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Acharya Manish health Tips: लंबी और स्वस्थ जिंदगी के लिए क्या हैं सरल नियम? आचार्य मन...

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Acharya Manish health Tips: स्वस्थ जीवन और दीर्घायु का रहस्य क्या है? आचार्य मनीष का मानना है कि शुद्ध और पौष्टिक आहार ही लंबे और स्वस्थ जीवन का सबसे महत्वपूर्ण नियम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बिना केमिकल और बिना मिलावट के कोई भी खाद्य पदार्थ प्राप्त करना बेहद मुश्किल हो गया है, जिससे लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा घट रही है।

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आचार्य मनीष ने बताया कि भारत में औसत आयु मात्र 66 वर्ष रह गई है, जबकि जापान में 84, चीन में 79, अमेरिका में 72 और रूस में 74 वर्ष है। भारत में जीवन प्रत्याशा कम होने का मुख्य कारण खराब खानपान और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली है।

क्या दूध वाली चाय शराब से भी अधिक खतरनाक है? (Acharya Manish health Tips)

आचार्य मनीष ने दूध वाली चाय को शराब से भी अधिक नुकसानदायक बताया। उन्होंने कहा कि चाय में “फ्लैमिनाइड” और दूध में “केसीन” नामक प्रोटीन होता है। जब ये दोनों आपस में मिलते हैं तो रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिससे एक अत्यधिक हानिकारक पदार्थ उत्पन्न होता है, जो शरीर के लिए शराब से भी अधिक घातक हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीन टी, ब्लैक टी या दूध रहित चाय से कोई विशेष लाभ या हानि नहीं होती, लेकिन दूध वाली चाय का सेवन सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है।

गुस्से और तनाव में खाने से बचें

आचार्य मनीष के अनुसार, जब गुस्सा या तनाव हो तो खाना नहीं खाना चाहिए। इसके बजाय, गर्म पानी पीना चाहिए, क्योंकि तनाव में भोजन करने से पाचन क्रिया प्रभावित होती है, जिससे कई तरह की बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं।

उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति गुस्से में होता है तो उसका शरीर विषाक्त हार्मोन छोड़ता है, जिससे भोजन सही से पचता नहीं और पेट की समस्याएं, अपच, एसिडिटी और मोटापा जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

गुस्सा शांत करने के लिए क्या करें?

अगर आपको गुस्सा आता है तो शरीर को शांत करने के लिए नेचुरल तरीके अपनाने चाहिए। आचार्य मनीष ने बताया कि गुस्से को शांत करने के लिए व्यक्ति को अपने घर के गार्डन में नंगे पैर 40 मिनट तक खड़ा रहना चाहिए या चलना चाहिए।

ऐसा करने से शरीर धरती से जुड़ जाता है और गुस्सा अपने आप शांत हो जाता है। यह प्रकृति के साथ संपर्क बनाने का एक बेहतर उपाय है, जो मानसिक तनाव को कम करता है। यह प्रक्रिया माइंड और बॉडी को रिलैक्स करती है और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

स्वस्थ जीवन के लिए आचार्य मनीष के प्रमुख सुझाव

  • शुद्ध और पौष्टिक आहार का सेवन करें
  • बिना मिलावट और केमिकल वाले खाद्य पदार्थ चुनें
  • ग्रीन टी, ब्लैक टी का सेवन करें, दूध वाली चाय से बचें
  • गुस्से या तनाव में खाना न खाएं, सिर्फ गर्म पानी पिएं
  • गुस्से को शांत करने के लिए नंगे पैर धरती पर चलें

आचार्य मनीष का यह संदेश हमें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और प्राकृतिक तरीकों से शरीर को संतुलित रखने की प्रेरणा देता है। दूध वाली चाय को त्यागना, तनाव में भोजन से बचना और नंगे पैर धरती से जुड़ना—ये सभी सरल उपाय हमारे जीवन को अधिक स्वस्थ और दीर्घायु बना सकते हैं।

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Tanaji Sawant Son Rushiraj Sawant Missing Case: बैंकॉक जाने की जिद, परिवार का गुस्सा ...

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Tanaji Sawant Son Rushiraj Sawant Missing Case: महाराष्ट्र के तानाजी सावंत के बेटे ऋषिराज सावंत का बैंकॉक ट्रिप एक हाई-वोल्टेज फैमिली ड्रामा में तब्दील हो गया। महंगे चार्टर्ड विमान से दोस्तों संग बैंकॉक जाने की उनकी योजना पर परिवार ने ऐसा ब्रेक लगाया कि उन्हें वापस पुणे लौटना पड़ा।

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इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री कार्यालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) तक को शामिल किया गया, जिससे यह मामला और ज्यादा सुनसनीखेज बन गया।

बैंकॉक जाने की जिद और परिवार का गुस्साTanaji Sawant Son Rushiraj Sawant Missing Case

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को ऋषिराज सावंत की पत्नी का जन्मदिन था, लेकिन ऋषिराज उसे छोड़कर दोस्तों संग बैंकॉक जाने की तैयारी कर चुके थे। परिवार को यह बिल्कुल मंजूर नहीं था, लेकिन ऋषिराज ने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर 68 लाख रुपये में चार्टर्ड विमान बुक कर लिया। परिवार में इसको लेकर बहस भी हुई, लेकिन इसके बावजूद ऋषिराज ने बिना बताए बैंकॉक के लिए उड़ान भर ली। जैसे ही यह खबर उनके पिता तानाजी सावंत को लगी, उन्होंने अपने बेटे को रोकने के लिए पूरा तंत्र लगा दिया।

Tanaji Sawant Son Rushiraj Sawant Missing Case
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कैसे हाई-प्रोफाइल ड्रामा में बदला मामला?

