Home Blog Page 36

New Delhi Railway Incident: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़, 18 की मौत खिड़की-गेट से ...

New Delhi Railway Incident: शनिवार रात को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्रयागराज महाकुंभ जाने वाली भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। इस हादसे में 10 महिलाओं, 3 बच्चों समेत 18 लोगों की मौत हो गई। तो चलिए आपको इस लेख में पुरे मामले के बारे में बताते है।

और पढ़े :Sambhal violence case: जामा मस्जिद की दीवारों पर लगे हिंसा के 74 उपद्रवियों के पोस्टर जारी, पुलिस करेगी सख्त कार्रवाई . 

जानें क्या है पूरा मामला ? 

बीती रात प्रयागराज महाकुंभ में जा रहे यात्रीयो की भीड़ के कारण शनिवार रात नई दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ मच गई। इस हादसे में 10 महिलाओं और 3 बच्चों समेत 18 लोगों की मौत हो हाई है। घायलों को इलाज के लिए एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वही दिल्ली के एलजी ने अस्पताल में घायलों से मुलाकात की। इससे पहले पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हादसे पर दुख जताया।

आपको बता दें, इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस की ओर से जारी की गई। डीसीपी ने बताया कि सीएमआई के अनुसार स्टेशन पर हर घंटे 1,500 जनरल टिकटों की भी बिक्री हुई और ये यात्री भी प्लेटफॉर्म पर पहुंच गए। इसके चलते प्लेटफॉर्म 14 और प्लेटफॉर्म 16 पर एस्कलेटर के पास भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।

भीड़ को देखते हुए विशेष ट्रेनें

दिल्ली अग्निशमन सेवा के प्रमुख अतुल गर्ग ने कहा कि बचाव कार्य में मदद के लिए अधिकारियों ने तुरंत मौके पर बचाव दल और दमकल की चार गाड़ियों को भेजा गया। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि भारी भीड़ के कारण कुछ यात्रियों ने एक-दूसरे को धक्का दे दिया, जिससे कुछ यात्रियों को चोटें आईं। प्राथमिक उपचार के लिए उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
वहीं, सोशल मीडिया पोस्ट में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कहा कि स्टेशन पर हालात नियंत्रण में हैं। दिल्ली पुलिस और सेंट्रल रिजर्व पुलिस बल के जवान मौके पर हैं। घायलों को अस्पताल ले जाया गया है। भीड़ को देखते हुए विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं।

तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा

तेजस्वी यादव ने घटना पर दुख जताया और रेलवे स्टेशन पर की गई व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए. तेजस्वी यादव ने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ से मची अव्यवस्था और असामयिक मौतों से मन दुखी है. इतने सरकारी संसाधनों के बावजूद भगदड़ में श्रद्धालु अपनी जान गंवा रहे हैं और डबल इंजन की सरकार इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं पर लीपापोती कर पीआर करने में व्यस्त है. आम लोगों और श्रद्धालुओं की बजाय सरकार का ध्यान मीडिया मैनेजमेंट, वीआईपी लोगों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं तक सीमित है.” उन्होंने आगे कहा कि दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं.

Sikhism in Kenya: केन्या में सिख समुदाय का ऐतिहासिक सफर!  प्रवास से समृद्धि तक, संघर्...

0

Sikhism in Kenya: केन्या में सिख समुदाय की अनुमानित संख्या लगभग 20,000 है। यह समुदाय दशकों से यहां बसा हुआ है और इसने देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। केन्या में कई गुरुद्वारे स्थित हैं, जो सिख समुदाय की धार्मिक आस्था और एकजुटता का प्रतीक हैं।

और पढ़ें: Top Gurdwaras in Gujarat: अहमदाबाद के 6 प्रतिष्ठित गुरुद्वारे! जहां भक्ति, विरासत और मानवता एक साथ गूंजती है

