Home Blog Page 40

Punjab Politics: AAP में बढ़ता असंतोष! भगवंत मान पूरी कैबिनेट के साथ पहुंचे दिल्ली, क...

0

Punjab Politics: पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर बढ़ते असंतोष और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान अपनी पूरी कैबिनेट के साथ दिल्ली पहुंच चुके हैं। AAP के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया है, जो दिल्ली स्थित कपूरथला हाउस में होगी।

और पढ़ें: Delhi Secretariat Sealed: बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, AAP को करारी हार, प्रशासन ने दिल्ली सचिवालय को किया सील

इस बैठक को लेकर कई राजनीतिक अटकलें तेज़ हो गई हैं। कांग्रेस ने दावा किया है कि अरविंद केजरीवाल भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद से हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बैठक के मद्देनजर भगवंत मान ने 10 फरवरी को होने वाली पंजाब कैबिनेट की बैठक स्थगित कर दी थी, जो अब 13 फरवरी को होगी।

क्या पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी? (Punjab Politics)

AAP के पंजाब प्रमुख अमन अरोड़ा के हालिया बयान ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। उन्होंने कहा था कि “जो व्यक्ति डिजर्व करता है, उसे जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।” उन्होंने तर्क दिया कि देश में महज़ 2% सिखों की आबादी होने के बावजूद डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने, तो किसी ने आपत्ति नहीं जताई, तो फिर पंजाब में 38% हिंदू आबादी के बावजूद यह सवाल क्यों उठाया जा रहा है?

विपक्षी दल कांग्रेस इस बयान को नेतृत्व परिवर्तन की भूमिका बता रही है। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने तो यहां तक दावा किया कि उनके संपर्क में AAP के 30 विधायक हैं और जल्द ही अरविंद केजरीवाल खुद पंजाब के मुख्यमंत्री बनने की योजना बना रहे हैं। बाजवा ने कहा कि लुधियाना वेस्ट के विधायक गुरप्रीत गोगी के निधन से खाली हुई सीट से केजरीवाल उपचुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में हार के बाद अब आम आदमी पार्टी पूरी तरह से पंजाब पर निर्भर हो गई है और पार्टी में अंदरुनी कलह तेज़ हो सकती है।

AAP का पलटवार: “यह एक रूटीन मीटिंग”

AAP सांसद मालविंदर कंग और प्रवक्ता नील गर्ग ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह एक रूटीन मीटिंग है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं और ऐसी बैठकें पार्टी की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि “जिनके अपने विधायक उनसे दूर हैं, वे हमारे 30 विधायकों के संपर्क में होने का दावा कर रहे हैं।”

प्रवक्ता नील गर्ग ने यह भी कहा कि पंजाब के विधायकों और मंत्रियों ने दिल्ली चुनाव में प्रचार किया था, इसलिए अब पार्टी उनसे फीडबैक ले रही है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी की यह मर्जी है कि बैठक चंडीगढ़ में हो या दिल्ली में।

दिल्ली की हार के बाद पंजाब पर फोकस

AAP के लिए पंजाब अब और भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि दिल्ली नगर निगम चुनावों में हार के बाद केजरीवाल की पार्टी को बड़ा झटका लगा है। हरियाणा में पार्टी का खाता भी नहीं खुला था और गुजरात में दूसरे नंबर पर आने के बावजूद जीत नहीं मिली थी। ऐसे में पंजाब अब पार्टी का प्रमुख राजनीतिक केंद्र बनता जा रहा है।

AAP के लिए सबसे बड़ी चुनौती 2027 के विधानसभा चुनाव हैं, क्योंकि पार्टी अभी तक अपने बड़े चुनावी वादों को पूरा नहीं कर पाई है। अगर पार्टी पंजाब में अपना जनाधार खो देती है, तो उसकी राष्ट्रीय राजनीति पर भी बड़ा असर पड़ेगा।

कांग्रेस को मध्यावधि चुनाव की आशंका

दिल्ली में AAP को हुए नुकसान से कांग्रेस उत्साहित है। पार्टी का दावा है कि पंजाब में भी आम आदमी पार्टी का यही हश्र होगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि दिल्ली की तरह ही पंजाब में भी शराब नीति में घोटाला सामने आएगा और पार्टी में बिखराव होगा।

इसके अलावा, हाल ही में धान खरीद में एमएसपी घोटाले के आरोपों ने भी AAP सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस का कहना है कि केजरीवाल का पंजाब सरकार में सीधा दखल पार्टी के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है और इससे विधायक बगावत कर सकते हैं। कांग्रेस के मुताबिक, पंजाब में अस्थिरता को देखते हुए समय से पहले चुनाव भी हो सकते हैं।

और पढ़ें: Delhi Assembly Elections BJP wins: बीजेपी ने बहुमत हासिल किया, केजरीवाल और सिसोदिया चुनाव हारे

Ranveer Allahbadia Samay Raina Controversy: समय रैना के शो में रणवीर अल्लाहबादिया ने ...

0

Ranveer Allahbadia Samay Raina Controversy: यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी को लेकर अक्सर बहस छिड़ती रहती है। हाल ही में स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना के शो India’s Got Latent एक बार फिर विवादों में घिर गया है। शो में मशहूर यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया उर्फ BeerBiceps ने ऐसा कुछ कह दिया, जिस पर सोशल मीडिया पर जमकर हंगामा मच गया। वहीं, इसी शो को लेकर कुछ दिन पहले एक अन्य एपिसोड में अरुणाचल प्रदेश की कंटेस्टेंट जेसी नबाम (Jessy Nabam) के बयान ने भी बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था।

और पढ़ें: Mamata Kulkarni News: ममता कुलकर्णी का सलमान खान और शाहरुख खान पर खुलासा, बताया कैसे सलमान ने मुंह पर बंद किया दरवाजा

क्या कहा रणवीर अल्लाहबादिया ने? (Ranveer Allahbadia Samay Raina Controversy)

India’s Got Latent के हालिया एपिसोड में रणवीर अल्लाहबादिया के साथ यूट्यूबर आशीष चंचलानी और कंटेंट क्रिएटर अपूर्व मुखीजा मौजूद थे। इस दौरान रणवीर ने एक प्रतियोगी से ऐसा सवाल पूछ लिया, जिसने सभी को चौंका दिया। उन्होंने पूछा:

“क्या आप अपने माता-पिता को पूरी जिंदगी हर दिन सेक्स करते देखना पसंद करेंगे, या फिर एक बार उसमें शामिल होकर इसे हमेशा के लिए बंद कर देंगे?”