तानाजी सावंत ने पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करने की कोशिश की, लेकिन वहां से भी बात नहीं बन पाई। आखिरकार, उन्होंने अपने रिश्तेदार और चिंचवड से बीजेपी विधायक शंकर जगताप की मदद ली। जगताप ने मुख्यमंत्री से संपर्क किया, जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने पुणे पुलिस को अलर्ट किया और नागरिक उड्डयन मंत्री मुरलीधर मोहोल से भी संपर्क किया गया।

‘अपरहण’ का केस और विमान की वापसी

बैंकॉक जा रहे विमान को रोकने के लिए कोई ठोस कानूनी आधार चाहिए था। इसी बीच पुणे के सिंहगढ़ रोड पुलिस स्टेशन में ऋषिराज के ‘अपरहण’ की शिकायत दर्ज कर दी गई। इस शिकायत के आधार पर पुणे से सांसद व केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) को निर्देश दिए। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को विमान को वापस बुलाने का आदेश मिला।

Tanaji Sawant Son Rushiraj Sawant Missing Case
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तब तक विमान बंगाल की खाड़ी तक पहुंच चुका था। पायलटों को वापस लौटने के निर्देश दिए गए, लेकिन विमान में बैठे ऋषिराज को इस बारे में कुछ नहीं बताया गया।

ऋषिराज को जब बैंकॉक की जगह पुणे दिखा तो होश उड़ गए

चार्टर्ड विमान में 18 लोगों की क्षमता थी, लेकिन उसमें केवल ऋषिराज और उनके दो दोस्त सफर कर रहे थे। विमान ने शाम 4:30 बजे पुणे एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और रात 9 बजे वापस लौट आया। जब विमान पुणे एयरपोर्ट पर उतरा, तब तक ऋषिराज को यही लग रहा था कि वह बैंकॉक पहुंच चुके हैं। लेकिन जैसे ही वह विमान से बाहर निकले और पुणे एयरपोर्ट देखा, तो उनके होश उड़ गए। पुलिस ने ऋषिराज का बयान दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है।

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JPC report on Waqf Bill: वक्फ संशोधन विधेयक पर सियासी बवाल, विपक्ष का विरोध, सदन में ...

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JPC report on Waqf Bill: लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर भारी हंगामा हुआ और विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट पेश की, जिसके बाद पूरे देश की राजनीति गर्मा गई। विपक्षी दलों और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस बिल पर कड़ा ऐतराज जताया है।

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विपक्ष का कहना है कि विधेयक में उनकी आपत्तियों और सुझावों को नजरअंदाज किया गया है, जबकि सरकार का दावा है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के हक की रक्षा के लिए लाया गया है।

विधेयक पर हंगामा, विपक्ष ने किया विरोध और वॉकआउट- JPC report on Waqf Bill

वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान विपक्षी दलों ने लोकसभा में भारी विरोध किया।  सपा सांसद डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि सरकार मनमाने तरीके से यह विधेयक ला रही है।  उन्होंने कहा कि विपक्ष के असहमति नोट को विधेयक में शामिल नहीं किया गया, जिससे यह साबित होता है कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि यह बिल मुस्लिमों से वक्फ की संपत्ति छीनने के लिए लाया गया है। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी इस विधेयक पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बिल के माध्यम से किसानों और रोजगार के मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।

JPC report on Waqf Bill
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मुस्लिम धर्मगुरुओं का विरोध, कोर्ट जाने की चेतावनी

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि वक्फ कानून में कोई भी संशोधन मंजूर नहीं किया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के सांसदों द्वारा उठाए गए मुद्दों को JPC की रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो इस मामले को लेकर हम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

JPC report on Waqf Bill
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बीजेपी का बचाव: ‘अब वक्फ के नाम पर गुंडई नहीं होगी’

इस मुद्दे पर बीजेपी सांसदों ने विधेयक का बचाव किया और कहा कि इससे मुस्लिम समुदाय को ही फायदा होगा।

– गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन ने कहा कि विपक्ष इसे सिर्फ राजनीतिक मुद्दा बना रहा है।
–  उन्होंने कहा कि अब वक्फ संपत्ति पर होने वाली जबरदस्ती और गुंडई बंद हो जाएगी।
– उनका दावा है कि यह बिल मुस्लिम समाज को मजबूत करेगा और उनकी संपत्ति को सुरक्षित बनाएगा।

सरकार का पक्ष: विधेयक में विपक्ष की चिंता शामिल

वक्फ (संशोधन) विधेयक पर गठित JPC कमेटी के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि:
– विपक्ष की चिंताओं को रिपोर्ट में खंड दर खंड शामिल किया गया है।
– गृह मंत्री ने खुद सदन में कहा कि हमें कोई आपत्ति नहीं है और विपक्ष की बातों को रिपोर्ट में जोड़ा जाएगा।
– विपक्ष का विरोध लोकतंत्र के खिलाफ है।

क्या है वक्फ संशोधन विधेयक?

