेज दिया गया है। इसके साथ ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने कहा कि इस मामले में पुलिस पूरी गंभीरता से जांच कर रही है और महिलाओं के मेडिकल टेस्ट कराए जा रहे हैं। जांच में कुछ अहम सबूत भी मिले हैं, जिन्हें आगे की कार्रवाई में इस्तेमाल किया जाएगा।

महिलाओं के लिए न्याय की लड़ाई

इस मामले ने ना केवल बांदा, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और उनके खिलाफ हो रहे अपराधों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर महिलाएं अपने जीवन और करियर के लिए संघर्ष करती हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें ऐसे अपराधों का सामना करना पड़ता है। इस घिनौनी घटना ने यह सिद्ध कर दिया है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

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Rahul Gandhi News: अरबपति मित्रों के 16 लाख करोड़ माफ, बैंकिंग सेक्टर को लगा जबरदस्त ...

Rahul Gandhi News: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार (29 मार्च) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अरबपति दोस्तों के 16 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए, जिससे बैंकिंग सेक्टर पर दबाव पड़ा और अब इसके परिणामस्वरूप बैंक कर्मचारी इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। उनका कहना था कि आईसीआईसीआई बैंक के 782 कर्मचारियों की नौकरी चली गई, जो इस कर्ज माफी के फैसले के नकारात्मक प्रभाव का एक बड़ा उदाहरण है।

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बैंकिंग सेक्टर में संकट- Rahul Gandhi News

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि भाजपा सरकार की कुप्रबंधन और भाई-भतीजावाद के कारण भारतीय बैंकिंग सेक्टर गंभीर संकट में है। उनका कहना था कि इन फैसलों का असर छोटे और जूनियर कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा पड़ा है, जिनकी नौकरी चली गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इन कर्मचारियों को वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने के कारण उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और कई कर्मचारियों को जबरन ट्रांसफर किया गया।

यह आरोप राहुल गांधी ने उन 782 बैंक कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद किया, जिन्होंने शुक्रवार को उनसे संसद में मिलकर अपनी समस्याओं को साझा किया। इन कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें बिना उचित प्रक्रिया के नौकरी से निकाला गया और उन्हें एक प्रकार से प्रतिशोध का शिकार बनाया गया। इनमें से दो दुखद मामले तो आत्महत्या तक पहुंच गए।

सरकार की नीतियों का परिणाम

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, “भा.ज.पा. सरकार ने अपने अरबपति मित्रों के 16 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया, जिससे देश के बैंकिंग सेक्टर पर दबाव पड़ा और इसके परिणामस्वरूप बैंक कर्मचारी इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। कुप्रबंधन और भाई-भतीजावाद ने भारत के बैंकिंग सेक्टर को संकट में डाल दिया है, और इसका बोझ मुख्य रूप से जूनियर कर्मचारियों पर पड़ रहा है।”

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि बैंकिंग सेक्टर में हो रहे वित्तीय घोटालों और अनियमितताओं को उजागर करने के कारण कर्मचारियों के खिलाफ उत्पीड़न बढ़ा। उन्हें बिना किसी वैध कारण के काम से निकाला गया और कई को जबरन स्थानांतरित किया गया। इससे भी ज्यादा दुखद बात यह थी कि इन परिस्थितियों के कारण दो कर्मचारियों ने आत्महत्या कर ली। राहुल गांधी ने इसे भाजपा सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का परिणाम बताया और इसे बेहद चिंताजनक बताया।

कांग्रेस का रुख

राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएगी और कामकाजी वर्ग के पेशेवरों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने का संकल्प लेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के इन फैसलों से सिर्फ आम जनता और बैंक कर्मचारी ही नहीं, बल्कि देश भर के हजारों ईमानदार कामकाजी पेशेवर भी प्रभावित हो रहे हैं।

राहुल ने यह भी कहा, “कांग्रेस पार्टी इन कामकाजी वर्ग के पेशेवरों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने और कार्यस्थल पर उत्पीड़न और शोषण को समाप्त करने के लिए इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से उठाएगी।”

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Elon Musk DOGE Resignation: क्या एलॉन मस्क डोनाल्ड ट्रंप की DOGE टीम से इस्तीफा देने ...