रणवीर का यह सवाल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, और इसके बाद लोगों ने उन्हें जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

रणवीर अल्लाहबादिया के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स ने इसे बेहद अश्लील और शर्मनाक बताया। एक यूजर ने गुस्से में कहा,

“यह घृणित से भी परे है। कोई इतनी घिनौनी बात के बारे में सोच भी कैसे सकता है? यह परेशान करने वाला, घिनौना और बेहद शर्मनाक है। जो कोई भी इस पर हंस रहा है, उसे अपनी नैतिकता पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। इन बीमार दिमागों को सलाखों के पीछे डाल देना चाहिए।”

एक अन्य यूजर ने लिखा,

“यह हमारे लिए शर्म की बात है कि समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया जैसे लोग हमारे समाज में फल-फूल रहे हैं। जो युवा इनको फॉलो करते हैं, उन्हें अपने आदर्श सोच-समझकर चुनने चाहिए। हमें अपने समाज में अच्छे कंटेंट को बढ़ावा देना होगा।”

समय रैना भी आलोचना के घेरे में

लोगों का गुस्सा सिर्फ रणवीर अल्लाहबादिया पर ही नहीं, बल्कि शो के होस्ट समय रैना पर भी निकला। कई यूजर्स का कहना है कि समय रैना के इस शो में खुलेआम फूहड़ता परोसी जाती है और इसका स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यही वजह है कि अब सोशल मीडिया पर शो को बंद करने की मांग उठ रही है।

अरुणाचल प्रदेश में विवाद, पुलिस में दर्ज हुई शिकायत

जेसी नबाम के इस बयान को लेकर अरुणाचल प्रदेश में नाराजगी फैल गई। 31 जनवरी को ईटानगर पुलिस स्टेशन में इस मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई।

यह शिकायत अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी कामेंग जिले के रहने वाले अरमान राम वेली बखा (Armaan Ram Welly Bakha) ने दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को लिखे अपने पत्र में कहा कि,

“जेसी ने India’s Got Latent में अरुणाचल प्रदेश के लोगों के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी की है। इस मामले में तुरंत एक्शन लिया जाए ताकि आगे से कोई भी जेसी की तरह हरकत न करे।”

Ranveer Allahbadia Samay Raina Controversy
source: google

शिकायत के अनुसार, इस एपिसोड में जज के तौर पर समय रैना के साथ कॉमेडियन आकाश गुप्ता और मल्लिक दुआ भी मौजूद थे।

समय रैना और रणवीर पर कार्रवाई की मांग

अब सोशल मीडिया पर समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है। कई लोग समय रैना के शो को बंद करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि रणवीर को मिले सरकारी अवॉर्ड्स भी वापस लिए जाने चाहिए।

पीएम मोदी का दिया अवॉर्ड होगा वापस?

इस विवाद के बाद अब सोशल मीडिया पर एक और मांग उठ रही है कि रणवीर अल्लाहबादिया से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया बेस्ट क्रिएटर का अवॉर्ड वापस लिया जाए। कुछ लोग तो इस मामले में एफआईआर दर्ज करने तक की मांग कर रहे हैं।

गौरव तनेजा और अन्य यूट्यूबर्स की प्रतिक्रिया

मशहूर यूट्यूबर गौरव तनेजा (Flying Beast) ने भी इस मामले पर अपनी राय रखते हुए समय रैना और उनके शो की कड़ी आलोचना की। उन्होंने X (ट्विटर) पर लिखा,

“लगता है कि समय रैना पूरे यूट्यूब इंडिया को ही बैन करवाकर मानेगा।”

इसके अलावा, कई अन्य कंटेंट क्रिएटर्स ने भी इस बयान की निंदा की है और इसे बेहद आपत्तिजनक बताया है।

क्या रणवीर या समय ने दी कोई सफाई?

अब तक इस विवाद पर न तो रणवीर अल्लाहबादिया और न ही समय रैना की कोई प्रतिक्रिया आई है। दोनों ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। हालांकि, सोशल मीडिया पर गुस्सा बढ़ता जा रहा है और लोग इन दोनों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

रणवीर अल्लाहबादिया के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर कंटेंट क्रिएटर्स को किस हद तक आज़ादी दी जानी चाहिए। क्या बोलने की आज़ादी के नाम पर इस तरह की अभद्रता को नज़रअंदाज किया जाना चाहिए, या फिर ऐसे कंटेंट पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, और देखना होगा कि रणवीर और समय इस पर क्या सफाई देते हैं।

और पढ़ें: Raj Kumar Rao Net Worth: राजकुमार राव ने खोला अपनी माली हालत का राज, बोले- “इतना पैसा नहीं है जितना लोग सोचते हैं”

Alabama execution: नाइट्रोजन गैस से फांसी! सबसे खूंखार जेल का फैसला, 1991 के कातिल की...