केन्या में सिखों का आगमन और इतिहास- Sikhism in Kenya

सिखों का पूर्वी अफ्रीका में आगमन 1890 के दशक में शुरू हुआ। उस समय भारतीय उपमहाद्वीप से कई लोग रेलवे निर्माण परियोजनाओं के तहत काम करने के लिए यहां आए थे। सिखों को उनकी मजदूरी, ईमानदारी, कड़ी मेहनत और कुशलता के लिए जाना जाता था। उन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष से खुद को एक सम्मानित समुदाय के रूप में स्थापित किया।

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Punjab Insta (@panjab.insta)

केन्या में सिखों की प्रमुख भूमिका तब शुरू हुई जब ब्रिटिश सरकार ने युगांडा रेलवे निर्माण के लिए भारत से मजदूरों और कारीगरों को बुलाया। सिखों को कुशल बढ़ई, लोहार और राजमिस्त्री के रूप में जाना जाता था। रेलवे के निर्माण के दौरान कई शेरों के हमलों और कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद, उन्होंने अपना काम जारी रखा और रेलवे को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।

सिखों को उनकी बहादुरी और अनुशासन के कारण जल्द ही पुलिस बलों और प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया गया। उन्होंने पूर्वी अफ्रीका में कानून और व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सिख समुदाय का विस्तार और योगदान

रेलवे निर्माण पूरा होने के बाद, कई सिख वापस भारत लौट गए, लेकिन कई अन्य केन्या में ही बस गए। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में काम किया, जिनमें शामिल हैं:

  • निर्माण और सिविल इंजीनियरिंग
  • फर्नीचर निर्माण
  • कृषि और व्यापार
  • स्वास्थ्य सेवाएं
  • शिक्षा और प्रशासन

सिख समुदाय ने गुरुद्वारों का निर्माण किया, जो न केवल धार्मिक गतिविधियों के केंद्र बने बल्कि सामाजिक मेलजोल और शिक्षा का भी केंद्र बने। कई खालसा स्कूलों की स्थापना की गई, जिनमें सभी जातियों और धर्मों के बच्चों को शिक्षा दी जाती थी।

केन्या में सिखों का धार्मिक जीवन

केन्या में सिखों ने अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखा है। उन्होंने कई गुरुद्वारे बनाए हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:

  1. ईस्ट अफ्रीका रामगढ़िया बोर्ड
  2. सीरी गुरुद्वारा बाजार
  3. नामधारी संगत
  4. सीरी गुरु सिंह सभा
  5. बाल्मीकि मंदिर
  6. रामगढ़िया रेलवे गुरुद्वारा

गुरुद्वारे केवल पूजा स्थलों के रूप में सीमित नहीं हैं; ये सामुदायिक सभाओं, शिक्षा और सामाजिक कार्यों के लिए भी उपयोग किए जाते हैं।

सिखों का आर्थिक और सामाजिक योगदान

सिखों ने केन्या की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपने कौशल और ज्ञान का उपयोग करके कई क्षेत्रों में योगदान दिया, जैसे:

  • इंजीनियरिंग और मैकेनिक्स: सिखों ने शुरुआती दिनों में बैलगाड़ियों और फिर मोटर वाहनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • स्वास्थ्य सेवाएं: सिखों ने अस्पतालों, क्लीनिकों और डिस्पेंसरियों की स्थापना की, जिससे स्थानीय समुदाय को स्वास्थ्य सेवाएं मिलीं।
  • शिक्षा: सिख समुदाय ने कई विद्यालय और कॉलेज स्थापित किए, जिससे हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला।
  • खेल: सिखों ने हॉकी, क्रिकेट, टेबल टेनिस और अन्य खेलों में भाग लिया और कई प्रतियोगिताएं जीतीं।

राजनीतिक और सामाजिक जीवन में भूमिका

सिख समुदाय ने केन्या की राजनीति में भी योगदान दिया है। नैरोबी सिटी काउंसिल में सिखों ने उच्च पदों पर कार्य किया। नैरोबी के पहले एशियाई डिप्टी मेयर भी एक सिख थे (अल्डरमैन मोहन सिंह)।