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Elon Musk DOGE Resignation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड  ट्रंप के करीबी और अरबपति कारोबारी एलॉन मस्क ने संकेत दिए हैं कि वह मई के अंत तक अमेरिकी सरकार के खर्चों में कटौती करने वाली संस्था डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) से इस्तीफा दे सकते हैं। मस्क ने अपनी टीम द्वारा किए गए प्रयासों के बारे में बताया, जिसके तहत अमेरिकी घाटे को एक ट्रिलियन डॉलर तक कम कर दिया गया है। उनका कहना था कि DOGE का काम अब पूरा हो चुका है और वह अगले महीने तक इस्तीफा देने का सोच रहे हैं।

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DOGE की प्रमुख भूमिका और मस्क की टीम की सफलता- Elon Musk DOGE Resignation

एलॉन मस्क के नेतृत्व में DOGE ने अमेरिकी सरकार के खर्चों में भारी कमी की है। मस्क के अनुसार, उनकी टीम औसतन हर दिन 4 बिलियन डॉलर बचत करने में सफल रही है, और लगभग 130 दिनों में एक ट्रिलियन डॉलर की बचत का लक्ष्य हासिल कर चुकी है। मस्क का कहना है, “हमारा लक्ष्य था फिजूल खर्च को हर दिन 4 बिलियन डॉलर कम करना, और हम इसमें सफल रहे हैं। अगर यह प्रयास सफल नहीं होता, तो अमेरिकी आर्थिक स्थिति डूब सकती थी।”

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मस्क और उनके सहयोगियों ने अमेरिकी सरकारी खर्च को कम करने के लिए कई अहम कदम उठाए। उन्होंने सरकारी एजेंसियों में हो रहे फिजूल खर्च, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कई सुधार किए। इसके अलावा, मस्क और उनके सहयोगियों ने सरकारी संपत्तियों की बिक्री, कर्मचारियों की संख्या में कमी और अनुबंधों की रद्दीकरण जैसी कार्रवाइयों को लागू किया। इन कदमों के चलते 24 मार्च तक अमेरिकी करदाताओं के 115 बिलियन डॉलर की बचत हो चुकी है।

DOGE के कार्यों से सरकारी खर्च में कटौती

DOGE के तहत की गई कार्रवाइयों से अमेरिकी सरकार की कार्यक्षमता में काफी सुधार हुआ है। मस्क ने कहा कि सरकारी खर्च में 15 प्रतिशत की कटौती के बावजूद, महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है। उनका मानना है कि ये सुधार अमेरिकी सरकार को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाएंगे, जिससे आने वाले समय में वित्तीय स्थिति बेहतर होगी। मस्क ने भरोसा जताया कि अमेरिका वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनेगा, और भविष्य में कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम सफलतापूर्वक चलेंगे।

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मस्क की व्यक्तिगत चुनौती और टेस्ला पर दबाव

मस्क के इस्तीफे की खबर उस समय आई है जब उनकी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी टेस्ला को लेकर अमेरिका में बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। टेस्ला के शेयर की कीमतों में भारी गिरावट आई है, और पिछले सप्ताह यह 5 प्रतिशत से अधिक गिर गई थी। मस्क ने स्वीकार किया कि वह इन दिनों कई जिम्मेदारियों में उलझे हुए हैं और उनके पास 17 अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने कर्मचारियों से बात करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, और हालात कभी-कभी मुश्किल होते हैं, लेकिन उनका विश्वास है कि टेस्ला का भविष्य उज्जवल है।

कानूनी चुनौतियाँ और मस्क की स्थिति

मस्क और उनकी टीम DOGE के कामकाज को लेकर कई कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कुछ आरोपों के अनुसार, DOGE ने बिना कानूनी अधिकार के काम किया और गोपनीयता कानूनों का उल्लंघन किया। हालांकि, मस्क ने इन आरोपों का खंडन किया है और सरकारी खर्च में की गई कटौती को उचित ठहराया है। मस्क का कहना है कि सरकार में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए कठोर निर्णय लेने जरूरी थे, जिससे संघीय घाटे में कमी आ सके।

DOGE के बारे में

DOGE (Department of Government Efficiency) एक अमेरिकी सरकारी संस्था है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी सरकार के खर्चों में कटौती करना और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना था। इस विभाग का फोकस था सरकारी विभागों में हो रहे अनावश्यक खर्च, भ्रष्टाचार और वित्तीय फिजूल खर्च को कम करना। मस्क और उनकी टीम ने इसके तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए, जैसे सरकारी संपत्तियों की बिक्री और अनुबंधों की रद्दीकरण, ताकि सरकार के खर्च को नियंत्रित किया जा सके।

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vikram samvat 2082: विक्रम संवत 2082 की शुरुआत, इतिहास और विज्ञान का अद्भुत संगम, जो ...