0

Alabama execution: अलबामा, अमेरिका की सबसे खतरनाक और चर्चित जेलों में से एक मानी जाती है। यहां के कठोर प्रबंधन और बंदियों पर किए गए अत्याचार अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं। इसी संदर्भ में, अलबामा में एक नया मामला सामने आया है, जिसमें 52 वर्षीय डेमेट्रियस टेरेंस फ्रेजियर को नाइट्रोजन गैस के जरिए फांसी देने की तैयारी की जा रही है। फ्रेजियर को 1991 में पॉलीन ब्राउन की हत्या का दोषी ठहराया गया था और उस पर आरोप था कि उसने बर्मिंघम स्थित ब्राउन के अपार्टमेंट में घुसकर न केवल बलात्कार किया, बल्कि गोली मारकर हत्या कर दी थी।

और पढ़ें: Trump statement on Canada: कनाडा पर ट्रंप की नजर! क्या अमेरिका का 51वां राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है देश?

नाइट्रोजन गैस के जरिए फांसी: एक नया तरीका- Alabama execution

अलबामा में यह फांसी नाइट्रोजन गैस के जरिए दी जाएगी। इस प्रक्रिया में, दोषी को एक मास्क पहनाया जाता है, जो उसकी सांस लेने वाली हवा को पूरी तरह से नाइट्रोजन गैस से बदल देता है। इसका परिणाम यह होता है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। यह तरीका 2025 की तीसरी और अलबामा की पहली फांसी होगी, जिसे नाइट्रोजन गैस से अंजाम दिया जाएगा। इससे पहले, 2024 में अलबामा पहला राज्य बना था, जिसने नाइट्रोजन गैस से फांसी दी थी, जब तीन कैदियों को इस तरीके से मौत की सजा दी गई थी।

Alabama execution America
Source: Google

फ्रेजियर की मां की अपील

इस बीच, फ्रेजियर की मां, कैरल फ्रेजियर, और मृत्युदंड विरोधी संगठन इस सजा को रोकने के लिए पहल कर रहे हैं। कैरल ने एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने गवर्नर ग्रेचेन व्हिटमर से अपील की है कि वे उनके बेटे की सजा को रोकें। उन्होंने कहा है कि उनका बेटा बदल चुका है और उसने अपने किए पर पश्चाताप किया है। वे चाहती हैं कि अलबामा उनके बेटे को न मारे। हालांकि, अब तक मिशिगन सरकार की ओर से इस अपील पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। मिशिगन राज्य में मृत्युदंड की सजा नहीं है, और वहां के अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने अदालत में यह स्पष्ट किया है कि वे फ्रेजियर को वापस लेने के इच्छुक नहीं हैं।

विभिन्न हत्याओं का दोषी फ्रेजियर

डेमेट्रियस फ्रेजियर पर न केवल ब्राउन की हत्या का आरोप था, बल्कि उन्होंने 1991 में अलबामा और 1992 में मिशिगन में अलग-अलग हत्याओं को अंजाम दिया था। मिशिगन में, उन्होंने 14 वर्षीय क्रिस्टल केंड्रिक की हत्या की थी, जिसके लिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। वहीं, अलबामा में ब्राउन की हत्या के जुर्म में उसे 1996 में मौत की सजा दी गई थी। हालांकि, इस फैसले में 10-2 का विभाजन था, जबकि अब अधिकांश अमेरिकी राज्यों में मृत्युदंड के लिए सर्वसम्मति आवश्यक होती है।

Alabama execution America
Source: Google

नाइट्रोजन गैस के जरिए मौत: एक विवादित प्रक्रिया

नाइट्रोजन गैस के जरिए दी जाने वाली फांसी को लेकर कई विवाद उठ चुके हैं। वकीलों ने इस नई फांसी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, क्योंकि इससे पहले जिन कैदियों को इस विधि से मौत दी गई थी, वे तड़पते हुए दिखाई दिए थे। हालांकि, अदालत ने इस पर विचार करते हुए यह कहा कि यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि इस प्रक्रिया से किसी को असहनीय शारीरिक या मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। अदालत ने वकीलों की याचिका को खारिज कर दिया, और अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि अलबामा में इस फांसी का तरीका कैसा होगा और क्या यह प्रक्रिया दोषी के लिए अत्यधिक दर्दनाक होगी या नहीं।

और पढ़ें: Indians Deported From USA: 70 लाख से 80 लाख तक खर्च, 3 खतरनाक ‘डंकी रूट’ से भारतियों का अमेरिका पहुंचने का जोखिम

Indian immigrants deported from US: अपने नागरिकों के सम्मान के लिए कोलंबिया ने अमेरिक...

0

Indian immigrants deported from US: “उन्होंने हमें हथकड़ी पहनाई। हमें बताया गया कि वो हमें वेलकम सेंटर ले जा रहे हैं। लेकिन कुछ देर बाद हमारे सामने सेना का विमान खड़ा था।” यह बयान 18 वर्षीय ख़ुशप्रीत सिंह का है, जो अमेरिका से भारत वापस भेजे जाने के बाद कुरुक्षेत्र, हरियाणा पहुंचे।

और पढ़ें: Indians Deported From USA: 70 लाख से 80 लाख तक खर्च, 3 खतरनाक ‘डंकी रूट’ से भारतियों का अमेरिका पहुंचने का जोखिम

45 लाख रुपये की यात्रा, हथकड़ी में वापसी- Indian immigrants deported from US

छह महीने पहले, ख़ुशप्रीत सिंह ने अमेरिका में एक बेहतर भविष्य की उम्मीद में 45 लाख रुपये खर्च किए थे। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने उन्हें अवैध प्रवासी करार देते हुए वापस भेज दिया। ख़ुशप्रीत अकेले नहीं थे जिनका यह हश्र हुआ। बुधवार को 104 भारतीयों को एक अमेरिकी सैन्य विमान से भारत भेजा गया।

इनमें से अधिकांश भारतीयों की कहानी ख़ुशप्रीत से मिलती-जुलती थी। इन लोगों ने अमेरिका जाने के लिए बड़ी रकम खर्च की, लेकिन अंततः उन्हें हथकड़ी पहनाकर निर्वासित कर दिया गया।

भारतीय संसद में गूंजा मामला

भारतीयों के साथ इस व्यवहार को लेकर संसद में सवाल उठाए गए। कांग्रेस ने सवाल किया कि जब कोलंबिया जैसा छोटा देश अमेरिका को कड़ी प्रतिक्रिया दे सकता है, तो भारत सरकार क्यों नहीं?