हालांकि, राजनीति में उनकी भागीदारी सीमित रही है। अधिकांश सिखों ने खुद को व्यापार और प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रखा है।

सिखों का वर्तमान और भविष्य

आज, केन्या में सिख समुदाय एक मध्यम आय वर्ग के रूप में स्थापित है। वे अब व्यवसाय, चिकित्सा, शिक्षा, इंजीनियरिंग और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर चुके हैं। केन्या में सिख समुदाय सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से भाग लेता है।

और पढ़ें: Sikhism in Portugal: 1990 के दशक से बढ़ता हुआ अल्पसंख्यक धर्म, 35,000 सिखों का समुदाय और धार्मिक पहचान में महत्वपूर्ण बदलाव

Ashutosh Gowariker 5 Top Movies: हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्देशक और उनकी 5 बेहतरीन फि...

0

Ashutosh Gowariker 5 Top Movies: हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध निर्देशक आशुतोष गोवारिकर का नाम उन फिल्ममेकर्स में शुमार है, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को ऐतिहासिक और पीरियड ड्रामा फिल्मों की एक नई ऊंचाई तक पहुंचाया है। 15 फरवरी 1964 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में जन्मे गोवारिकर ने अपने करियर की शुरुआत बतौर अभिनेता की थी। उन्होंने शाहरुख खान के टीवी शो ‘सर्कस’ और मशहूर क्राइम शो ‘CID’ में भी काम किया। हालांकि, बाद में उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा और अपनी अलग पहचान बनाई।

और पढ़ें: Ranveer Allahbadia crazy fan Rohini Arzoo: रणवीर इलाहबादिया को मानती हैं पति, दिल पर बनवाया टैटू और रखा करवाचौथ का व्रत – कौन हैं रोहिणी आरजू?

आशुतोष गोवारिकर का सिनेमा इतिहास, भारतीय संस्कृति और देशभक्ति से जुड़ा रहा है। उनकी फिल्मों को दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों की सराहना मिली है। आज उनके 61वें जन्मदिन के मौके पर हम उनकी 5 बेहतरीन फिल्मों पर नजर डालते हैं, जो आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई हैं।

जोधा अकबर (2008) -Ashutosh Gowariker 5 Top Movies

ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय बच्चन अभिनीत यह फिल्म मुगल सम्राट अकबर और राजपूत राजकुमारी जोधा बाई की प्रेम कहानी पर आधारित थी। भव्य सेट, ऐतिहासिक सटीकता और बेहतरीन निर्देशन के कारण यह फिल्म हिंदी सिनेमा की बेहतरीन पीरियड ड्रामा फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म को ‘साओ पाउलो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में ‘बेस्ट विदेशी भाषा फिल्म’ का अवॉर्ड भी मिला था।

Ashutosh Gowariker 5 Top Movies Bollywood
source: Google

प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स

खेलें हम जी जान से (2010)

यह फिल्म भारत के स्वतंत्रता संग्राम की सच्ची घटना ‘चिट्टागांव विद्रोह’ पर आधारित थी। इस फिल्म में अभिषेक बच्चन, दीपिका पादुकोण और सिकंदर खेर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों की कहानी दिखाई गई थी। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन इसके देशभक्ति से भरपूर विषय और निर्देशन को खूब सराहा गया।

Ashutosh Gowariker 5 Top Movies Bollywood
source: Google

प्लेटफॉर्म: यूट्यूब

लगान (2001)

आमिर खान स्टारर ‘लगान’ 2001 में रिलीज हुई थी और यह भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म में अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय किसानों के संघर्ष को एक क्रिकेट मैच के रूप में दिखाया गया था। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और यह ब्लॉकबस्टर साबित हुई।

Ashutosh Gowariker 5 Top Movies Bollywood
source: Google

इस फिल्म को 2002 के ऑस्कर अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म’ के लिए नामांकित किया गया था। हालांकि, यह ‘नो मैन्स लैंड’ से पीछे रह गई, लेकिन इसने 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स जीते थे।

