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Sikhism in Portugal: 1990 के दशक से बढ़ता हुआ अल्पसंख्यक धर्म, 35,000 सिखों का समुदाय...

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Sikhism in Portugal: पुर्तगाल में सिख समुदाय एक अल्पसंख्यक धर्म है, लेकिन समय के साथ इसमें तेज़ी से वृद्धि हुई है। वर्तमान में पुर्तगाल में लगभग 35,000 सिख रहते हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। समुदाय ने पुर्तगाल में कृषि, निर्माण कार्य और व्यवसायों में अपनी उपस्थिति स्थापित की है और इसके सदस्य देश के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं।

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सिखों का पुर्तगाल में आगमन- Sikhism in Portugal

पुर्तगाल में सिख धर्म का इतिहास 1990 के दशक से शुरू होता है, जब पुर्तगाल ने यूरोपीय संघ में शामिल होने के बाद अपनी आप्रवासन नीतियों को लचीला किया। 1986 में यूरोपीय संघ का सदस्य बनने और 1995 में शेंगेन क्षेत्र में शामिल होने के बाद, पुर्तगाल में भारतीय उपमहाद्वीप से कई आप्रवासी पहुंचे। खासकर, सिख समुदाय के सदस्य यहां कृषि, निर्माण और पर्यटन क्षेत्रों में काम करने के लिए पहुंचे।

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सिखों का पुर्तगाल में आगमन मुख्य रूप से उस समय हुआ जब पुर्तगाल में निर्माण का उभार था और श्रमिकों की कमी थी। 1990 के दशक के अंत तक, पंजाब से आए कई सिखों ने पुर्तगाल में अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत की, और पुर्तगाल के विभिन्न शहरों में भारतीय रेस्टोरेंट्स और व्यापारिक प्रतिष्ठान खोलने लगे।

पुर्तगाल में सिखों की जनसंख्या और स्थायित्व

सिखों की संख्या पुर्तगाल में बढ़ती रही, और 2007 में यह संख्या लगभग 5,000 के आसपास थी। 2010 में, पुर्तगाल में सिख धार्मिक नेताओं का अनुमान था कि यह संख्या बढ़कर 10,000 हो चुकी थी। 2024 में, भारतीय दूतावास ने पुष्टि की कि पुर्तगाल में लगभग 35,000 सिख रहते हैं, जो एक महत्वपूर्ण संख्या है और इसे भारतीय समाज की एक बड़ी भागीदारी माना जाता है।

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गुर्दवारे और धार्मिक गतिविधियां

पुर्तगाल में सिख धर्म का पालन करने वाले लोग अपनी धार्मिक गतिविधियों के लिए गुर्दवारे जाते हैं। पुर्तगाल में तीन प्रमुख गुर्दवारे हैं, जो सिखों के लिए धार्मिक आस्था और पूजा का केंद्र हैं। इनमें शामिल हैं:

  1. गुर्दवारा सिख संगत साहिब, लिस्बन
  2. गुर्दवारा श्री गुरु तेग बहादुर, अल्बुफेरा
  3. गुर्दवारा श्री गुरु नानक देव जी, पोर्टो

इन गुर्दवारों में नियमित रूप से पूजा अर्चना, कीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। इसके अलावा, हर साल पुर्तगाल में वैसाखी के अवसर पर नगर कीर्तन जैसे धार्मिक उत्सव आयोजित होते हैं। 2022 में, पोर्टो शहर में वैसाखी नगर कीर्तन में 2,000 सिखों ने भाग लिया था, जो सिख समुदाय की बढ़ती उपस्थिति का संकेत है।

कानूनी पहचान और समुदाय की पहचान

2008 में, पुर्तगाली पुलिस ने एक सिख व्यक्ति को उसके किरपान (धार्मिक कृपाण) के साथ गिरफ्तार नहीं किया, भले ही उसकी धारा कानूनी सीमा से अधिक थी। पुलिस ने इसे धार्मिक पहचान के रूप में स्वीकार किया, जो कि पुर्तगाल में सिख समुदाय के धार्मिक अधिकारों को मान्यता देने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण था।

पुर्तगाल में सिखों का योगदान और भविष्य

पुर्तगाल में सिखों का योगदान कृषि, निर्माण और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रहा है। इसके अलावा, सिख समुदाय ने पुर्तगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता में भी योगदान दिया है। पुर्तगाल में सिख समुदाय की स्थिति और सिख धर्म का प्रचार-प्रसार न केवल इस देश में, बल्कि यूरोप के अन्य हिस्सों में भी बढ़ रहा है।

यहां का सिख समुदाय अब अपने धार्मिक और सामाजिक कर्तव्यों के साथ-साथ पुर्तगाल की सामाजिक-आर्थिक प्रगति में भी भागीदार बन चुका है। भविष्य में, यह समुदाय और भी विस्तृत रूप से पुर्तगाल के समाज में अपनी जगह बनाए रखेगा और विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रहेगा।

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Madhya Pradesh News: प्रेमिका ने शादी का वादा करके प्रेमी से ठग लिए लाखों रुपये, पुलि...