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vikram samvat 2082: आज से नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही विक्रम संवत 2082 की शुरुआत भी हो रही है, जिसे हिंदू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। यह संवत सटीक काल गणना के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है और इसे प्राचीन भारतीय कैलेंडर के सबसे वैज्ञानिक रूप में माना जाता है। विक्रम संवत की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होती है, जो आज से शुरू हो रही है। यह संवत न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि इसके वैज्ञानिक और ऐतिहासिक पहलू भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।

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विक्रम संवत का वैज्ञानिक दृष्टिकोण- vikram samvat 2082

विक्रम संवत का निर्माण प्राचीन भारत के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री आचार्य वाराह मिहिर ने किया था। उन्होंने पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर घूमने की गति और दिन-रात के समय का सटीक गणना किया। इसके आधार पर विक्रम संवत की तिथियों को निर्धारित किया गया। विक्रम संवत में महीने को चंद्रमास के रूप में विभाजित किया गया है, जबकि वर्ष को सौर वर्ष के आधार पर निर्धारित किया गया है। इसमें प्रत्येक महीने की सटीकता और ऋतुओं का तालमेल इतना अच्छा है कि इसे सबसे सटीक कैलेंडर माना जाता है।

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विक्रम संवत के बारे में प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान प्रोफेसर पांडुरंग वामन काणे ने अपनी पुस्तक ‘धर्मशास्त्र का इतिहास’ में इसे सबसे वैज्ञानिक बताया है। उनका कहना था कि पश्चिमी कैलेंडर में सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण और अन्य खगोलीय घटनाओं की कोई पूर्व जानकारी नहीं होती, जबकि विक्रम संवत के माध्यम से इन घटनाओं की सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है। विक्रम संवत में ऋतुओं और ग्रहों की स्थिति को भी सही तरीके से दर्शाया गया है।

विक्रम संवत की शुरुआत: राजा विक्रमादित्य की भूमिका

विक्रम संवत का नाम राजा विक्रमादित्य से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, विक्रमादित्य ने शकों और हूणों को हराकर विक्रम संवत की शुरुआत की थी। विक्रमादित्य के समय में खगोलशास्त्र और काल गणना में अत्यधिक विकास हुआ था। यह संवत सबसे पहले राजा विक्रमादित्य ने ही लागू किया, और उनके द्वारा स्थापित किया गया यह कैलेंडर आज भी प्राचीन भारतीय संस्कृति का हिस्सा है।

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राजा विक्रमादित्य की उपाधि ‘विक्रम’ और ‘आदित्य’ से मिलकर बनी, जो उनके पिता महेंद्रादित्य से जुड़ी हुई थी। विक्रमादित्य के दरबार में महान खगोलशास्त्री वराह मिहिर ने विक्रम संवत की गणना की, जो आज भी प्रचलित है। विक्रमादित्य को ‘शकारि’ की उपाधि भी दी गई, जिसका अर्थ था ‘शकों का शत्रु’, क्योंकि उन्होंने शकों को हराया था और उनके अत्याचारों का अंत किया था।

विक्रम संवत का ऐतिहासिक महत्व

विक्रम संवत का इतिहास बेहद पुराना है और इसके प्रमाण कई प्राचीन शिलालेखों में मिलते हैं। उदाहरण के लिए, विजयगढ़ के एक स्तंभ पर विक्रम संवत 428 वर्ष का उल्लेख मिलता है, और तक्षशिला के ताम्रपत्र पर विक्रम संवत की तारीखें अंकित हैं। इन शिलालेखों से यह सिद्ध होता है कि विक्रम संवत का इतिहास ईसा पूर्व से जुड़ा हुआ है।