कोलंबिया ने अपने नागरिकों के निर्वासन के तरीके का विरोध किया, जबकि भारत ने इसे एक पुरानी प्रक्रिया बताते हुए स्वीकार कर लिया। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो ने अपने नागरिकों को सैन्य विमानों में भेजे जाने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कोलंबिया के प्रवासियों को वापस लाने के लिए नागरिक विमानों की मांग की और उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करने की बात कही।

कोलंबिया का सख्त रुख़

जनवरी में जब अमेरिका ने कोलंबियाई नागरिकों को सैन्य विमानों से भेजा, तो राष्ट्रपति पेत्रो ने उन्हें अपने देश में उतरने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके नागरिकों को अपराधियों की तरह नहीं, बल्कि सम्मान के साथ लाया जाएगा।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोलंबिया के इस रवैये से नाराज़ हो गए और उन्होंने कोलंबिया से आयातित उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने की घोषणा कर दी।

बाद में व्हाइट हाउस और कोलंबिया सरकार के बीच एक समझौता हुआ, जिसमें कोलंबिया ने अपने प्रवासियों को वापस लाने के लिए अपने वायुसेना के विमान भेजे। पेत्रो ने कहा कि यह सुनिश्चित करेगा कि उनके नागरिकों का सम्मान बना रहे।

भारत की प्रतिक्रिया और सवाल

भारत में अमेरिकी कार्रवाई को लेकर जनता और विपक्षी दलों में नाराजगी देखी गई। जब अमेरिका ने निर्वासित भारतीयों की तस्वीरें जारी कीं, जिनमें वे हथकड़ियों और बेड़ियों में नज़र आए, तो यह मामला तूल पकड़ गया।

Indian immigrants deported from US
Source: Google

अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल के चीफ माइकल डब्ल्यू बैंक्स ने इन तस्वीरों के साथ एक पोस्ट में लिखा, “भारत के अवैध प्रवासियों को सफलतापूर्वक निर्वासित किया गया है। अगर आप अवैध रूप से आएंगे, तो इसी तरह वापस भेजे जाएंगे।”

कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “क्या यह व्यवहार मानवीय है या आतंकवादियों जैसा? भारत सरकार को अमेरिका से सख्त जवाब मांगना चाहिए।” आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने पूछा कि क्या भारत सरकार अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए खुद विमान भेजेगी?

भारत की कूटनीतिक नीति

सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने इस पूरे घटनाक्रम को भारत के लिए शर्मनाक करार दिया। उन्होंने लिखा कि जब मेक्सिको और कोलंबिया ने अपने नागरिकों को हथकड़ी पहनाकर लाने से इनकार कर दिया, तो भारत ने न केवल इस अपमान को स्वीकार किया, बल्कि इसे अमेरिका के साथ ‘मज़बूत सहयोग’ बताया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में बताया कि यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है और 2012 से ही लागू है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिका से लगातार बातचीत कर रहा है ताकि निर्वासित भारतीयों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए।

Indian immigrants deported from US
Source: Google

भारत और अमेरिका के संबंध

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और कोलंबिया की तुलना नहीं की जा सकती। भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली के प्रोफेसर मनन द्विवेदी के अनुसार, “भारत हमेशा अमेरिका के साथ अपने संबंध सुधारने पर ज़ोर देता है, जबकि कोलंबिया की सरकार वामपंथी झुकाव रखती है और अमेरिका के प्रति आक्रामक रुख़ अपना सकती है।”

जेएनयू की प्रोफेसर अपराजिता कश्यप के अनुसार, “भारत की नीति कोलंबिया से अलग है क्योंकि सामाजिक, राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियां भिन्न हैं। भारत अमेरिकी प्रतिक्रिया से बचना चाहता है और इसीलिए सधी हुई प्रतिक्रिया देता है।”

क्या भारत और कदम उठा सकता था?

कानूनी विशेषज्ञ डॉ. सूरत सिंह के अनुसार, “हथकड़ी और बेड़ियों में लाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन है। भारत सरकार को अमेरिका के साथ इस पर बातचीत करनी चाहिए थी। जबरदस्ती निर्वासित करने से बेहतर होता कि भारतीय नागरिकों को सम्मानजनक तरीके से वापस लाया जाता।”

भारतीय प्रवासियों का यह निर्वासन कई सवाल खड़े करता है। क्या भारत को अमेरिका के खिलाफ अधिक सख्त रुख़ अपनाना चाहिए था? क्या अपने नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए भारत को कोलंबिया की तरह जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए? ये वे प्रश्न हैं, जिनका जवाब आने वाले समय में भारत सरकार को देना होगा।

और पढ़ें: Trump statement on Canada: कनाडा पर ट्रंप की नजर! क्या अमेरिका का 51वां राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है देश?

Trump statement on Canada: कनाडा पर ट्रंप की नजर! क्या अमेरिका का 51वां राज्य बनने की...