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Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के रीवा शहर में एक प्रेमिका ने अपने प्रेमी से शादी का वादा करके उसे धोखा दिया और लगभग 80 लाख रुपये की ठगी कर दी। इस घटना के बाद प्रेमी विवेक शुक्ला ने पुलिस से शिकायत की और अब पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है।

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घटना का विवरण- Madhya Pradesh News

रीवा के आजाद नगर इलाके में रहने वाले विवेक शुक्ला का आस्था उर्मलिया से प्रेम प्रसंग था। विवेक अपनी गर्लफ्रेंड पर दिल खोलकर पैसे उड़ाता था। वह महंगे होटलों में खाना खाता था, ऑनलाइन शॉपिंग करता था और लाखों रुपए गिफ्ट में देता था। आस्था ने अपने और अपनी बहनों के लिए महंगे गिफ्ट खरीदे थे। विवेक ने बताया कि उसने आस्था के लिए 45 लाख रुपए की शॉपिंग की थी। इसके अलावा उसने आस्था को हीरे की अंगूठी, आईफोन, महंगी घड़ी, हैंडबैग और चश्मा जैसी कई महंगी चीजें दी थीं।

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शादी का झांसा देकर धोखा

विवेक के अनुसार, आस्था ने शादी का वादा किया था और लगभग 3 साल छह महीने तक उसके साथ रिलेशनशिप में रही। लेकिन, अंत में आस्था ने धोखा दिया और अपने पुराने प्रेमी से सगाई कर ली। विवेक ने बताया कि आस्था का संबंध एक राजनीतिक परिवार से है और वह पूर्व विधायक राजकुमार उर्मलिया की भतीजी है। आस्था के पिता पहले जनपद अध्यक्ष रह चुके हैं।

पुलिस की कार्रवाई

विवेक ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने कानूनी सलाह लेने के बाद आस्था के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज कर लिया। नगर पुलिस अधीक्षक रितु उपाध्याय ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि पुलिस ने आस्था से पूछताछ की और पाया कि उसने विवेक से शादी का झांसा देकर ठगी की थी। अब पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और आस्था को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

विवेक और उसके परिवार की हालत

विवेक के परिवार ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया है। विवेक का कहना है कि उसने अपने पैसों का सदुपयोग किया था, लेकिन अब उसे यह विश्वासघात झेलना पड़ रहा है। विवेक और उसके परिवार की हालत बहुत खराब हो गई है। विवेक के पिता का कहना है कि वे गहरे सदमे में हैं और आस्था से पैसे वापस मांग रहे हैं।

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समाज में बढ़ती ठगी की घटनाएं

यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि समाज में रिश्तों के नाम पर ठगी और धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ रही हैं। जहां एक ओर लोग प्यार और विश्वास की उम्मीद करते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए इन रिश्तों का गलत इस्तेमाल करते हैं। इस मामले में भी विवेक को अपनी प्रेमिका के झांसे में आकर भारी नुकसान उठाना पड़ा। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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2025 MG Astor Launched: नए फीचर्स और किफायती कीमत के साथ भारत में लॉन्च, पैनोरमिक सनर...

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2025 MG Astor Launched: JSW MG Motor ने भारत में अपनी नई 2025 MG Astor को लॉन्च कर दिया है, जो नए फीचर्स और आकर्षक मूल्य के साथ आई है। इस कार का शाइन वेरियंट खासतौर पर आकर्षक है, जिसमें पैनोरैमिक सनरूफ और 6 स्पीकर्स जैसे नए फीचर्स दिए गए हैं। इसकी कीमत 12.5 लाख रुपये से भी कम है, जिससे यह सेगमेंट में पैनोरैमिक सनरूफ वाली सबसे सस्ती कार बन गई है।

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नई 2025 MG Astor में क्या खास है? (2025 MG Astor Launched)

2025 MG Astor को कई नए फीचर्स के साथ पेश किया गया है, जिनमें फ्रंट वेंटिलेटेड सीटें, वायरलेस चार्जर, वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay, ऑटो-डिमिंग IRVM और 80 से ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स के साथ अपडेटेड i-Smart 2.0 शामिल हैं। इसके साथ ही, इस कार में Jio वॉयस रिकग्निशन सिस्टम है, जो मौसम, क्रिकेट अपडेट, राशिफल जैसी जानकारी देने के साथ-साथ कई वॉयस कमांड्स को सपोर्ट करता है।

यह MG Astor भारत की पहली एसयूवी है, जो पर्सनल AI असिस्टेंट से लैस है। इसके अ

2025 MG Astor Launched

लावा, इसमें लेवल 2 ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) के साथ 14 प्रमुख फीचर्स जैसे रडार और मल्टीपर्पस कैमरा दिए गए हैं, जो बेहतर सुरक्षा और ड्राइविंग अनुभव प्रदान करते हैं।

इंजन विकल्प और ट्रांसमिशन

2025 MG Astor को दो इंजन विकल्पों में उपलब्ध किया गया है। पहला है 1.3-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन, जो 140 PS पावर और 220 NM टॉर्क प्रदान करता है और इसे 6-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है। दूसरा विकल्प है 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन, जो 110 PS पावर और 144 NM टॉर्क देता है। यह इंजन 5-स्पीड मैनुअल और CVT ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ उपलब्ध है।