विक्रम संवत का प्रचलन नेपाल में आज भी है, जबकि भारत में शक संवत को आधिकारिक रूप से अपनाया गया है। विक्रम संवत की गणना का तरीका इतना सटीक और वैज्ञानिक है कि यह आज भी भारतीय त्यौहारों और मुहूर्तों की गणना में उपयोग किया जाता है।

विक्रम संवत के प्रमुख सिद्धांत

विक्रम संवत का आधार सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित है। इसमें 12 मास होते हैं, जिनमें से प्रत्येक मास का निर्माण चंद्रमास के आधार पर किया गया है। विक्रम संवत के अनुसार, प्रत्येक माह में 30 या 31 दिन होते हैं, और हर तीसरे वर्ष में एक अतिरिक्त मास, जिसे अधिक मास कहा जाता है, जो सूर्य वर्ष को समायोजित करता है। यह प्रणाली मौसम और तिथियों के तालमेल को सुनिश्चित करती है।

इसके अतिरिक्त, विक्रम संवत का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह खगोलीय घटनाओं जैसे ग्रहणों का सटीक समय बताने में सक्षम है। यह कैलेंडर न केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय खगोलशास्त्र के उत्कृष्टता का प्रतीक भी है।

विक्रम संवत की सटीकता और इसकी ऐतिहासिकता पर कोई संदेह नहीं है। यह भारतीय खगोलशास्त्र और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। विक्रम संवत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यधिक सटीक और उपयोगी है।

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Immigration and Foreigners Act: भारत में प्रवेश, निवास और सुरक्षा को लेकर नया सख्त का...

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Immigration and Foreigners Act: भारत में इमिग्रेशन और विदेशियों के नियंत्रण को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लोकसभा में इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट 2025 पारित कर दिया गया है। इस नए कानून का उद्देश्य भारत में विदेशियों के प्रवेश, निवास और देश से बाहर जाने की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस विधेयक पर चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यापार जैसे उद्देश्यों से भारत आने वालों का स्वागत करती है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है।

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नए इमिग्रेशन कानून की खास बातें- Immigration and Foreigners Act

इस विधेयक के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका असर भारत में विदेशी नागरिकों की प्रवेश और निवास प्रक्रिया पर पड़ेगा। यह नया कानून पुराने पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920, विदेशियों का पंजीकरण अधिनियम 1939, विदेशियों का अधिनियम 1946, और 2000 का इमिग्रेशन कानून को निरस्त करता है। इन पुराने कानूनों को हटाकर सरकार ने इस नए कानून को लागू किया है, जो भारत में इमिग्रेशन की प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाने का उद्देश्य रखता है।

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विदेशियों की श्रेणियां और दंड प्रावधान

इस नए कानून में विदेशियों को छह अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इससे उनकी जिम्मेदारियों और अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जा सकेगा। इसके अलावा, नए अधिनियम में अवैध प्रवेश, जाली दस्तावेजों का उपयोग, वीजा शर्तों के उल्लंघन जैसे मामलों में सख्त दंड का प्रावधान है। इसका उद्देश्य अवैध इमिग्रेशन को रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।

शरणार्थियों के लिए सुरक्षा और वीजा प्रक्रियाओं का सरलीकरण

इस विधेयक में शरणार्थियों के लिए बेहतर सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं, ताकि उन्हें कानूनी मान्यता और सहायता मिल सके। यह प्रावधान अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और भारत की मानवीय प्रतिबद्धताओं को दर्शाता है। इसके साथ ही, यह नया कानून वास्तविक यात्रियों, छात्रों और पेशेवरों के लिए वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाता है, जिससे भारत में प्रवेश और निवास की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सके।

Immigration and Foreigners Act
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अवैध प्रवासियों और दंड की गंभीरता

नए कानून में अवैध प्रवासियों को लेकर कड़े प्रावधान रखे गए हैं। अगर कोई व्यक्ति वैध दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश करता है या अपने वीजा की अवधि से अधिक समय तक देश में रहता है, तो उसे अवैध प्रवासी माना जाएगा। ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में लेने, निर्वासित करने या ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार अधिकारियों को दिया गया है। इसके अलावा, वीजा की अवधि से अधिक समय तक रहने पर जुर्माने की राशि भी बढ़ा दी गई है।