वक्फ अधिनियम पहले से ही मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए मौजूद है।
नए संशोधन में कुछ नए नियम जोड़े गए हैं, जिससे वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग और विवादों को रोका जा सके।
सरकार का कहना है कि इससे मुस्लिम समुदाय को ही फायदा होगा।
वहीं, विपक्ष और मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने की साजिश है।

क्या आगे बढ़ेगा विवाद?

वक्फ संशोधन विधेयक पर मचा बवाल अब सड़क से लेकर कोर्ट तक जा सकता है। विपक्ष इसे ध्यान भटकाने की राजनीति बता रहा है। वहीं, मुस्लिम धर्मगुरु इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला बता रहे हैं। सरकार इसे सुधारात्मक कदम बता रही है।

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UP News: बाइक विवाद से शुरू हुई हिंसा में दूसरी मौत, बरवा उपाध्याय गांव में तनाव और आ...

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UP News: उत्तर प्रदेश के खुखुंदू थानाक्षेत्र के बरवा उपाध्याय गांव में एक मामूली विवाद ने अब तक दो लोगों की जान ले ली और पूरे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। छह दिन पहले तेज रफ्तार बाइक चलाने से रोकने को लेकर हुए विवाद के बाद हुई मारपीट में घायल कबाड़ व्यवसायी तारकेश्वर गुप्ता ने भी बुधवार को लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में दम तोड़ दिया। इससे पहले उनके चचेरे भाई दिनेश गुप्ता की भी मौत हो चुकी थी।

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घटना के बाद से गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। ग्रामीणों में आरोपियों की गिरफ्तारी न होने को लेकर भारी आक्रोश है। वहीं, एसपी की पहल पर तीन आरोपियों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है, जिससे उनके विदेश भागने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, मुख्य आरोपी मुकेश यादव को पुलिस एनकाउंटर में गोली लगी, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

कैसे हुआ पूरा विवाद? (UP News)

6 फरवरी की शाम को बरवा उपाध्याय गांव में विनय यादव नामक युवक तेज रफ्तार से बाइक चला रहा था। जयप्रकाश गुप्ता ने बाइक धीरे चलाने की सलाह दी, लेकिन इससे विनय यादव और उसके परिवार को गुस्सा आ गया। बात बढ़ते-बढ़ते झगड़े में तब्दील हो गई और आरोपियों ने लाठी-डंडे, सरिया, हाकी व पाइप से हमला बोल दिया।

UP News crime
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हमले में घायल लोगों की स्थिति

  • 50 वर्षीय दिनेश गुप्ता पुत्र हरिवेलास गुप्ता की मौके पर ही हालत गंभीर हो गई थी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
  • 45 वर्षीय तारकेश्वर गुप्ता, जो लखनऊ के निजी अस्पताल में भर्ती थे, भी गंभीर चोटों के कारण बुधवार को दम तोड़ गए।
  • पुलिस ने विनय यादव, विशाल यादव, मुकेश यादव, मनीष यादव और उनके पिता रामगणेश यादव समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

मुख्यमंत्री के आदेश पर इलाज, लेकिन बचाई नहीं जा सकी जान

घटना के बाद घायल तारकेश्वर गुप्ता को लखनऊ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उन्हें एसजीपीजीआई, लखनऊ में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

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घटना के बाद परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में मौजूद मां सुशीला देवी, बहन लक्ष्मीना देवी और उनके बेटे विवेक, आदित्य, रविंद्र दहाड़ मारकर रो रहे हैं। पत्नी लक्ष्मी देवी लखनऊ में उनके इलाज के दौरान उनके साथ थीं।

गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती, लोग डरे-सहमे

जैसे ही तारकेश्वर गुप्ता की मौत की खबर गांव पहुंची, प्रशासन ने गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया। पीएसी और पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है, ताकि किसी भी तरह की हिंसा न हो।

  • स्वजन आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं।
  • गांव में तनाव और शोक का माहौल बना हुआ है।
  • घटना के बाद से गांव में किसी ने खाना तक नहीं खाया, घरों में चूल्हे तक नहीं जले।

गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती, आरोपी का एनकाउंटर

तारकेश्वर गुप्ता की मौत की खबर मिलते ही प्रशासन ने गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया। बुधवार को पुलिस ने मुख्य हत्यारोपी मुकेश यादव का एनकाउंटर कर दिया।

  • एनकाउंटर में आरोपी को गोली लगी और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
  • पुलिस के मुताबिक, मुकेश यादव को मेडिकल के लिए ले जाया जा रहा था, इसी दौरान उसने भागने की कोशिश की।
  • पुलिस ने उसे रुकने के लिए कहा, लेकिन वह फरार होने लगा, जिसके चलते पुलिस कार्रवाई में उसे गोली लगी।

चार आरोपी गिरफ्तार

अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है:

– रामगणेश यादव
–  मनीष यादव

–  मुकेश यादव (एनकाउंटर में घायल)
–  अनिल यादव निवासी पोखरभिंडा, रामपुर कारखाना, जनपद देवरिया

गांव में पसरा सन्नाटा, लोग डर के साए में जी रहे

बरवा उपाध्याय गांव में पिछले एक हफ्ते से सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग अपने घरों में कैद हो गए हैं।

  • बच्चे घर से बाहर खेलने तक नहीं निकल रहे।
  • लोग घटना पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, सिर्फ पुलिस की गतिविधियों को देख रहे हैं।
  • ग्रामीणों में डर और दहशत का माहौल बना हुआ है।

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Virdharam Seoul Net Worth: ड्रग्स से करोड़ों कमाने वाले विरधाराम सियोल की संपत्ति जब्...