MG Astor का वैरिएंट लाइनअप और कीमतें

2025 MG Astor पांच वेरियंट्स में उपलब्ध है – स्प्रिंट, शाइन, सिलेक्ट, शार्प प्रो और सेवी प्रो। इसकी कीमत ₹9.99 लाख (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है और ₹17.45 लाख (एक्स-शोरूम) तक जाती है। शाइन वेरियंट की कीमत ₹12,47,800 रुपये है, जबकि सेलेक्ट वेरियंट की कीमत ₹13,81,800 रुपये है।

सेफ्टी फीचर्स और कम्फर्ट

इस नई कार में अब ज्यादा सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं, जिसमें 6 एयरबैग्स, प्रीमियम आइवरी लेदर सीट्स, और बेहतर ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम शामिल हैं। यह कार यात्रियों की सुरक्षा के लिए और भी बेहतर बनी है। इसके अलावा, इस वेरियंट में पैनोरैमिक सनरूफ, वॉयस रिकग्निशन, एंटी-थेफ्ट अलर्ट, और डिजिटल की जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।

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कंपनी का उद्देश्य

MG Motor का कहना है कि 2025 MG Astor का लक्ष्य किफायती मूल्य पर उन्नत प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और प्रीमियम सुविधाओं को मिलाकर एसयूवी सेगमेंट को फिर से परिभाषित करना है। यह कार अपने सेगमेंट की अन्य कारों जैसे Kia Seltos, Hyundai Creta, और Skoda Kushaq से मुकाबला करती है, और इसमें एक नई दिशा देने का उद्देश्य है।

MG Motor ने भारतीय बाजार में इस नई एसयूवी के साथ अपने ग्राहकों को बेहतर विकल्प देने का वादा किया है, जिससे उन्हें कम कीमत पर प्रीमियम और सुरक्षित ड्राइविंग अनुभव मिलेगा।

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Indians Deported From USA: 70 लाख से 80 लाख तक खर्च, 3 खतरनाक ‘डंकी रूट’ ...

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Indians Deported From USA: भारत में एक बार फिर ‘डंकी रूट’ शब्द चर्चा में आ गया है, जब 104 भारतीयों को अमेरिका से डिपोर्ट कर भारत भेज दिया गया। ये लोग अमेरिका में अवैध तरीके से घुसने की कोशिश कर रहे थे। डंकी रूट एक खतरनाक और अवैध मार्ग है, जिसका इस्तेमाल भारत से अमेरिका पहुंचने के लिए किया जाता है। इस रास्ते को पार करते समय लोग न सिर्फ अपने जीवन को जोखिम में डालते हैं, बल्कि उन्हें कई देशों की सीमाएं पार करनी होती हैं और कई प्रकार की मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है।

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डंकी रूट के मार्ग और उनकी समस्याएं- Indians Deported From USA

डंकी रूट के माध्यम से अमेरिका पहुंचने के कई मार्ग होते हैं, जिनमें से सबसे सामान्य मार्ग कनाडा व मेक्सिको होते हैं। इसके अलावा, कुछ लोग तुर्की, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के रास्ते से भी अमेरिका जाने का प्रयास करते हैं। इन रास्तों पर यात्रा करने के लिए प्रवासियों को 70 से 80 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। इस यात्रा के दौरान, उन्हें न केवल अत्यधिक शारीरिक कष्ट झेलने पड़ते हैं, बल्कि कई बार उन्हें जान का भी खतरा होता है।

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रास्ते की खतरनाक स्थिति

इन डंकी रूट्स के माध्यम से जाने के लिए लोग बिना किसी वीजा के यात्रा करते हैं। कई बार वे जंगलों, पहाड़ों और समुद्रों के रास्ते यात्रा करते हैं। रास्ते में बर्फीले इलाकों और खतरनाक जंगलों से गुजरते हुए उन्हें भुखमरी, बीमारी और यहां तक कि मौत का भी सामना करना पड़ता है। कई बार इस यात्रा के दौरान लोग रास्ते में ही मर जाते हैं, और उनके शव को किसी भी सम्मान के बिना छोड़ दिया जाता है। इसी तरह की एक कहानी हरियाणा के प्रदीप और आकाश की है, जो डंकी रूट से अमेरिका पहुंचे थे, लेकिन बाद में उन्हें डिपोर्ट कर दिया गया।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

डंकी रूट पर जाने के लिए प्रवासियों के परिवारों को भारी कर्ज भी उठाना पड़ता है। उदाहरण के लिए, हरियाणा के आकाश के परिवार ने उन्हें अमेरिका भेजने के लिए अपनी ज़मीन बेच दी थी और 72 लाख रुपये खर्च किए थे। इसी तरह के कई मामलों में, लोग अपनी ज़मीन बेचकर या बैंक से लोन लेकर इस अवैध रास्ते का चयन करते हैं। लेकिन डंकी रूट के माध्यम से अमेरिका पहुंचने के बाद, उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगती है, क्योंकि कई बार वे डिपोर्ट हो जाते हैं।

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डंकी रूट का इतिहास और असलियत