0

Trump statement on Canada: डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद से कनाडा को लेकर उनकी टिप्पणियां सुर्खियों में बनी हुई हैं। ट्रंप ने कई मौकों पर यह कहा है कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। कनाडा ने इस बयान पर सार्वजनिक रूप से सख्त आपत्ति जताई है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं और इसे पूरी तरह नकार नहीं रहे हैं।

और पढ़ें: Indians Deported From USA: 70 लाख से 80 लाख तक खर्च, 3 खतरनाक ‘डंकी रूट’ से भारतियों का अमेरिका पहुंचने का जोखिम

बंद कमरे में ट्रूडो की टिप्पणी- Trump statement on Canada

टोरंटो स्टार अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक बंद कमरे में हुई बैठक में कहा कि ट्रंप की यह बात महज मजाक नहीं है, बल्कि इसमें कुछ सच्चाई हो सकती है। यह बैठक बिजनेस और लेबर नेताओं के साथ हो रही थी, जिसमें अमेरिका द्वारा कनाडाई उत्पादों पर प्रस्तावित टैरिफ का सामना करने के उपायों पर चर्चा की गई।

Trump statement on Canada America
source: google

बैठक के दौरान ट्रूडो ने गलती से लाउडस्पीकर में यह बयान दे दिया, जिसे मीडिया ने लपक लिया। ट्रूडो ने कहा, ‘वे (अमेरिका) हमारे संसाधनों और आर्थिक क्षमता से अच्छी तरह वाकिफ हैं और इसका लाभ उठाना चाहते हैं। ट्रंप के दिमाग में यह है कि ऐसा करने का सबसे आसान तरीका कनाडा को अमेरिका में शामिल कर लेना है, और यह एक सच्चाई है।’ एक सरकारी सूत्र ने इस बयान की पुष्टि की है।

ट्रंप की टैरिफ धमकी

ट्रंप ने चुनाव जीतते ही घोषणा की थी कि वे अमेरिका में आने वाले कनाडाई उत्पादों पर 25% का टैरिफ लगाएंगे। उन्होंने दावा किया कि कनाडा अपनी सीमा से अमेरिका में होने वाली ड्रग तस्करी और अवैध प्रवास को रोकने में विफल रहा है।

Trump statement on Canada America
source: google

इस धमकी के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री ने चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि भले ही कनाडा इन टैरिफ से खुद को बचाने में सफल हो जाए, लेकिन उसे अमेरिका के साथ दीर्घकालिक राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

कनाडा को मिली अस्थायी राहत

हालांकि, ट्रंप ने हाल ही में कनाडा को 30 दिनों की टैरिफ छूट देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कनाडा ने अमेरिका में फेंटेनाइल तस्करी पर नकेल कसने के प्रयास किए हैं, जिसके चलते यह रियायत दी जा रही है।

ट्रूडो का मानना है कि कनाडा की सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल अमेरिका को यह समझाना है कि वह ड्रग्स की सप्लाई को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में जब्त की गई फेंटेनाइल की कुल आपूर्ति का मात्र 0.2% ही कनाडा से आता है।

अगर ट्रंप ने टैरिफ लगाया तो…

बैठक के दौरान ट्रूडो ने बिजनेस और लेबर नेताओं से कहा कि यदि ट्रंप टैरिफ लगाते हैं, तो कनाडा भी उसी के अनुसार जवाब देगा। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका लक्ष्य हमेशा यही रहेगा कि टैरिफ को जल्द से जल्द हटाया जाए।

उन्होंने कहा, ‘हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि अगले चार सालों में हम किस तरह आगे बढ़ें, आर्थिक तरक्की करें और अमेरिका के साथ लंबे समय तक राजनीतिक परिस्थिति में किस प्रकार संतुलन बनाए रखें।’

और पढ़ें: US Immigration Row: जमीन बेचकर बेटे को भेजा, 6 महीने बाद अमेरिका से वापसी, पंजाब के इस गांव में सच्चाई का खुलासा

Delhi Secretariat Sealed: बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, AAP को करारी हार, प्रशासन ने दिल्ली...

0

Delhi Secretariat Sealed: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे लगभग स्पष्ट हो गए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP), जो पिछले 10 वर्षों से राजधानी की सत्ता पर काबिज थी, इस बार भारी हार का सामना कर रही है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दो दशक बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी लगभग तय मानी जा रही है।

और पढ़ें: Delhi Assembly Elections BJP wins: बीजेपी ने बहुमत हासिल किया, केजरीवाल और सिसोदिया चुनाव हारे

सत्ता परिवर्तन से पहले प्रशासन का बड़ा फैसला- Delhi Secretariat Sealed

चुनावी रुझानों में आम आदमी पार्टी की हार स्पष्ट होते ही, प्रशासन ने दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के माध्यम से एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत, सरकारी दस्तावेजों और डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सचिवालय को पूरी तरह से सील करने का निर्देश दिया गया है।

नोटिस में क्या कहा गया?

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि किसी भी सरकारी फाइल, दस्तावेज, कंप्यूटर हार्डवेयर आदि को बिना अनुमति के सचिवालय परिसर से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। आदेश में यह भी निर्देश दिया गया है कि सभी विभागों/कार्यालयों के ब्रांच इंचार्ज को यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने होंगे कि उनके सेक्शन/ब्रांच के अंतर्गत आने वाले सभी रिकॉर्ड्स, फाइल्स, दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक डाटा सुरक्षित रहें।

फाइल्स और दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर सख्ती

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि किसी भी प्रकार के महत्वपूर्ण दस्तावेज या सरकारी रिकॉर्ड चुनावी बदलाव के दौरान लीक या नष्ट न किए जाएं।

आसान शब्दों में कहें तो दिल्ली सचिवालय से किसी भी सरकारी दस्तावेज़, हार्डवेयर या अन्य महत्वपूर्ण सामान को बिना अनुमति बाहर ले जाने पर रोक लगा दी गई है। इसके लिए सभी विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं।

बीजेपी की ऐतिहासिक वापसी

इस चुनाव के नतीजों के साथ ही बीजेपी ने दिल्ली में अपनी ऐतिहासिक वापसी कर ली है। पार्टी समर्थकों में जबरदस्त उत्साह है और अब सभी की निगाहें नई सरकार के गठन पर टिकी हुई हैं।

आगे की राह

अब जब बीजेपी सत्ता में वापसी कर रही है, दिल्ली की जनता यह देखना चाहेगी कि उनकी प्रमुख चुनावी घोषणाएं और वादे कितनी तेजी से पूरे किए जाते हैं।

सरकार बनने के बाद पहली प्राथमिकताओं में दिल्ली की परिवहन व्यवस्था, जल संकट, प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छता जैसे मुद्दे रहेंगे। यह भी देखना दिलचस्प होगा कि आम आदमी पार्टी इस हार के बाद अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती है और आगे की राजनीति किस दिशा में जाती है।

और पढ़ें: Delhi Election Results 2025 live updates: 27 साल बाद सत्ता में लौटी भाजपा, अरविंद केजरीवाल से संदीप दीक्षित ने लिया बदला!