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Virdharam Siyol Net Worth: राजस्थान के बाड़मेर जिले में नशा तस्करी और अवैध संपत्ति को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां कुख्यात तस्कर विरधाराम सियोल की करोड़ों की संपत्ति जब्त करने के महज 19 घंटे बाद ही एक सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हो गई। यह मामला पुलिस की ऐतिहासिक कार्रवाई और अपराध की दुनिया से जुड़े एक अहम घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

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नशा तस्करी से करोड़ों की संपत्ति, फिर पुलिस का शिकंजा- Virdharam Siyol Net Worth

बाड़मेर पुलिस ने 10 फरवरी 2024 को एनडीपीएस एक्ट 1985 की धारा 68एफ(2) के तहत कार्रवाई करते हुए विरधाराम की करोड़ों की संपत्ति जब्त की थी। पुलिस के मुताबिक, उसने नशे के अवैध कारोबार से अर्जित पैसे को सफेद करने के लिए वी.आर. सियोल कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई थी।

पुलिस ने जब्त की गई संपत्तियां:

2 करोड़ रुपये की तीन मंजिला कोठी
3 लग्जरी बसें
1 क्रेटा कार
पत्नी के नाम पर बनी कंस्ट्रक्शन कंपनी

बाड़मेर पुलिस ने लगभग छह महीने की गहन जांच के बाद यह कार्रवाई की। पुलिस ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से ITR रिपोर्ट निकलवाकर विरधाराम की संपत्तियों की पड़ताल की। जांच में पता चला कि उसकी 5 संपत्तियों का कोई वैध स्रोत नहीं था। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी और प्रशासक, NDPS एक्ट, नई दिल्ली ने संपत्ति को फ्रीज करने के आदेश दिए।

सड़क हादसे में मौत

जब्त संपत्ति के अगले ही दिन यानी 11 फरवरी 2024 की सुबह 5 से 7 बजे के बीच विरधाराम की स्विफ्ट कार कानपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके साथ यात्रा कर रहे अन्य लोग घायल हो गए।

कहा जा रहा है कि पुलिस कार्रवाई और व्यापार में भारी घाटे के कारण वह मानसिक रूप से बहुत परेशान चल रहा था। मामले की पूरी जांच अभी बाकी है।

कहां जा रहा था विरधाराम?

खबरों की मानें तो, वह अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने बिहार के गया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में यह हादसा हुआ।

नशा तस्करी और अवैध कारोबार का जाल

विरधाराम सियोल 2012 से 2023 के बीच कुल 10 मामलों में आरोपी था।

मुख्य अपराध:

– एनडीपीएस एक्ट के तहत नशा तस्करी (डोडा-पोस्त, अफीम, और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी)
– अवैध संपत्ति अर्जन (नशे के कारोबार से करोड़ों की कमाई)
– पत्नी के नाम से कंपनी बनाकर काले धन को सफेद करना
– मारपीट और हिंसा के मामले
– अवैध हथियार और चोरी की गाड़ियां रखने का अपराध

विरधाराम की तस्करी से अर्जित संपत्ति को 45 दिनों के लिए फ्रीज कर दिया गया है। अगर अपील खारिज होती है, तो यह संपत्ति सरकार के अधीन चली जाएगी और नीलामी के लिए रखी जा सकती है।

पुलिस की ऐतिहासिक कार्रवाई: ‘भौकाल अभियान’ की बड़ी सफलता

राजस्थान पुलिस ने पहली बार एनडीपीएस एक्ट 1985 की धारा 68एफ(2) के तहत किसी तस्कर की इतनी बड़ी संपत्ति जब्त की।

यह कार्रवाई आईजी विकास कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘भौकाल अभियान’ का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य नशा तस्करों पर कड़ा प्रहार करना है। पुलिस ने संदेश दिया है कि अब अवैध कारोबार से अर्जित संपत्ति को सुरक्षित रखना आसान नहीं होगा।

जनता की प्रतिक्रिया: तस्कर या समाजसेवी?

12 फरवरी 2024 को विरधाराम के अंतिम संस्कार में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। कुछ लोगों का कहना था कि विरधाराम समाज में लोगों की मदद करता था। लेकिन पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि वह अपराध की दुनिया का बड़ा नाम था। सोशल मीडिया पर उसके आलीशान घर, लग्जरी कारों और शानो-शौकत की तस्वीरें वायरल हो रही हैं।

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Lucknow leopard खूंखार तेंदुए ने शादी समारोह में मचाया हाहाकार, मैरिज हॉल में घुसा ते...