डंकी रूट शब्द पंजाब के ‘डुंकी’ शब्द से आया है, जिसका अर्थ होता है एक जगह से दूसरी जगह कूदना। इस रूट पर यात्रा करने के लिए लोग विभिन्न देशों की सीमाएं पार करते हैं और उन्हें कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यात्रा के दौरान, उन्हें ट्रकों, विमानों, नावों या पैदल चलकर कई देशों से गुजरना पड़ता है। इस अवैध रास्ते का चुनाव करने वाले लोग पूरी तरह से जान जोखिम में डालते हैं, क्योंकि इन्हें पकड़ने पर कठोर सजा हो सकती है।

इस प्रकार के अवैध मार्गों से यात्रा करने का खतरा न केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए है, बल्कि यह एक समाजिक मुद्दा भी बन गया है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी इस रूट पर यात्रा करने वाले लोग अंत में निराश होकर अपने घर वापस लौट आते हैं। ऐसे में सरकार को इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि लोगों को इस प्रकार के रास्तों पर जाने से बचाया जा सके और उनके लिए वैध रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकें।

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US Immigration Row: इनमें से 22 साल के प्रदीप भी शामिल हैं, जो पंजाब के जुडोद गांव के रहने वाले हैं। अमेरिका जाने के लिए प्रदीप ने अवैध रास्ता अपनाया था और परिवार ने उसे भेजने के लिए 41 लाख रुपये खर्च किए थे। लेकिन, छह महीने बाद प्रदीप अमेरिका से भारत वापस भेज दिया गया। उनका परिवार इस घटना से पूरी तरह सदमे में है, और फिलहाल मीडिया से बात करने से इंकार कर दिया है।

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प्रदीप के परिवार का दुख- US Immigration Row

प्रदीप के घरवालों का कहना है कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उनका बेटा सुरक्षित घर लौट आया है, लेकिन वे इस कष्टकारी समय में सदमे में हैं। प्रदीप के पिता का कहना है कि उन्होंने बेटे को विदेश भेजने के लिए अपनी ज़मीन बेच दी थी, लेकिन अब उनका बेटा वापस आ गया है। प्रदीप का परिवार अब सिर्फ इस बात की उम्मीद कर रहा है कि उन्हें इस रकम का कुछ हिस्सा वापस मिले, ताकि वे कुछ काम कर सकें।

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गाँव में बढ़ता पलायन

प्रदीप के गांव के लोग भी इस घटना को लेकर दुखी हैं। गांव के पड़ोसी बताते हैं कि जब मामला शांत हो जाएगा, तब फिर से लोग विदेश जाने के लिए पागल हो जाएंगे। एक गांव वाले का कहना था कि सरकार युवाओं को रोजगार नहीं दे रही है, और इस कारण वे विदेश जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। वहीं, किसानों के बारे में भी उनका कहना था कि आजकल की युवा पीढ़ी खेती में रुचि नहीं लेती है, और सरकार की ओर से कृषि बाजार में सही मूल्य न मिलने के कारण युवा काम के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं।

आकाश का संघर्ष

प्रदीप की ही तरह हरियाणा के करनाल जिले के घरौंडा के कलारों गांव के एक और युवक आकाश की भी दुखद कहानी है, जिसका परिवार उसे विदेश भेजने के लिए जमीन बेचने को तैयार था। आकाश के परिवार ने उसे अमेरिका भेजने के लिए 72 लाख रुपए खर्च किए थे। हालांकि, 26 जनवरी को वह मैक्सिको की दीवार फांदकर अमेरिका में घुस गया, लेकिन जल्द ही उसे पकड़ लिया गया और डिपोर्ट कर दिया गया। आकाश को रिमांड का डर दिखाकर उसे डिपोर्ट के कागजों पर साइन करवा लिया गया। अब उसका परिवार भी सदमे में है और चाहता है कि एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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प्रवासी भारतीयों की समस्याएं

इन सब घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि प्रवासी भारतीयों के लिए अमेरिका जाने का सपना कई बार एक दुःस्वप्न बन जाता है। उच्च लागत, कठिन रास्ते और अपार संघर्षों के बावजूद कई लोग अपने परिवारों का पैसा खर्च करके विदेश जाते हैं, लेकिन उन्हें कभी भी वह परिणाम नहीं मिलता जो वे चाहते हैं। डिपोर्ट किए गए लोगों की कहानियां इस बात की गवाह हैं कि किस तरह वे बिना किसी सुरक्षा और सही मार्गदर्शन के रास्ते पर निकल पड़ते हैं, और अंत में उन्हें अपनी असफलता का सामना करना पड़ता है।

एजेंटों का धोखाधड़ी

इसके साथ ही, एजेंटों की भूमिका भी इस पूरे प्रकरण में सामने आती है। इन एजेंटों ने उच्च खर्चे पर भारतीय युवाओं को विदेश भेजने का वादा किया, लेकिन उन्हें सुरक्षा या कानूनी मार्गदर्शन नहीं दिया। इस धोखाधड़ी के कारण इन युवाओं को कड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा, और कई मामलों में तो उनके परिवारों ने अपनी ज़मीन तक बेच दी।

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Indian Immigrants Deported By US: अमेरिका का सपना टूटा! रास्ते में मौत, खाने की किल्ल...