सख्त दंड प्रावधान और अपराधी गतिविधियों का दमन

नए कानून के तहत, अगर कोई व्यक्ति आपराधिक गतिविधियों या धोखाधड़ी में शामिल होता है, तो उसका वीजा रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा, ऐसे व्यक्तियों को आपराधिक गतिविधियों, आतंकवाद या गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में दोषी पाए जाने पर कारावास, निर्वासन और स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट किए जाने की सजा भी हो सकती है।

इसके साथ ही, यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से फिर से भारत में प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो उसे 10 साल तक की कैद और आजीवन प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है।

इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट 2025 भारत में इमिग्रेशन प्रक्रिया को अधिक संगठित, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नए कानून अवैध प्रवासियों को रोकने, शरणार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेंगे। हालांकि, इसमें कड़े दंड प्रावधान और कानून के उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की योजना है, जो इस नए कानून को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

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Pastor Bajinder Singh found guilty: मोहाली की POCSO कोर्ट ने पादरी बजिंदर सिंह को 201...

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Pastor Bajinder Singh found guilty: पंजाब के विवादित पादरी बजिंदर सिंह को मोहाली की POCSO कोर्ट ने 2018 के जीरकपुर यौन उत्पीड़न और बलात्कार मामले में दोषी ठहराया है। यह मामला एक महिला द्वारा लगाए गए यौन शोषण के गंभीर आरोपों से जुड़ा है। अदालत ने इस केस में 1 अप्रैल को सजा सुनाने का आदेश दिया है, जिससे सबकी नजरें अब इस तारीख पर टिकी हुई हैं।

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कोर्ट में पेशी और सुनवाई- Pastor Bajinder Singh found guilty

शुक्रवार को मोहाली की POCSO अदालत में बजिंदर सिंह को अंतिम सुनवाई के लिए पेश किया गया। उनके साथ छह अन्य आरोपी भी कोर्ट में उपस्थित थे। हालांकि, अपर्याप्त सबूतों के आधार पर अदालत ने पांच आरोपियों को बरी कर दिया। बजिंदर सिंह को दोषी ठहराते हुए अदालत ने कहा कि इस मामले में सभी कानूनी पहलुओं की पूरी जांच की गई और अब 1 अप्रैल को उसे सजा सुनाई जाएगी।

मामला कैसे दर्ज हुआ था?

यह मामला 2018 में तब सामने आया जब जीरकपुर की एक महिला ने पादरी बजिंदर सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न और धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया था। महिला ने आरोप लगाया कि बजिंदर सिंह ने चमत्कार के नाम पर धोखा देकर उसका यौन शोषण किया। इसके बाद जीरकपुर पुलिस ने पादरी बजिंदर समेत सात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इस घटना के बाद, पादरी बजिंदर सिंह ने भागने की कोशिश की थी, जिसे पुलिस ने नाकाम कर दिया।

आरोपों की गंभीरता

पादरी बजिंदर सिंह और अन्य आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था, जिनमें प्रमुख धाराएं शामिल हैं:

  • धारा 376 (बलात्कार)
  • धारा 420 (धोखाधड़ी)
  • धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करने का प्रयास)
  • धारा 294 (अश्लील हरकतें)
  • धारा 323 (चोट पहुंचाना)
  • धारा 506 (धमकी देना)
  • धारा 148 और 149 (गैरकानूनी सभा और दंगा करना)

इन गंभीर आरोपों के तहत मामले की जांच की गई, और कोर्ट ने बजिंदर सिंह को दोषी ठहराया।

एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी

जब यह मामला दर्ज हुआ, तब पादरी बजिंदर सिंह ने भारत से भागने की कोशिश की थी। 14 जुलाई 2018 को उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर लंदन जाने की फ्लाइट पकड़ते समय गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी गिरफ्तारी के बाद मामले की गहन जांच शुरू हुई, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस ने कहा कि बजिंदर सिंह लंदन भागकर इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़कर उसकी योजना नाकाम कर दी।

नामजद आरोपी

इस केस में केवल पादरी बजिंदर सिंह ही नहीं, बल्कि छह और लोगों के नाम भी शामिल थे, जिनके खिलाफ आपराधिक साजिश और यौन शोषण के आरोप लगे थे। इन आरोपियों में अकबर भट्टी, राजेश चौधरी, सुच्चा सिंह, जतिंदर कुमार, सितार अली और संदीप उर्फ पहलवान शामिल थे। हालांकि, अदालत ने सबूतों के अभाव में अन्य पांच आरोपियों को बरी कर दिया।

अब क्या होगा?