Delhi Assembly Elections BJP wins: बीजेपी ने बहुमत हासिल किया, केजरीवाल और सिसोदिया च...

0

Delhi Assembly Elections BJP wins: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना समाप्त हो चुकी है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बहुमत हासिल कर लिया है। यह 27 साल बाद दिल्ली में बीजेपी की ऐतिहासिक वापसी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के कई बड़े नेता हार चुके हैं, जिससे पार्टी को बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी अपनी सीटें गंवा चुके हैं।

और पढ़ें: Delhi Election Results 2025 live updates: अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया हार गए अपनी सीट, AAP साफ!

नई दिल्ली सीट से केजरीवाल की हार- Delhi Assembly Elections BJP wins

दिल्ली की सबसे हॉट नई दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल की हार हो गई है। यहां से बीजेपी के प्रवेश वर्मा ने जीत दर्ज की है।

Delhi Assembly Elections   AAP
Source- Nedrick News

जंगपुरा सीट से मनीष सिसोदिया 675 वोटों से हारे

जंगपुरा सीट से आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया 675 वोटों से हार गए हैं। यहां से बीजेपी के तरविंदर सिंह ने जीत दर्ज की है। उधर, भारत नगर मतगणना केंद्र के बाहर बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया।

आतिशी ने रमेश बिधूड़ी को हराया

कालकाजी सीट से आम आदमी पार्टी की आतिशी जीत गई हैं। यहां से बीजेपी के रमेश बिधूड़ी को हार का सामना करना पड़ा। वहीं, कस्तूरबा नगर से बीजेपी के नीरज बसोया विजयी हुए हैं।

हार के बाद क्या बोले मनीष सिसोदिया?

जंगपुरा सीट से हारने के बाद मनीष सिसोदिया ने कहा, “हम सब कार्यकर्ताओं ने मेहनत से चुनाव लड़ा। जंगपुरा के लोगों ने भी बहुत प्यार दिया, लेकिन हम 600 वोटों से पीछे रह गए। मैं बीजेपी कैंडिडेट को बधाई देता हूं और उम्मीद करता हूं कि वो जनता की सेवा करेंगे। हमसे कहां चूक हुई, इसका विश्लेषण किया जाएगा।”

सियासी हलचल तेज, संजय सिंह और राहुल गांधी सक्रिय

चुनावी नतीजों के बीच आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर पहुंचे हैं, जबकि कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 10 जनपथ स्थित सोनिया गांधी के निवास पहुंचे हैं। इन मुलाकातों को चुनावी नतीजों के बाद की रणनीति बनाने के रूप में देखा जा रहा है।

AAP और कांग्रेस की स्थिति

AAP को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है, जहां कई बड़े नेता अपनी सीट बचाने में असफल रहे। कांग्रेस केवल एक सीट पर जीत हासिल कर पाई, जिससे उसकी स्थिति और भी कमजोर हो गई है।

मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

5 फरवरी को हुए मतदान में दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए 60.54% वोटिंग दर्ज की गई थी। मतगणना के लिए राजधानी के 19 मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रत्येक केंद्र पर अर्धसैनिक बलों की दो कंपनियां तैनात की गई थीं, जिससे निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतगणना सुनिश्चित की जा सके।

Delhi Elections Result Delhi Assembly Election
source: google

बीजेपी की शानदार जीत, कई बड़े नेता विजयी

अब तक के परिणामों के अनुसार, बीजेपी के कई प्रत्याशी बड़ी बढ़त के साथ जीत चुके हैं।

मुस्लिम बहुल क्षेत्र में भी बीजेपी की शानदार जीत

बीजेपी ने इस बार मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी मजबूत प्रदर्शन किया है। मुस्तफाबाद से मोहन बिष्ट ने 42,069 वोटों से जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 69,308 वोट मिले, जबकि आप के आदिल अहमद खान को 27,239 वोट और एआईएमआईएम के ताहिर हुसैन को 6,676 वोट मिले।

बीजेपी के विजयी प्रत्याशी:

  1. रिठाला – कुलवंत राणा ने 18,148 वोटों से जीत दर्ज की।
  2. बवाना – रविंदर इंद्र जे सिंह ने 12,143 वोटों से जीत दर्ज की।
  3. शालीमारबाग – रेखा गुप्ता ने 14,146 वोटों से जीत दर्ज की।
  4. जनकपुरी – आशीष सूद ने 10,596 वोटों से जीत दर्ज की।
  5. नजफगढ़ – नीलम पहलवान ने 12,681 वोटों से जीत दर्ज की।
  6. पटपड़गंज – रविंद्र सिंह नेगी (रवि नेगी) ने 11,989 वोटों से जीत दर्ज की।
  7. विश्वास नगर – ओम प्रकाश शर्मा ने 13,756 वोटों से जीत दर्ज की।
  8. घोंडा – अजय महावर ने 13,741 वोटों से जीत दर्ज की।
  9. मुस्तफाबाद – मोहन सिंह बिष्ट ने 36,685 वोटों से जीत दर्ज की।
  10. करावलनगर – कपिल मिश्रा ने 20,351 वोटों से जीत दर्ज की।

बीजेपी की ऐतिहासिक वापसी

इस जीत के साथ, बीजेपी 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में लौट आई है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। अब सबकी नजरें नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर टिकी हैं।

और पढ़ें: Delhi Assembly Elections 2025: शुरुआती रुझानों में बीजेपी आगे, उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस और AAP पर साधा निशाना

Delhi Assembly Elections 2025: शुरुआती रुझानों में बीजेपी आगे, उमर अब्दुल्ला ने कांग्...