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Indian Immigrants Deported By US: अमेरिका जाने का सपना बहुत से भारतीयों के दिलों में बसा हुआ है, लेकिन कई बार यह सपना सच नहीं हो पाता और यह एक दर्दनाक यात्रा बन जाता है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के खुशप्रीत सिंह, पंजाब के सुखपाल सिंह, रॉबिन हांडा और अन्य कई युवाओं ने बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका जाने का सपना देखा था, लेकिन उनका यह सपना जल्दी टूट गया। उन्हें न केवल शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, बल्कि उनके परिवारों ने भी इस यात्रा में भारी नुकसान उठाया।

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खुशप्रीत सिंह की कहानी- Indian Immigrants Deported By US

खुशप्रीत सिंह, जो छह महीने पहले 45 लाख रुपये खर्च करके अमेरिका गए थे, उनके पिता ने अपनी ज़मीन, घर और पशुधन पर कर्ज लेकर उन्हें विदेश भेजा था। खुशप्रीत का कहना है कि उन्होंने 22 जनवरी 2024 को सीमा पार की और दो फरवरी को वापस भेज दिए गए। अमेरिका में पकड़े जाने के बाद उन्हें 12 दिनों तक ट्रांज़िट कैंप में रखा गया। खुशप्रीत सिंह का कहना है, “जब हमें हाथों में हथकड़ी लगाई गई, तो हम समझ गए कि अब हमारी यात्रा खत्म हो चुकी है।”

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सुखपाल सिंह की यात्रा

पंजाब के होशियारपुर जिले के सुखपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने जंगलों और समुद्र के रास्ते होते हुए अमेरिका पहुंचने की कोशिश की। रास्ते में उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। सुखपाल कहते हैं, “हमने रास्ते में कई शवों को देखा। हमें खाना भी ठीक से नहीं मिलता था, और जब हम आगे बढ़ते थे तो हमें और भी मुश्किलें आती थीं।” सुखपाल की यात्रा बेहद खतरनाक रही, जिसमें उन्होंने अपार संघर्ष किया और भारी दुविधाओं का सामना किया।

रॉबिन हांडा की कठिन यात्रा

रॉबिन हांडा ने भी अमेरिका जाने के लिए 7 महीने पहले अपनी यात्रा शुरू की थी। उन्होंने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका गए थे। उनका कहना है, “मैंने 22 जनवरी को अमेरिका की सीमा पार की। इसके बाद हमें सेना के हवाले कर दिया गया। वहां हमें अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया, और हमसे झूठ बोला गया कि हमें एक कैंप में रखा जाएगा।”

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रॉबिन हांडा के परिवार ने इस यात्रा पर 45 लाख रुपये खर्च किए थे, जिनमें से अधिकतर पैसे उन्होंने कर्ज लेकर जुटाए थे। रॉबिन के पिता ने दुख जताते हुए कहा, “हमने अपने बेटे के लिए सब कुछ किया, लेकिन अब वो कहीं का नहीं रहा। हमें हमारा पैसा वापस मिलना चाहिए।”

जसविंदर सिंह की कहानी

पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के जसविंदर सिंह ने भी अमेरिका जाने के लिए 50 लाख रुपये खर्च किए थे। उनका परिवार जमीन गिरवी रखकर यह पैसा जुटाने में कामयाब हुआ था। जसविंदर सिंह 22 दिन पहले ही अमेरिका पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भी पकड़कर वापस भेज दिया गया। जसविंदर के चाचा करनैल सिंह ने बताया कि जसविंदर ने कहा था कि “कैंप में हमें खाने को कुछ नहीं दिया जाता था, केवल आधा सेब या जूस मिलता था।” जसविंदर का स्वास्थ्य अब खराब है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

संकट में भारतीय प्रवासी

इन सभी मामलों में जो सबसे बड़ा दर्दनाक पहलू है, वह है इन युवाओं की यात्राओं के दौरान हुई शारीरिक और मानसिक कठिनाइयां। उन्होंने अपनी सारी ज़िंदगी की जमा-पूंजी और परिवार का खर्चा लगा दिया, लेकिन अंत में उन्हें अपने ही देश वापस भेज दिया गया। इसके साथ ही, उनकी कोशिशों और संघर्षों के बावजूद उनका सपना अधूरा रह गया।

सरकार और एजेंटों की भूमिका

इस सब में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठता है कि आखिर क्यों इन युवाओं को धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा। उनके द्वारा दिए गए पैसे और संघर्ष के बावजूद एजेंटों ने उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं दिया, और न ही उन्हें उस प्रकार की सुरक्षा दी, जिसकी उन्हें जरूरत थी। कई मामलों में परिवारों ने एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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Iran Woman Naked Protest: ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन! महिला का नग्न होकर पुलिस वा...