अब सभी की नजरें 1 अप्रैल पर टिकी हैं, जब मोहाली की POCSO कोर्ट बजिंदर सिंह की सजा पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगी। इस मामले ने पंजाब और खासतौर पर धार्मिक समुदायों में भारी विवाद खड़ा कर दिया है।

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Infinix Note 50x: नया बजट स्मार्टफोन, MIL-Grade सुरक्षा और दमदार फीचर्स के साथ हुआ लॉ...

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Infinix Note 50x: भारत में स्मार्टफोन की दुनिया में लगातार नई तकनीकों और फीचर्स के साथ सस्ते बजट स्मार्टफोन्स का आगमन हो रहा है। इसी कड़ी में Infinix ने अपनी नई डिवाइस Infinix Note 50x को भारतीय बाजार में पेश किया है। इस नए फोन को खासतौर पर उन यूज़र्स को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है जो बजट स्मार्टफोन में बेहतरीन प्रदर्शन और सुरक्षा चाहते हैं। इस स्मार्टफोन के साथ कई नए और दमदार फीचर्स पेश किए गए हैं जो इसे अपनी कीमत के हिसाब से खास बनाते हैं।

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Infinix Note 50x की कीमत और उपलब्धता

Infinix Note 50x को भारत में दो प्रमुख वैरिएंट्स के साथ लॉन्च किया गया है। इसके 6GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले बेस वेरिएंट की कीमत 11,499 रुपये रखी गई है, जबकि 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वाले टॉप वेरिएंट की कीमत 12,999 रुपये है। फोन भारत में 3 अप्रैल से उपलब्ध होगा, और इसकी कीमत के हिसाब से यह बजट सेगमेंट में एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है।

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Infinix Note 50x के स्पेसिफिकेशन: एक नजर में

Infinix Note 50x का डिज़ाइन और स्पेसिफिकेशन दोनों ही इस स्मार्टफोन को खास बनाते हैं। इस स्मार्टफोन में 6.67 इंच का बड़ा LCD डिस्प्ले है, जो 120Hz के रिफ्रेश रेट के साथ आता है, हालांकि स्क्रीन का रेजोल्यूशन HD+ है। यह एकदम ठीक है, खासकर जब आप इसका उपयोग वीडियो देखने या गेम खेलने के लिए करते हैं। यह डिस्प्ले का बड़ा आकार और स्मूथ रिफ्रेश रेट आपके यूज़र एक्सपीरियंस को बेहतर बनाता है।

फोन में MediaTek Dimensity 7300 Ultra चिपसेट है, जो 8GB तक की रैम और 256GB स्टोरेज के साथ आता है। यह चिपसेट डिवाइस को हल्के से लेकर मीडियम लेवल गेम्स और मल्टीटास्किंग के लिए अच्छे से सक्षम बनाता है। इसके अलावा, फोन में Android 15 पर आधारित XOS 15 ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिसमें AI आधारित कैमरा और नोटिफिकेशन फीचर्स दिए गए हैं।

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कैमरा और बैटरी

Infinix Note 50x में एक जेम-कट कैमरा लेआउट दिया गया है, जिसमें पीछे की तरफ 50MP का AI प्राइमरी मेन कैमरा सेंसर है। इसके अलावा, 8MP का सेल्फी कैमरा भी है, जो दिन और रात के वक्त अच्छी फोटो लेने में सक्षम है। फोन के कैमरा फीचर्स में AI लेंस का सपोर्ट भी है, जो बेहतर फोटो क्वालिटी देने के लिए काम करता है।

इसमें 5,500mAh की बड़ी बैटरी है, जो लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए पर्याप्त है। साथ ही, यह 45W की फास्ट चार्जिंग स्पीड को सपोर्ट करती है, जिससे आप जल्दी से फोन को चार्ज कर सकते हैं और लंबे समय तक उपयोग कर सकते हैं।

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Minimum Balance Penalty Report: बैंकों का डाका! राघव चड्ढा का सनसनीखेज सवाल, क्या हिड...