Lucknow leopard: बीते दिन लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र से हैरान करने वाली खबर सामने आई जहाँ बुद्धेश्वर एमएम लॉन में एक शादी समारोह में अचानाक से खूंखार तेंदुआ घुस आया जिसके बाद लोगों में भगदड़ मच गई और सभी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। तो चलिए आपको इस लेख में पुरे मामले के बारे में बताते है।

मैरिज हॉल में घुस आया खूंखार तेंदुआ

लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र के बुद्धेश्वर एमएम लॉन में बुधवार की रात एक हैरान कर देने वाली घटना हुई। यहां एक शादी समारोह चल रहा था, जिसमें दूल्हा-दुल्हन स्टेज पर थे। तभी एक खूंखार तेंदुआ मैरिज हॉल में घुस आया, जिससे वहां चीख-पुकार मच गई। तेंदुए को देखते ही लोगों में भगदड़ मच गई और सभी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि शादी के इस खुशी के माहौल में अचानक इतना बड़ा खतरा सामने आ जाएगा।

इस घटना की सूचना तुरंत पुलिस और वन विभाग को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने मैरिज हॉल को खाली कराया और वन विभाग की टीम ने तेंदुए को पकड़ने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान तेंदुए ने वन दरोगा पर भी हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इसके अलावा एक व्यक्ति और तेंदुए के हमले के डर से घायल हो गया है। दरअसल, एक युवक छत पर मौजूद था. इसी दौरान तेंदुए छत पर आ गया था। तेंदुए को देखकर युवक छत से कूद गया था, जिस कारण उसे गंभीर चोट आई है।

चार घंटे की कड़ी मशक्कत

इसके बाद भी वन विभाग की टीम ने हार नहीं मानी और चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को पकड़ने में सफलता हासिल की। वन विभाग की टीम ने 90 किलो के तेंदुए को पकड़ लिया है। डीएफओ लखनऊ सीताशु पांडे ने बताया कि करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को पकड़ने में सफलता मिली है। हमें तेंदुए पर दो बार वार करना पड़ा क्योंकि हमें लगा था कि यह 50 से 60 KG का होगा, लेकिन इसका वजन 80 से 90 KG है। यह पता नहीं चल पाया है कि तेंदुआ शहर में कहां से आया।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर तेंदुआ पुलिसवाले की राइफल छीनने को क्यों मजबूर हुआ। वह भी लखनऊ जैसे शहर में, यह सोचने वाली बात है। जंगल तेजी से खत्म हो रहे हैं और जंगली जानवर शहरी जानवरों के बीच पहुंच रहे हैं। जो भी हो, कैमरे मेन की देलेरी ख़तरनाक हैँ।

Mahakumbh 2025 Shop Crisis: महाकुंभ में व्यापारियों की उम्मीदें टूटी, घाटे के बोझ तले...

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Mahakumbh 2025 Shop Crisis: “बेटी की शादी के लिए महाकुंभ में दुकान लगाई थी, लेकिन अब घर-जमीन बेचने की नौबत आ गई है।” ये कहते ही सुरेश की आंखें छलक पड़ती हैं। प्रयागराज के महाकुंभ में कारोबार के सुनहरे सपने लेकर आए हजारों व्यापारियों की कहानी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने उम्मीद की थी कि इस पवित्र आयोजन में व्यापार से अच्छा मुनाफा कमाएंगे, लेकिन सख्त प्रबंधन और गलत नीतियों के चलते उनकी उम्मीदें चकनाचूर हो गईं।

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बेटी की शादी और बढ़ता कर्ज- Mahakumbh 2025 Shop Crisis

सुरेश ने अपनी बेटी की शादी के लिए महाकुंभ में दुकान लगाने का फैसला किया। उन्होंने चार दुकानों (नं. 61, 62, 63 और 64) के लिए करीब 30 लाख का कर्ज लिया, लेकिन अब तक सिर्फ 4 लाख की ही कमाई हुई है। शादी के लिए 20-25 लाख की जरूरत है, लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि घर और जमीन बेचकर ही शादी करनी पड़ेगी। सुरेश बताते हैं कि पहले के कुंभ मेलों में अच्छा मुनाफा होता था, लेकिन इस बार व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया है।

त्रिवेणी बाजार: सबसे पॉश मार्केट, लेकिन बिना ग्राहकों के

त्रिवेणी बाजार महाकुंभ का सबसे पॉश मार्केट माना जाता है, लेकिन यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। ज्यादातर दुकानें खाली हैं और जहां दुकानें लगी भी हैं, वहां इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आते हैं। दुकानदारों की शिकायत है कि इस बार बाजार की तरफ आने वाले रास्ते पूरी तरह से ब्लॉक कर दिए गए हैं, जिससे पब्लिक यहां तक पहुंच ही नहीं पा रही।

सुरेश कहते हैं:
“पहले कुंभ मेलों में रास्ते कुछ घंटों के लिए बंद होते थे, लेकिन बाद में खोल दिए जाते थे। इस बार रास्ते पूरी तरह से सील कर दिए गए हैं। दुकान तक सामान पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है। बाइक का पास दिया गया है, लेकिन बाइक से सामान कैसे आएगा?”