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Iran Woman Naked Protest: ईरान में महिलाओं के लिए सख्त हिजाब नियमों और सामाजिक नियंत्रण के खिलाफ विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर, मशहद में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब एक महिला ने पूरी तरह से नग्न होकर पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया। यह घटना ईरान में महिलाओं के अधिकारों और हिजाब कानून के खिलाफ चल रहे व्यापक विरोध का हिस्सा बन गई है, जो कि पिछले कुछ सालों से लगातार समाज में हलचल पैदा कर रहा है।

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घटना का विवरण- Iran Woman Naked Protest

यह घटना 14 मई 2023 को मशहद शहर में हुई। महिला पहले पुलिस की गाड़ी के सामने खड़ी हुई, फिर अचानक उसने अपने कपड़े उतारे और नग्न होकर गाड़ी के बोनट पर चढ़ गई। महिला ने वहां विरोध किया और चिल्लाते हुए गाड़ी की विंडशील्ड पर बैठ गई। इस दौरान, आसपास कुछ लोग हथियारों के साथ नजर आए, और महिला के आसपास का माहौल तनावपूर्ण था। हालांकि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें महिला की यह विरोध-प्रदर्शन करते हुए दिखाई दे रही है।

महिला का उद्देश्य

स्थानीय मीडिया के अनुसार, महिला का पति होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि उसे अब इलाज के लिए ले जाया गया है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया कि महिला ने सड़क पर नग्न प्रदर्शन क्यों किया। हालांकि, सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि वह महिलाओं के लिए देश के सख्त ड्रेस कोड और हिजाब नियमों का विरोध कर रही थी। यह महिला ईरान में महिलाओं के अधिकारों की सख्ती से निगरानी करने वाले कानूनों के खिलाफ अपनी आवाज उठा रही थी।

ईरान में विरोध के स्वर

ईरान में महिलाओं के खिलाफ सामाजिक और धार्मिक प्रतिबंधों के विरोध में पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। 2022 में महसा अमीनी नाम की एक 22 वर्षीय युवती को हिजाब कानून के उल्लंघन के आरोप में पुलिस हिरासत में लिया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। महसा की मौत के बाद पूरे ईरान में महिलाएं हिजाब कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर आई थीं और कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन चलता रहा। सरकार ने बलपूर्वक दमन की कार्रवाई की, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया और उन पर अत्याचार किया गया।

इस नग्न प्रदर्शन ने महिलाओं के हिजाब विरोधी आंदोलन में और भी इजाफा किया है। इस विरोध का उद्देश्य केवल हिजाब पर प्रतिबंध को हटाना नहीं बल्कि महिलाओं के अधिकारों को बहाल करना भी था। यह घटना महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में एक और कदम है, जो अब पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर रही है।

ईरान के हिजाब कानून

ईरान में महिलाओं पर लगने वाले कड़े प्रतिबंधों के कारण, महिलाओं को हिजाब पहनने की अनिवार्यता का सामना करना पड़ता है। 2022 में एक नया विधेयक पास किया गया था, जिसमें यह बताया गया था कि यदि कोई महिला सार्वजनिक रूप से हिजाब पहनने के नियमों का उल्लंघन करती है तो उसे बिना किसी पूछताछ के गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, महिलाओं को सख्त दंड का भी सामना करना पड़ता है।

हालांकि, दिसंबर 2022 में सरकार ने हिजाब कानून के कड़े प्रावधानों पर रोक लगाई थी, लेकिन महिलाओं का विरोध अभी भी जारी है।

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Sikhism in Fiji: फिजी में सिख समुदाय का ऐतिहासिक योगदान! कृषि, पुलिस सेवा, शिक्षा और ...

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Sikhism in Fiji: फिजी में सिख समुदाय का इतिहास और योगदान एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू है, जिसे अक्सर अन्य दक्षिण एशियाई समुदायों के संदर्भ में ही देखा जाता है। फिजी में सिखों का आगमन मुख्य रूप से स्वतंत्र प्रवासियों के रूप में हुआ था, जबकि अधिकांश भारतीय आबादी के पूर्वज 1879 से 1916 के बीच फिजी में लाए गए थे, जब वे भारतीय श्रमिकों के रूप में यहाँ आए थे। फिजी में सिखों की संख्या लगभग 3,600 है, और यह समुदाय फिजी के कृषि, पुलिस सेवा, और शिक्षा में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।

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फिजी में सिखों का आगमन- Sikhism in Fiji

फिजी में सिखों का आगमन स्वतंत्र प्रवासियों के रूप में 1904 से 1930 के बीच हुआ था। सबसे पहले 70 पंजाबी सिखों का एक समूह न्यू कैलिडोनिया गया था, लेकिन वहां की खराब परिस्थितियों के कारण ये लोग फिजी आ गए। इन प्रवासियों में अधिकांश लोग पंजाब के जुल्लुंदर और होशियारपुर जिलों से थे। इन्हें उच्च वेतन की उम्मीद के साथ फिजी लाया गया था, लेकिन बाद में बहुत से लोग असंतुष्ट होकर भारत लौट गए।

Sikhism in Fiji Gurudvara
source: google

सिख प्रवासियों के लिए फिजी एक दूसरे विकल्प के रूप में आया, क्योंकि उस समय कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दक्षिण एशियाई प्रवासियों पर प्रतिबंध लग रहे थे। इसके बाद, सिखों की बड़ी संख्या 1918 से 1930 के बीच फिजी आई, और उन्होंने मुख्य रूप से कृषि कार्य में अपने कदम जमाए।

सिखों का योगदान

सिख समुदाय ने फिजी में कई क्षेत्रों में अपना योगदान दिया, खासकर कृषि और पुलिस सेवा में। फिजी पुलिस में सिखों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, और वे भारत से विशेष रूप से हांगकांग और शंघाई से भर्ती किए गए थे। 1900 के दशक की शुरुआत में, सिख पुलिसकर्मी फिजी में आए और उन्होंने वहां की पुलिस सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे भ्रष्टाचार से दूर रहे और एक अनुशासित पुलिस बल के रूप में जाने गए।