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Minimum Balance Penalty Report: भारत में बैंकिंग व्यवस्था में आम आदमी का भरोसा बेहद मजबूत है। लेकिन हाल के दिनों में बैंकों द्वारा लगाए जा रहे हिडेन चार्जेज और फीस पर सवाल उठने लगे हैं। इन शुल्कों के प्रति बढ़ती चिंता को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा (Aam Aadmi Party MP Raghav Chadha) ने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बैंकों द्वारा लागू किए गए मिनिमम बैलेंस पेनल्टी जैसे शुल्कों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। आइए, जानते हैं कि इस मुद्दे पर राघव चड्ढा की चिंताएं कितनी सही हैं और बैंकों से जुड़ी फीस का असल प्रभाव क्या है।

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राघव चड्ढा का बयान- Minimum Balance Penalty Report

राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि कई बैंक अपने ग्राहकों से सिर्फ मिनिमम बैलेंस न रखने पर भारी पेनल्टी वसूलते हैं। यह पेनल्टी हर माह 100 रुपये से लेकर 600 रुपये तक हो सकती है, और इससे बैंकिंग सिस्टम के प्रति लोगों की धारणा पर असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि बैंकों ने सिर्फ 2022-23 में इस एक शुल्क के माध्यम से 3500 करोड़ रुपये जमा किए हैं। इसके अलावा, बैंकों द्वारा लगाए गए अन्य शुल्कों जैसे एक्स्ट्रा एटीएम यूज फीस, बैंक स्टेटमेंट फीस, इनएक्टिविटी फीस और एसएमएस अलर्ट फीस ने आम जनता की जेब पर और बोझ डाला है।

बैंकों द्वारा वसूले गए जुर्माने का आंकड़ा

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में भारत के 11 पब्लिक सेक्टर बैंकों ने मिनिमम बैलेंस न रखने पर कुल 2,331 करोड़ रुपये जुर्माना वसूला। यह रकम पिछले साल के मुकाबले 25.63% ज्यादा थी, जब इन बैंकों ने 2022-23 में 1,855.43 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला था। इसका मतलब है कि बैंकों द्वारा इन शुल्कों के माध्यम से एक बड़ा धनराशि एकत्र किया गया है, जो ग्राहकों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो रहा है।

कौन से बैंक सबसे आगे?

इस मामले में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) सबसे ऊपर रहा। इसने अपने खाता धारकों से मिनिमम बैलेंस पेनल्टी के नाम पर 633.4 करोड़ रुपये वसूले। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा था, जिसने 386.51 करोड़ रुपये वसूले। इंडियन बैंक ने इस मामले में तीसरा स्थान हासिल किया, और उसने 369.16 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला। इन आंकड़ों से यह साफ है कि यह शुल्क कुछ बड़े बैंकों के लिए एक बड़ा राजस्व स्रोत बन चुका है।

तीन साल में वसूला गया 5,614 करोड़ रुपये

इन 11 बैंकों ने पिछले तीन सालों में कुल 5,614 करोड़ रुपये मिनिमम बैलेंस न रखने पर वसूले थे। इसमें बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), यूको बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया शामिल थे। यह आंकड़ा दिखाता है कि बैंकों के लिए यह जुर्माना एक महत्वपूर्ण आय स्रोत बन गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक के नियम क्या कहते हैं?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, बैंकों को खाता खुलवाने से पहले ग्राहकों को मिनिमम बैलेंस रखने की जानकारी देनी चाहिए। इसके अलावा, यदि बैंक नियमों में कोई बदलाव करते हैं, तो उन्हें ग्राहकों को सूचित करना जरूरी है। यदि कोई ग्राहक न्यूनतम बैलेंस नहीं रखता है, तो बैंक को पहले एक नोटिस देना चाहिए और एक महीने का समय देना चाहिए। इसके बाद भी, बैंकों को जुर्माने के कारण ग्राहकों के अकाउंट को निगेटिव बैलेंस में नहीं लाना चाहिए।

SBI ने लिया कदम: जुर्माना बंद

भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 2020 से ही मिनिमम बैलेंस न रखने पर जुर्माना लेना बंद कर दिया है।

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