70 लाख का माल, लेकिन बिक्री सिर्फ 4-5 लाख की

सुरेश 70 लाख का माल लेकर आए थे, लेकिन अब तक सिर्फ 4-5 लाख की ही बिक्री हो पाई है।
“मेरे पास 10 लोगों का स्टाफ है, जिनकी सैलरी 20-25 हजार रुपये है। मेरा रोजाना का खर्च 90 हजार रुपये है, लेकिन कमाई सिर्फ 20-25 हजार। अब सोच नहीं पा रहा कि कैसे मैनेज करूंगा।”

सुरेश की तरह ही राकेश कुमार सोनी भी 30 सालों से कुंभ में दुकान लगा रहे हैं, लेकिन इस बार का अनुभव बेहद कड़वा रहा। उन्होंने 2.85 लाख की बोली में दुकान ली थी, लेकिन अब तक जितना लगाया, उसका 1% भी रिकवर नहीं कर पाए।

व्यापार नहीं चलने की वजहें

  1. गलत प्लानिंग और मार्ग अवरोध: इस बार व्यापारियों को उम्मीद थी कि ज्यादा श्रद्धालु आने से बिक्री बढ़ेगी, लेकिन प्रशासन ने पब्लिक को मुख्य बाजार से दूर कर दिया। लोग पैदल चलकर थक जाते हैं और सीधे घर या स्टेशन जाना चाहते हैं।
  2. अत्यधिक भीड़, लेकिन ग्राहक नहीं: इस बार महाकुंभ में रिकॉर्ड भीड़ है, लेकिन लोग बाजार तक नहीं पहुंच रहे। भीड़ इतनी ज्यादा है कि लोग स्नान के बाद आराम करने की जगह ढूंढते हैं, न कि शॉपिंग करने की।
  3. शौचालयों और सफाई की समस्या: कई दुकानों के पास ही शौचालय बना दिए गए, जिससे बदबू और गंदगी के कारण ग्राहक वहां नहीं आते।
  4. वेंडरों की अनियमितता: अवैध वेंडरों ने मुख्य बाजार को घेर लिया, जिससे त्रिवेणी बाजार जैसी पॉश जगहें नजर ही नहीं आतीं।

छोटी दुकानें, बड़े नुकसान

वरुण कलवानी और उनके दोस्त ने लखनऊ से चिकनकारी सूट और बनारसी साड़ियों की दुकान लगाई थी। उन्होंने 20-22 लाख का निवेश किया, लेकिन लागत का 10% भी नहीं निकाल पाए। आशीष पांडेय ने 2.5 लाख लगाकर दुकान ली, लेकिन इंटीरियर पर 60 हजार खर्च करने के बावजूद सिर्फ 15 हजार की बिक्री हुई।

जयपुर के जय ने सबसे महंगी दुकान 6.3 लाख में खरीदी, लेकिन अब वो सिर्फ 1 लाख में भी बिक नहीं रही। जय बताते हैं:
“मैंने घर के कागजात गिरवी रखकर दुकान ली थी, लेकिन अब पूरे माल को वापस ले जाने का भी पैसा नहीं है।”

व्यवस्था पर उठते सवाल

दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन ने कई झूठे वादे किए:

  • CCTV, सुरक्षा गार्ड और सफाई की गारंटी दी गई थी, लेकिन कुछ भी नहीं मिला।
  • दुकानों के सामने वॉशरूम बना दिए गए, जिससे गंदगी और बदबू के कारण ग्राहक दूर रहते हैं।
  • बिजली और पानी की सही व्यवस्था नहीं है।

आगे क्या?

अब व्यापारियों की सरकार से गुहार है कि उन्हें बेस प्राइस काटकर रिफंड दिया जाए। वरुण कहते हैं:
“हम यहां ट्रेडिशनल कारीगरी को प्रमोट करने आए थे, लेकिन कोई ग्राहक ही नहीं है। प्रशासन ने मार्केट को पूरी तरह बर्बाद कर दिया।”

महाकुंभ की भव्यता और भारी भीड़ के बावजूद व्यापारियों के लिए यह सबसे बुरी कुंभ व्यापार यात्रा साबित हो रही है। अधिकांश दुकानदार अब भारी नुकसान के साथ घर लौटने की तैयारी में हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इन व्यापारियों की समस्या को सुनेगा और उनके नुकसान की भरपाई करेगा या यह कुंभ सिर्फ भव्यता और भीड़ के मायाजाल में ही खो जाएगा?

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Chhattisgarh High Court decision: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला- पत्नी की सहमति के बिना...

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Chhattisgarh High Court decision: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति द्वारा अपनी वयस्क पत्नी के साथ उसकी सहमति के बिना अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति एन.के. चंद्रवंशी की एकल पीठ ने यह निर्णय देते हुए जगदलपुर निवासी एक व्यक्ति को बलात्कार, अप्राकृतिक यौन कृत्य और गैर-इरादतन हत्या के आरोपों से बरी कर दिया।

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मामले का विवरण: Chhattisgarh High Court decision

घटना 11 दिसंबर 2017 की है, जब आरोपी ने अपनी पत्नी के साथ उसकी सहमति के बिना अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित किया। इस कृत्य के बाद पीड़िता को असहनीय पीड़ा हुई और इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। निचली अदालत ने आरोपी को IPC की धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या), 376 (दुष्कर्म) और 377 (अप्राकृतिक यौन कृत्य) के तहत दोषी ठहराते हुए 10 साल के कारावास की सजा सुनाई थी।