सिख एजुकेशनल सोसाइटी की स्थापना और सामाजिक योगदान

1960 में सिख एजुकेशनल सोसाइटी की स्थापना की गई थी, जिसका उद्देश्य फिजी में शिक्षा से जुड़ी सभी गतिविधियों का संचालन करना था। वहीं, फिजी सिख एसोसिएशन धार्मिक और सामुदायिक मामलों पर ध्यान केंद्रित करता है। सिख समुदाय ने फिजी में कई गुरुद्वारे और शिक्षा संस्थाएं स्थापित की हैं, जैसे कि सुवा, नासिनु, लाउतोका, बा और लाबासा में गुरुद्वारे हैं। सुवा गुरुद्वारा, जिसे 1922 में स्थापित किया गया, सबसे पुराना है। इसके बाद, 1939 में नासिनु में श्री गुरु रविदास गुरुद्वारा स्थापित किया गया, जो भारत से बाहर स्थापित पहला गुरुद्वारा था।

Sikhism in Fiji Gurudvara
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इसके अलावा, फिजी में खालसा नामक कई दुकानें, रेस्टोरेंट्स और यहां तक कि सड़कें भी हैं, जो सिख समुदाय की उपस्थिति को और मजबूत करती हैं।

सिखों की वर्तमान स्थिति और प्रवास

फिजी में सिख समुदाय की संख्या लगभग 4,000 है, जो कभी 10,000 के करीब थी, लेकिन बेहतर अवसरों के लिए कई सिखों ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और कनाडा में प्रवास किया। हालांकि, जो लोग फिजी में रह गए हैं, वे मेहनती, ईमानदार और समर्पित नागरिक बने हुए हैं। उन्होंने फिजी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, खासकर कृषि क्षेत्र में। 1984 में खालसा कॉलेज और खालसा प्राइमरी स्कूल के रजत जयंती समारोह में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री रतु टोगनिवालू ने फिजी के सिख समुदाय को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया और कहा था कि सिख समुदाय इस देश में कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और उन्होंने फिजी की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया है।

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Raj Kumar Rao Net Worth: राजकुमार राव ने खोला अपनी माली हालत का राज, बोले- “इतन...

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Raj Kumar Rao Net Worth: बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता राजकुमार राव, जिन्होंने 2010 में फिल्म ‘लव सेक्स और धोखा’ से अपने करियर की शुरुआत की थी, आज एक बड़े स्टार बन चुके हैं। ‘स्त्री 2’ जैसी हिट फिल्मों से उन्होंने साबित कर दिया कि वे बॉलीवुड के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में से एक हैं। इस साल, ‘स्त्री 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर 453.60 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया, और उनके पास आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। इन सफलता की कहानियों के बीच, राजकुमार राव ने हाल ही में अपनी माली हालत पर एक पुरानी बातचीत के दौरान खुलकर बात की, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

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राजकुमार राव ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि लोग उनके बारे में जितना समझते हैं, उतना पैसा उनके पास नहीं है। यह बयान उन्होंने ‘UNFILTERED by Samdish’ शो में सामदिश भाटिया के साथ बातचीत के दौरान दिया। इस शो में सामदिश ने उनसे उनकी कमाई के बारे में सवाल किया, जिस पर राजकुमार राव ने अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में खुलकर बात की।

राजकुमार राव ने खुलासा किया कि वे आर्थिक रूप से सुरक्षित हैं, लेकिन … Raj Kumar Rao Net Worth

राजकुमार राव ने अपनी स्थिति के बारे में कहा, “यार, इतना पैसा नहीं है जितना लोग सोचते हैं। EMI चल रही है, मैंने घर लिया है और उसकी अच्छी-खासी EMI जा रही है। ऐसा नहीं है कि बिल्कुल पैसा नहीं है, लेकिन इतना भी नहीं कि जब मन किया, कुछ भी खरीद लिया।” उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी चीज की कीमत 6 करोड़ रुपये हो, तो वे बिना सोचे उसे नहीं खरीद सकते। इसका मतलब यह नहीं कि उनके पास पैसे की कमी है, लेकिन उन्हें खर्च करने से पहले सोचने की आदत है।

 

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50 लाख रुपये तक खरीद सकते हैं, लेकिन …

सामदिश भाटिया ने मजाकिया अंदाज में पूछा, “अगर चीज 50 लाख रुपये की हो तो?” इस सवाल पर राजकुमार राव ने हंसते हुए जवाब दिया, “हां, 50 लाख की हो तो खरीद सकते हैं, लेकिन इस पर चर्चा जरूर होगी। 20 लाख रुपये की चीज हो तो बिना सोचे खरीद सकते हैं।” इस बातचीत ने बॉलीवुड सितारों की असल वित्तीय स्थिति को लेकर एक चर्चा को जन्म दिया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही है।

राजकुमार राव और पत्रलेखा का नया कदम: ‘KAMPA Films’