0

Delhi Assembly Elections 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आम आदमी पार्टी (AAP) से आगे निकलती दिख रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नई दिल्ली सीट पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बीजेपी के प्रवेश वर्मा और कांग्रेस के संदीप दीक्षित से टक्कर ले रहे हैं। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस और AAP पर निशाना साधा है।

और पढ़ें: Constable Pankaj Sharma Delhi election: बाटला हाउस एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मी को कितने वोट मिले? जानें क्या केजरीवाल को दे रहे हैं टक्कर?

उमर अब्दुल्ला का तंज- Delhi Assembly Elections 2025

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस और AAP पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक मीम साझा किया। उन्होंने लिखा, “और लड़ो आपस में! जी भरकर लड़ो और समाप्त कर दो एक-दूसरे को।” उनका यह बयान कांग्रेस और AAP के अलग-अलग चुनाव लड़ने के फैसले पर कटाक्ष माना जा रहा है।

EVM विवाद पर उमर अब्दुल्ला का बयान

इससे पहले, जब कांग्रेस ने हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हार के बाद EVM पर सवाल उठाए थे, तब उमर अब्दुल्ला ने इसे खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि जब राजनीतिक दल चुनाव जीतते हैं, तो वे EVM की तारीफ करते हैं, लेकिन हारने पर इसे दोषी ठहराते हैं।

संजय राउत का बयान

शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने भी दिल्ली चुनाव में कांग्रेस और आप के अलग-अलग लड़ने पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस और आप साथ होते तो नतीजे अलग हो सकते थे। दोनों का मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी थी, लेकिन वे अलग-अलग लड़े। अगर वे एक साथ होते तो मतगणना के पहले घंटे में ही बीजेपी की हार पक्की हो गई होती।”

दिल्ली चुनाव के शुरुआती रुझान

शुरुआती रुझानों में दिल्ली की कई सीटों पर रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है।

  • कालकाजी सीट: मुख्यमंत्री आतिशी बीजेपी के रमेश बिधूड़ी से पीछे हैं।
  • जंगपुरा सीट: पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पीछे चल रहे हैं।
  • करावल नगर सीट: बीजेपी के कपिल मिश्रा आगे हैं।
  • ग्रेटर कैलाश सीट: आप के सौरभ भारद्वाज बढ़त बनाए हुए हैं।

बीजेपी को मिल रही बढ़त

दिल्ली में 5 फरवरी को हुए मतदान में 60.54 प्रतिशत मतदाताओं ने हिस्सा लिया था। अब तक के आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी 32 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि आम आदमी पार्टी केवल 14 सीटों पर बढ़त बना पाई है।

‘इंडिया’ ब्लॉक का असर नहीं दिखा

हालांकि, केंद्र की राजनीति में कांग्रेस और आप ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन विधानसभा चुनावों में यह गठबंधन काम नहीं कर पाया। हरियाणा और दिल्ली में दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा, जिसका फायदा बीजेपी को मिला।

एग्जिट पोल हुए सही साबित?

दिल्ली में पांच फरवरी को मतदान हुआ था, और नतीजों से पहले जारी एग्जिट पोल्स में बीजेपी को बढ़त मिलने की संभावना जताई गई थी। अब शुरुआती रुझानों में एग्जिट पोल्स के अनुमान सही साबित होते नजर आ रहे हैं।

और पढ़ें: Delhi Elections Result: दिल्ली की वो दो अहम सीटें जहां BJP ने सहयोगियों पर जताया भरोसा, जानें क्या रहे नतीजे

Constable Pankaj Sharma Delhi election: बाटला हाउस एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मी को क...

0

Constable Pankaj Sharma Delhi election: नई दिल्ली विधानसभा सीट पर इस बार का चुनाव कई कारणों से सुर्खियों में रहा, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में रहे दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल पंकज शर्मा। पुलिस विभाग में कार्यरत रहते हुए चुनाव लड़ने वाले पंकज शर्मा ने दिल्ली की बिगड़ती कानून व्यवस्था को अपना मुख्य मुद्दा बनाया।

और पढ़ें: Delhi Elections Result: दिल्ली की वो दो अहम सीटें जहां BJP ने सहयोगियों पर जताया भरोसा, जानें क्या रहे नतीजे

पंकज शर्मा की उम्मीदवारी और निलंबन- Constable Pankaj Sharma Delhi election

40 वर्षीय पंकज शर्मा दिल्ली के चर्चित बाटला हाउस एनकाउंटर टीम का हिस्सा रह चुके हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने उन्हें चुनाव लड़ने के चलते नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए सस्पेंड कर दिया। दिल्ली पुलिस के डीसीपी (छठी बटालियन) हरेश्वर स्वामी ने बताया कि जैसे ही हमें जानकारी मिली कि वह पुलिस बल में रहते हुए चुनाव लड़ रहे हैं, उन्हें 29 जनवरी को निलंबित कर दिया गया।

Constable Pankaj Sharma Delhi election
source: google

डीसीपी स्वामी ने कहा कि इस फैसले की जानकारी चुनाव आयोग को भी दे दी गई है। वहीं, पंकज शर्मा ने इस फैसले को अनुचित ठहराया और कहा कि वे पहले दिल्ली के नागरिक हैं और अपराध को काबू करने के लिए बेहतरीन विकल्प पेश कर सकते हैं।