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उच्च न्यायालय का निर्णय

आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की। सुनवाई के बाद, उच्च न्यायालय ने माना कि IPC की धारा 375 के अपवाद 2 के अनुसार, यदि पत्नी की आयु 15 वर्ष से अधिक है, तो पति द्वारा उसके साथ किए गए किसी भी यौन कृत्य को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पत्नी की सहमति का प्रश्न महत्वहीन हो जाता है। इसके आधार पर, न्यायालय ने आरोपी को IPC की धारा 376 और 377 के आरोपों से बरी कर दिया।

गैर-इरादतन हत्या के आरोप पर न्यायालय की राय

IPC की धारा 304 के तहत, उच्च न्यायालय ने पाया कि निचली अदालत ने इस संबंध में कोई विशेष निष्कर्ष नहीं दिया था। इसलिए, न्यायालय ने आरोपी को इस आरोप से भी मुक्त कर दिया और उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया।

कानूनी दृष्टिकोण

यह निर्णय IPC की धारा 375 के अपवाद 2 पर आधारित है, जो पति-पत्नी के बीच यौन संबंधों को दुष्कर्म की परिभाषा से बाहर रखता है, बशर्ते पत्नी की आयु 15 वर्ष से अधिक हो। हालांकि, यह मुद्दा कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से विवादास्पद रहा है, और marital rape (वैवाहिक बलात्कार) को अपराध की श्रेणी में शामिल करने की मांग समय-समय पर उठती रही है।

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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का यह फैसला कानूनी प्रावधानों की व्याख्या पर आधारित है, लेकिन यह विषय सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से गंभीर चर्चा का विषय है। वर्तमान में, भारत में वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में शामिल करने के लिए कानूनी सुधारों की मांग जारी है, और इस पर अंतिम निर्णय विधायिका और न्यायपालिका के संयुक्त प्रयासों से ही संभव होगा।

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Rent Agreement: यूपी सरकार का बड़ा फैसला, रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री अनिवार्य, स्टां...

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Rent Agreement: उत्तर प्रदेश सरकार ने मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच विवादों को कम करने और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेंट एग्रीमेंट (किराया अनुबंध) की रजिस्ट्री को अनिवार्य करने की योजना बनाई है। इस पहल के तहत, रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए स्टांप शुल्क को कम करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिक से अधिक लोग इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित हों।

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वर्तमान स्थिति और समस्याएं: Rent Agreement

वर्तमान में, अधिकांश लोग केवल ₹100 के स्टांप पेपर पर रेंट एग्रीमेंट करते हैं, जो कानूनी रूप से मान्य नहीं होता। स्टांप शुल्क अधिक होने के कारण, बहुत कम लोग रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री कराते हैं। उत्तर प्रदेश में एक वर्ष में केवल 86,000 रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर्ड हुए हैं, जबकि घर, दुकान और ऑफिस किराये पर देने वालों की संख्या लाखों में है।

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प्रस्तावित बदलाव

स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल के अनुसार, रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री से मकान मालिक और किरायेदारों के बीच विवादों में कमी आएगी, और दोनों पक्षों के हित सुरक्षित रहेंगे। प्रस्तावित बदलावों के तहत, एक वर्ष तक के रेंट एग्रीमेंट पर किराये का 2% स्टांप शुल्क निर्धारित किया गया है। उदाहरण के लिए:

  • 2 लाख रुपये तक के किराये पर: ₹500 स्टांप शुल्क
  • 5 लाख रुपये तक के किराये पर: ₹5,000 स्टांप शुल्क
  • 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक के किराये पर: अधिकतम ₹20,000 स्टांप शुल्क

इसके अतिरिक्त, एक वर्ष से अधिक अवधि के रेंट एग्रीमेंट के लिए स्टांप शुल्क 500 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक होगा।

रजिस्ट्री की प्रक्रिया

नए नियमों के अनुसार, रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट में लिखी गई शर्तें ही कानूनी रूप से मान्य होंगी, जिन पर कोर्ट में दावा किया जा सकेगा। इसके लिए एक अलग पोर्टल तैयार किया जाएगा, जिसमें एक निर्धारित फॉर्मेट होगा। इस फॉर्मेट को डाउनलोड करके प्रिंट आउट लिया जा सकेगा, जिसे स्टांप पेपर पर चिपकाने के बाद कानूनी वैधता मिल जाएगी।

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महिलाओं के लिए विशेष छूट

सरकार महिलाओं को संपत्ति में अधिक अधिकार देने के लिए स्टांप शुल्क में विशेष छूट देने की योजना बना रही है। प्रस्ताव के अनुसार, एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति की रजिस्ट्री महिला के नाम पर कराने पर 1% स्टांप शुल्क की छूट मिलेगी। वर्तमान में, यह छूट केवल 10 लाख रुपये तक की संपत्ति पर लागू है।