राजकुमार राव और उनकी पत्नी पत्रलेखा ने अपने करियर में एक नया कदम उठाया है। दोनों ने मिलकर अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस ‘KAMPA Films’ शुरू किया है। यह कदम उनके सिनेमा के प्रति गहरे इंटरेस्ट और कहानी कहने के जुनून को दर्शाता है। ‘KAMPA Films’ का नाम किसी मशहूर प्रोडक्शन हाउस की तरह उनके नाम पर नहीं रखा गया, बल्कि यह नाम उनके माता-पिता को समर्पित है और उनके नामों के शुरुआती अक्षरों से बना है।

 

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इस प्रोडक्शन हाउस के माध्यम से राजकुमार राव और पत्रलेखा अपनी पसंद की कहानियों को बड़े पर्दे पर लाने का लक्ष्य रखते हैं। इस नए प्रयास से वे न केवल फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपने कदम और मजबूत करना चाहते हैं, बल्कि बॉलीवुड में अपनी छाप छोड़ने के लिए एक नया रास्ता भी खोलना चाहते हैं।

राजकुमार राव की सफलता उनके कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने यह साबित किया है कि सच्ची सफलता सिर्फ नाम और प्रसिद्धि तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह असल जीवन की समझ और संतुलन बनाए रखने की भी जरूरत होती है। उनकी माली हालत के बारे में दिया गया बयान यह दिखाता है कि स्टार्स भी अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में सोच-समझ कर निर्णय लेते हैं। साथ ही, राजकुमार राव और पत्रलेखा का प्रोडक्शन हाउस एक नई दिशा में फिल्म उद्योग के लिए एक और कदम साबित हो सकता है।

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Premanand Maharaj Health News: प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए बंद, स...

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Premanand Maharaj Health News: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा अब अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई है। खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने यह निर्णय लिया है, जो उनके भक्तों के लिए एक बड़े सदमे के रूप में सामने आया है। इस संबंध में इंस्टाग्राम पर उनके शिष्यों ने आधिकारिक अकाउंट पर जानकारी शेयर की है। प्रेमानंद महाराज की तबीयत पिछले महीने बिगड़ी थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, कुछ समय बाद उनका स्वास्थ्य बेहतर हुआ और उन्होंने अपनी पदयात्रा फिर से शुरू की थी, लेकिन अब फिर से इसे बंद करने का निर्णय लिया गया है।

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पदयात्रा के दौरान बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य समस्याएं- Premanand Maharaj Health News

प्रेमानंद महाराज, जो वृंदावन में श्री हित राधा केली कुंज की ओर तड़के 2 बजे पदयात्रा करते हुए भक्तों को दर्शन देते थे, अब यह अवसर भक्तों के लिए उपलब्ध नहीं होगा। इस दौरान, सड़क के दोनों ओर लाखों की संख्या में भक्त खड़े होते थे, जो महाराज जी के दर्शन करने के लिए बेताब रहते थे। पदयात्रा के दौरान भक्तों की बढ़ती संख्या भी एक कारण बनी, जिसे महाराज जी के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना गया। उनके शिष्यों ने इंस्टाग्राम अकाउंट “भजनमार्ग ऑफिशियल” पर एक नोट शेयर करते हुए बताया कि पदयात्रा को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। इसके बाद से भक्तों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करना शुरू कर दिया है।

प्रेमानंद महाराज की किडनी की बीमारी

प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनी कई साल पहले ही फेल हो चुकी हैं और वे डायलिसिस पर हैं। इस बारे में एक भक्त के सवाल पर महाराज जी ने खुद बताया था कि उन्हें किडनी की समस्या के कारण ज्यादा पानी पीने की भी अनुमति नहीं है। डायलिसिस हर सप्ताह किया जाता है और डॉक्टर उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। यह बीमारी और डायलिसिस की प्रक्रिया प्रेमानंद महाराज के जीवन को चुनौतीपूर्ण बनाती है, फिर भी वे हमेशा अपने भक्तों के बीच खुश और सकारात्मक दिखाई देते हैं।

ऑटोसोमल डोमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रेमानंद महाराज ऑटोसोमल डोमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज से जूझ रहे हैं, जो एक ऐसी बीमारी है जो माता-पिता से बच्चों में आती है। इस बीमारी में किडनी का साइज नॉर्मल से बड़ा हो जाता है और इसके परिणामस्वरूप किडनी में पानी जमा होने लगता है। समय के साथ, यह पानी किडनी के काम करने की क्षमता को प्रभावित करता है। प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनी लगभग 19 वर्षों से खराब हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हमेशा अपनी श्रद्धालुओं के लिए मुस्कान बनाए रखी। उनके भक्त इसे राधा रानी का चमत्कार मानते हैं कि वे इस बीमारी के बावजूद भी हमेशा खुश रहते हैं।

भक्तों का दुख और प्रार्थना

प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा और उनके दर्शन के लिए लाखों भक्त रोजाना वृंदावन पहुंचते थे। हालांकि, अब भक्तों के लिए उनके दर्शन का यह अवसर बंद हो गया है। लोग महाराज जी के स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हैं और उन्हें जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। यह निर्णय निश्चित रूप से उनके भक्तों के लिए एक कठिन समय है, क्योंकि उन्हें संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन का यह नियमित अवसर अब नहीं मिलेगा।

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