चुनाव प्रचार और विवाद

पंकज शर्मा ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि दिल्ली में बढ़ता अपराध तीन करोड़ जनता की मुख्य समस्या है और वे इसे रोकने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। जब उनसे सरकारी नौकरी करते हुए चुनाव लड़ने पर सवाल किया गया तो उन्होंने 2023 में राजस्थान हाई कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें एक सरकारी डॉक्टर को चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई थी।

Constable Pankaj Sharma Delhi election
source: google

हालांकि, दिल्ली पुलिस के अनुसार, शर्मा ने अपने हलफनामे में पेशे से संबंधित गलत जानकारी दी थी। उन्होंने ‘पेशे’ के कॉलम में ‘सामाजिक कार्यकर्ता’ लिखा, जिससे विवाद खड़ा हो गया। इस पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी भी सामाजिक कार्यकर्ता हो सकता है और उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है।

चुनाव परिणाम और निष्कर्ष

नई दिल्ली विधानसभा सीट पर 23 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। इस सीट से बीजेपी के प्रवेश वर्मा आगे चल रहे हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल दूसरे स्थान पर हैं। निर्दलीय उम्मीदवार पंकज शर्मा को अब तक केवल 5 वोट मिले हैं, जिससे यह साफ हो गया कि उनका अभियान मतदाताओं को लुभाने में असफल रहा।

पंकज शर्मा का यह कदम चुनावी प्रक्रिया में नियमों और आचार संहिता को लेकर एक नई बहस को जन्म दे गया है। जहां एक ओर कुछ लोग इसे जनता के अधिकार के रूप में देखते हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी सेवा में रहते हुए चुनाव लड़ने के नियमों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग और न्यायपालिका इस मामले में आगे क्या रुख अपनाते हैं।

और पढ़ें: Delhi Exit Poll 2025 Results: एग्जिट पोल्स से भाजपा को बढ़त, AAP को बड़ा झटका, कांग्रेस की स्थिति पर सवाल

Delhi Elections Result: दिल्ली की वो दो अहम सीटें जहां BJP ने सहयोगियों पर जताया भरोस...

0

Delhi Elections Result: दिल्ली विधानसभा चुनाव की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बढ़त बना ली है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) को पिछड़ता हुआ देखा जा रहा है। दिल्ली की कई वीआईपी सीटों पर भी बीजेपी ने बढ़त बना ली है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है। इस बीच अब सबकी नजरें बुराड़ी और देवली सीटों पर टिकी हैं, क्योंकि भाजपा ने अपने सहयोगी दलों पर भरोसा जताते हुए ये दोनों सीटें छोड़ दी थीं।

और पढ़ें: Delhi Exit Poll 2025 Results: एग्जिट पोल्स से भाजपा को बढ़त, AAP को बड़ा झटका, कांग्रेस की स्थिति पर सवाल

बुराड़ी और देवली सीटों पर निगाहें- Delhi Elections Result

दिल्ली चुनाव में बीजेपी ने अपनी सहयोगी पार्टियों जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के लिए दो सीटें छोड़ी थीं—बुराड़ी और देवली। इन सीटों के नतीजे पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Delhi Elections Result Delhi Assembly Election
source: google

बुराड़ी विधानसभा सीट से जेडीयू ने शैलेंद्र कुमार को मैदान में उतारा था, जबकि देवली सीट से एलजेपी (रामविलास) ने दीपक तंवर को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, शुरुआती रुझानों में इन सहयोगी दलों के लिए अच्छी खबर नहीं है, क्योंकि दोनों सीटों पर आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी आगे चल रहे हैं।

बुराड़ी सीट का समीकरण

बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार संजीव झा ने बढ़त बना ली है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, एसआरपीपी के उम्मीदवार प्रमोद को पीछे छोड़ दिया है। वहीं, जेडीयू प्रत्याशी शैलेंद्र कुमार इस सीट पर पिछड़ते दिख रहे हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर मंगेश त्यागी को चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन शुरुआती गणना में वह भी पीछे हैं।

देवली सीट का हाल

देवली सीट पर भी आम आदमी पार्टी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। आम आदमी पार्टी के प्रेम चौहान इस सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि एलजेपी (रामविलास) के दीपक तंवर पीछे चल रहे हैं। कांग्रेस के राजेश चौहान भी इस मुकाबले में हैं, लेकिन अभी तक रुझानों में वह मुख्य चुनौती पेश नहीं कर सके हैं।

पिछले चुनाव के नतीजे

अगर पिछले चुनावों की बात करें, तो बुराड़ी सीट पर आम आदमी पार्टी पहले भी काबिज थी। संजीव झा ने पिछली बार इस सीट पर 1,39,598 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी, जबकि जेडीयू के शैलेंद्र कुमार को 51,440 वोट मिले थे।

देवली सीट पर भी आम आदमी पार्टी ने 2020 में जीत दर्ज की थी। आम आदमी पार्टी के प्रकाश जरवाल ने 92,575 वोटों के साथ इस सीट को अपने नाम किया था, जबकि बीजेपी प्रत्याशी अरविंद कुमार को 52,402 वोट मिले थे।

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी अभी भी दिल्ली में मजबूत स्थिति में है, लेकिन बीजेपी ने इस बार अपने प्रचार और संगठन को अधिक मजबूत किया है, जिसका असर शुरुआती रुझानों में देखा जा सकता है।

Delhi Elections Result Delhi Assembly Election
source: google

हालांकि, अंतिम नतीजों का इंतजार करना होगा, क्योंकि कई सीटों पर अभी भी गिनती जारी है और वोटों की संख्या में बदलाव संभव है। दिल्ली की जनता किसे सत्ता सौंपेगी, इसका खुलासा आने वाले घंटों में हो जाएगा।

और पढ़ें: Who is Ashish Tayal: परिवहन मंत्री अनिल विज और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बीच बढ़ा विवाद, कलह के बीच उछला आशीष तायल का नाम