प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स

मोहनजोदड़ो (2016)

ऋतिक रोशन और पूजा हेगड़े अभिनीत यह फिल्म सिंधु घाटी सभ्यता की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। फिल्म के लिए काफी रिसर्च की गई थी और इसे एक भव्य ऐतिहासिक फिल्म के रूप में पेश किया गया। हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई, लेकिन इसमें ऋतिक रोशन के अभिनय को समीक्षकों की सराहना मिली।

Ashutosh Gowariker 5 Top Movies Bollywood
source: Google

प्लेटफॉर्म: डिज्नी प्लस हॉटस्टार

स्वदेस (2004)

शाहरुख खान स्टारर ‘स्वदेस’ भारतीय सिनेमा की एक संवेदनशील और प्रेरणादायक फिल्म मानी जाती है। इस फिल्म में एक NRI वैज्ञानिक की कहानी दिखाई गई है, जो अमेरिका से भारत लौटता है और अपने गांव के विकास और बदलाव के लिए प्रयास करता है। इस फिल्म के भावनात्मक दृश्यों, सामाजिक संदेश और मधुर संगीत ने इसे हिंदी सिनेमा की मील का पत्थर बना दिया।

Ashutosh Gowariker 5 Top Movies Bollywood
source: Google

हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म बहुत बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन समय के साथ यह एक कल्ट क्लासिक बन गई। फिल्म के गाने ‘ये जो देश है तेरा’ और ‘पल पल है भारी’ आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं।

प्लेटफॉर्म: प्राइम वीडियो

आशुतोष गोवारिकर ने हिंदी सिनेमा को कई ऐतिहासिक और प्रेरणादायक फिल्में दी हैं। उनकी फिल्में भारतीय इतिहास, संस्कृति और समाज के गहरे पहलुओं को छूती हैं। चाहे वह ‘लगान’ हो या ‘स्वदेस’, उनकी कहानियां आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

उनकी फिल्मों की भव्यता, रिसर्च, और गहराई उन्हें अन्य निर्देशकों से अलग बनाती है। उनकी अगली फिल्म का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार रहेगा।

और पढ़ें: Ranveer Allahbadia Samay Raina Controversy: समय रैना के शो में रणवीर अल्लाहबादिया ने बोले ऐसे शब्द, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

American Aircraft F-35: प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिकी दौरे पर एफ-35 ऑफर, एलन मस्क की आ...

0

American Aircraft F-35: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को अत्याधुनिक एफ-35 फाइटर जेट देने की पेशकश की। यह विमान दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में इसके साथ हुई दुर्घटनाओं और तकनीकी खामियों ने इस पर कई सवाल खड़े किए हैं।

और पढ़ें: Trump statement on Bangladesh: बांग्लादेश पर भारत को पूरी छूट, पीएम मोदी तय करेंगे भविष्य, ट्रंप ने दिया फ्री हैंड

एफ-35: एक महंगा लेकिन विवादास्पद फाइटर जेट- American Aircraft F-35

एफ-35 को अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने विकसित किया है। यह एक सिंगल-इंजन, सिंगल-सीट स्टील्थ मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे हवा से हवा में युद्ध, हवा से जमीन पर हमला और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए डिजाइन किया गया है।

हालांकि, इस विमान की कीमत और रखरखाव खर्च बहुत अधिक है। इसके अलावा, 2018 से अब तक 12 एफ-35 दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। हाल ही में, नवंबर 2024 में, अमेरिका के अलास्का एयरफोर्स बेस पर एक एफ-35 क्रैश हो गया था, हालांकि पायलट सुरक्षित बच गए थे।

एलन मस्क की आलोचना: एफ-35 को बताया बेकार

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और टेक उद्योग के दिग्गज एलन मस्क भी एफ-35 की आलोचना कर चुके हैं। उनके पुराने ट्वीट्स अब फिर से वायरल हो रहे हैं, जिनमें उन्होंने कहा था:

  • “कुछ बेवकूफ अभी भी मानवयुक्त लड़ाकू जेट बना रहे हैं, जबकि ड्रोन टेक्नोलॉजी बेहतर विकल्प है।”
  • “एफ-35 का डिज़ाइन खराब है, यह बहुत महंगा है और किसी भी क्षेत्र में महारत नहीं रखता। यह इतिहास का सबसे खराब सैन्य निवेश है।”

डोनाल्ड ट्रंप का बयान: भारत को एफ-35 देने की योजना

डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत-अमेरिका की रक्षा साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा। ट्रंप ने कहा, “इस वर्ष से हम भारत को कई अरब डॉलर की सैन्य बिक्री बढ़ाएंगे और एफ-35 विमान की आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त करेंगे।”

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार विवाद: टैरिफ पॉलिसी

पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर भी चर्चा हुई। ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत कई देशों पर ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ लागू कर दिया। इसका मतलब है कि अगर कोई देश अमेरिकी सामानों पर टैरिफ बढ़ाता है, तो अमेरिका भी उस देश के सामान पर उतना ही टैरिफ लगाएगा।

टैरिफ क्या होता है?

टैरिफ यानी आयात शुल्क किसी भी देश द्वारा अपने घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए लगाया जाता है। यह किसी उत्पाद की कीमत को बढ़ा सकता है। उदाहरण के लिए:

  • अगर किसी वस्तु की कीमत 100 है और उस पर 10% टैरिफ लगता है, तो उसकी कीमत 110 हो जाएगी।
  • टैरिफ अप्रत्यक्ष कर होता है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

क्या भारत वास्तव में ‘टैरिफ किंग’ है?

डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर उच्च टैरिफ लगाने का आरोप लगाते हुए उसे ‘टैरिफ किंग’ कहा। लेकिन ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के मुताबिक, अमेरिका खुद कई उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ लगाता है। उदाहरण के लिए:

  • अमेरिका में डेयरी उत्पादों पर 188%
  • फल और सब्जियों पर 132%
  • अनाज और फूड प्रोडक्ट्स पर 193%
  • तंबाकू पर 150% टैरिफ लगाया जाता है।

डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप भारत का टैरिफ

भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत टैरिफ लागू करता है, जबकि अमेरिका कई बार अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करता है।

पीएम मोदी का अमेरिकी दौरा रक्षा और व्यापार दोनों पहलुओं से महत्वपूर्ण रहा। एफ-35 को लेकर भारत को सावधानीपूर्वक निर्णय लेना होगा, खासकर जब एलन मस्क और अन्य विशेषज्ञ इसकी आलोचना कर चुके हैं। वहीं, भारत-अमेरिका व्यापार विवाद को भी हल करने की आवश्यकता है, ताकि दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत हो सकें।

और पढ़ें: USAID Funding against India: क्या अमेरिका ने भारत की राजनीति में दखल दिया? पूर्व अधिकारी के खुलासे से बढ़ी बहस

Rishabh Pant life saviour Rajat news: ऋषभ पंत के लिए जान बचाने वाले रजत की जिंदगी अब ...

0

Rishabh Pant life saviour Rajat news: दिसंबर 2022 की कड़ाके की ठंड वाली रात थी जब रजत कुमार और निशु कुमार ने दिल्ली-देहरादून हाईवे पर रुड़की के पास एक जली हुई मर्सिडीज को देखा। कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी और उलटी पड़ी थी। दोनों युवक बिना किसी देरी के कार की ओर बढ़े और उसमें फंसे घायल व्यक्ति को बाहर निकाला। उन्हें तब तक यह नहीं पता था कि वह घायल कोई और नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी ऋषभ पंत थे।

और पढ़ें: Kottayam nursing college ragging case: कोट्टायम नर्सिंग कॉलेज में जूनियर छात्रों पर बर्बर अत्याचार, पांच आरोपी निलंबित