सरकार का उद्देश्य

इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य रेंट एग्रीमेंट को कानूनी रूप से मजबूत बनाना, स्टांप शुल्क कम करके अधिक लोगों को रजिस्ट्री के लिए प्रोत्साहित करना, और मकान मालिकों व किरायेदारों के बीच विवादों को कम करना है। प्रस्तावित नियमों के लागू होने के बाद, रेंट एग्रीमेंट की रजिस्ट्री की प्रक्रिया सरल और सुलभ हो जाएगी, जिससे दोनों पक्षों के हित सुरक्षित रहेंगे।

सरकार का यह कदम न केवल कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा, बल्कि राज्य में किराये से संबंधित विवादों को भी कम करेगा, जिससे एक पारदर्शी और न्यायसंगत प्रणाली स्थापित होगी।

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USAID Funding against India: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने हाल ही में अमेरिकी एजेंसी ‘यूएसएड’ (USAID) पर भारत को विभाजित करने के लिए विभिन्न संस्थाओं को धन मुहैया कराने का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार से इस मामले की गहन जांच कराने और दोषियों को सजा देने की मांग की है। दुबे के इन आरोपों को अमेरिका के पूर्व विदेश विभाग अधिकारी माइक बेंज के हालिया खुलासों से और बल मिला है।

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निशिकांत दुबे के आरोप- USAID Funding against India

संसद में शून्यकाल के दौरान निशिकांत दुबे ने कहा कि अमेरिका में नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘यूएसएड’ को पूरी तरह बंद कर दिया है, क्योंकि यह संस्था वर्षों से विभिन्न सरकारों को गिराने के लिए धन का उपयोग कर रही थी। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या ‘यूएसएड’ ने जॉर्ज सोरोस की ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन’ को भारत को विभाजित करने के लिए 5000 करोड़ रुपये दिए थे। दुबे ने यह भी पूछा कि क्या ‘यूएसएड’ ने राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा दिया और क्या इसने तालिबान को धन मुहैया कराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संस्था आतंकवादी और नक्सलवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले संगठनों को धन देती है। दुबे ने सरकार से अनुरोध किया कि इनकी जांच की जाए और जो भी दोषी पाए जाएं, उन्हें जेल भेजा जाए।

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माइक बेंज के खुलासे

अमेरिका के पूर्व विदेश विभाग अधिकारी माइक बेंज ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने भारत और बांग्लादेश सहित कई देशों की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने मीडिया प्रभाव, सोशल मीडिया सेंसरशिप और विपक्षी आंदोलनों को वित्तीय सहायता के माध्यम से इन देशों की राजनीति को प्रभावित किया। बेंज का दावा है कि अमेरिकी सरकार से जुड़ी संस्थाओं ने ‘लोकतंत्र को बढ़ावा देने’ की आड़ में चुनावों को प्रभावित करने, सरकारों को अस्थिर करने और अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप विदेशी सरकार बनाने का काम किया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंज ने आरोप लगाया कि अमेरिकी विदेश नीति से जुड़े इस कांड में ‘यूएसएड’, थिंक टैंक और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं। इन्होंने भारत के 2019 के आम चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि इन समूहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ चुनावी नैरेटिव तैयार किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संगठनों ने इस धारणा को बढ़ावा दिया कि मोदी की राजनीतिक सफलता गलत सूचनाओं की वजह से है। इसके आधार पर व्यापक सेंसरशिप का वातावरण तैयार किया गया।

सोशल मीडिया पर दबाव का आरोप

बेंज का कहना है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने फेसबुक, वॉट्सऐप, यूट्यूब और ट्विटर जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर प्रभाव डालते हुए मोदी समर्थक कंटेंट पर अंकुश लगाने का प्रयास किया। वॉट्सऐप की जनवरी 2019 में मैसेज फॉरवर्डिंग की सीमा को कम करने की नीति को भाजपा की डिजिटल पहुंच रोकने का एक सटीक उदाहरण बताया गया। बेंज के अनुसार, अमेरिका समर्थित संस्थाओं ने भारत के डिजिटल स्पेस में हस्तक्षेप को सही ठहराने के लिए मोदी के समर्थकों को ऑनलाइन फर्जी खबरें फैलाने के लिए रणनीतिक रूप से फंसाया। उनका दावा है कि ‘यूएसएड’ से जुड़े संगठनों सहित कई अन्य संगठनों ने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया और डिजिटल फोरेंसिक समूहों के साथ मिलकर ऐसी रिपोर्टें बनाईं, जिनमें भारत को गलत सूचना के गंभीर संकट से जूझते हुए दिखाया गया। उनका तर्क है कि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मोदी समर्थक बयानों को दबाने का एक बहाना बन गया।

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बांग्लादेश में अमेरिकी हस्तक्षेप

बेंज ने दावा किया कि अमेरिका ने बांग्लादेश की राजनीति में भी हस्तक्षेप किया और प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को कमजोर करने के लिए ‘यूएसएड’ का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि यह कदम बांग्लादेश और चीन के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के कारण उठाया गया। बेंज के अनुसार, अमेरिकी संगठनों ने सांस्कृतिक और जातीय तनावों का उपयोग करके बांग्लादेश में विभाजन पैदा करने और सरकार विरोधी प्रदर्शनों को बढ़ावा देने की योजना बनाई। उन्होंने कहा कि अमेरिका की रणनीति चीन के प्रभाव को रोकने, सैन्य ठिकाने सुरक्षित करने और आर्थिक पहुंच बनाए रखने की थी।

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