ऋषभ पंत को बचाने वाले बने थे हीरो- Rishabh Pant news

रजत और निशु को बस इतना पता था कि किसी को मदद की जरूरत है। उन्होंने पुलिस को फोन किया और मदद आने तक ऋषभ के पास रुके। बाद में, जब ऋषभ को होश आया और उन्हें इस घटना की पूरी जानकारी मिली, तो उन्होंने रजत और निशु को अपना जीवन बचाने के लिए धन्यवाद दिया। ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि “जिन हीरोज़ ने मेरी मदद की, मैं उनका हमेशा आभारी और ऋणी रहूंगा।”

Rishabh Pant life saviour Rajat news
source: Google

कृतज्ञता में दी थी स्कूटी, अब खुद फंसे संकट में

ऋषभ पंत ने अपनी जान बचाने वाले इन युवकों को स्कूटी गिफ्ट की थी। लेकिन इस घटना के कुछ महीनों बाद ही रजत खुद जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। उत्तराखंड के झबरेड़ा अस्पताल में भर्ती रजत अब एक गंभीर आरोप का सामना कर रहा है, जिसका वह सिरे से खंडन करता है।

प्रेम में असफलता और आत्महत्या की कोशिश

25 वर्षीय रजत और उसकी 21 वर्षीय प्रेमिका मनु कश्यप के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। हालांकि, अलग-अलग जाति और परिवारों की असहमति के कारण वे एक नहीं हो सके। दोनों के परिवार ने उनकी शादियां कहीं और तय करनी शुरू कर दी। इस सामाजिक बंधन और प्रेम में असफलता ने दोनों को इतना निराश कर दिया कि उन्होंने आत्महत्या करने का फैसला कर लिया।

Rishabh Pant life saviour Rajat news
source: Google

रविवार की शाम को, रजत और मनु ने अपने गांव बुच्चा बस्ती के बाहरी इलाके में गन्ने के खेत में जाकर जहर खा लिया। कुछ देर बाद एक ग्रामीण ने उन्हें तड़पते हुए देखा और शोर मचाया। जब तक परिवार वाले पहुंचे, तब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका था। उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मनु के परिवार ने उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन मंगलवार की सुबह उसकी मौत हो गई। वहीं, रजत की हालत गंभीर बनी हुई है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है।

मनु की मां ने लगाया रजत पर हत्या का आरोप

मनु के अंतिम संस्कार के कुछ ही घंटे बाद, उसकी मां ने पुरकाजी पुलिस स्टेशन पहुंचकर रजत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि रजत ने मनु को जहर दिया और उसकी हत्या कर दी।

अब वह गांव, जिसने कभी रजत की बहादुरी और मानवता की मिसाल दी थी, वहीं अब इस मामले को लेकर चर्चा में है। जाति और परिवार से बगावत कर प्रेम प्रसंग में शामिल होने का मामला अब दो समुदायों के बीच विवाद का कारण बन रहा है।

पुलिस ने शुरू की जांच

मुजफ्फरनगर के एसपी सत्यनारायण प्रजापत ने बताया कि मनु की मां की शिकायत आने से पहले तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था। अब थाना प्रभारी जयवीर सिंह की अगुवाई में स्थानीय पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।

जयवीर सिंह ने बताया, “हम मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। महिला के परिवार से हमें लिखित शिकायत मिली है, जिसमें रजत पर मनु को जहर देने का आरोप लगाया गया है। जांच के आधार पर ही अगला कदम तय किया जाएगा।”

डॉक्टरों ने दी जानकारी

झबरेड़ा के प्रज्ञा अस्पताल के डॉक्टर दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि दोनों ने एक खतरनाक कीटनाशक पी लिया था।
“हमने तुरंत इलाज शुरू किया। मनु का परिवार उसे दूसरे अस्पताल ले गया। वहीं रजत की हालत अब बेहतर हो रही है।”

जिस युवक रजत कुमार ने एक समय स्टार क्रिकेटर ऋषभ पंत की जान बचाई थी, वही आज खुद अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। अब पुलिस की जांच से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि रजत निर्दोष है या दोषी। लेकिन एक बात तो साफ है कि जिस गांव ने एक समय रजत की बहादुरी पर गर्व किया था, आज वही गांव उसकी प्रेम कहानी और कानूनी उलझनों पर चर्चा कर रहा है।

और पढ़ें: Sneha Kushwaha Case: वाराणसी के हॉस्टल में सासाराम की छात्रा की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, जानें क्या है पूरा ममाला

Kottayam nursing college ragging case: कोट्टायम नर्सिंग कॉलेज में जूनियर छात्रों पर ब...

0

Kottayam nursing college ragging case: केरल के कोट्टायम जिले में एक नर्सिंग कॉलेज से रैगिंग की एक भयावह घटना सामने आई है। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। कॉलेज के सीनियर छात्रों ने अपने जूनियर साथियों के साथ ऐसी अमानवीय हरकत की, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है। रैगिंग के दौरान सीनियर्स ने जूनियर्स को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

और पढ़ें: Sneha Kushwaha Case: वाराणसी के हॉस्टल में सासाराम की छात्रा की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, जानें क्या है पूरा ममाला

कैसे हुआ बर्बर रैगिंग कांड? (Kottayam nursing college ragging case)

यह घटना गांधीनगर पुलिस थाना क्षेत्र में स्थित एक नर्सिंग कॉलेज की है। तीन जूनियर छात्रों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनके सीनियर छात्रों ने उनके कपड़े उतरवा दिए और उनके प्राइवेट पार्ट पर भारी डंबल बांध दिए। इस भयानक यातना के कारण पीड़ित छात्र असहनीय दर्द से तड़प उठे। लेकिन, सीनियर्स को इनकी कोई परवाह नहीं थी। उन्होंने उन पर कंपास और नुकीली चीजों से हमला किया, जिससे उनके शरीर पर कई गहरे घाव हो गए। जब पीड़ित छात्र दर्द से चीखने लगे, तो सीनियरों ने उनके जख्मों पर जबरदस्ती लोशन लगा दिया। किसी तरह वहां से भागने के बाद, पीड़ित छात्रों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।

Kottayam nursing college ragging case
source: Google

पुलिस ने तीन आरोपी गिरफ्तार किए, अन्य की तलाश जारी

घटना की सूचना मिलने के बाद गांधीनगर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और तीन आरोपी छात्रों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो अन्य फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा। इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने पांच आरोपियों को निलंबित कर दिया और जांच के आदेश दिए।

कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया

कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ. लिनी जोसेफ ने बताया कि शुरुआत में छात्रों ने इस घटना के बारे में कुछ नहीं बताया। लेकिन, जब एक पीड़ित छात्र के माता-पिता ने क्लास टीचर को फोन करके जानकारी दी, तब प्रशासन को इस रैगिंग के बारे में पता चला। मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज ने तुरंत आंतरिक जांच शुरू की।

प्राचार्य ने कहा कि एंटी-रैगिंग एक्ट के तहत आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी।

केरल में पहले भी हुए हैं रैगिंग के खौफनाक मामले

केरल में यह पहला मामला नहीं है जब रैगिंग के कारण किसी छात्र को प्रताड़ित किया गया हो। इससे पहले भी कई मामलों में रैगिंग के कारण छात्रों की जान जा चुकी है या वे गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

Kottayam nursing college ragging case
source: Google

एर्णाकुलम का मामला

पिछले साल केरल के एर्णाकुलम में 15 वर्षीय छात्र की आत्महत्या ने पूरे राज्य को हिला दिया था। मृतक की मां रंजना पीएम ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया था कि उनके बेटे को स्कूल में खतरनाक रैगिंग और धमकियों का सामना करना पड़ा, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गया और आत्महत्या करने के लिए मजबूर हुआ।

कन्नूर में भी हुई थी रैगिंग की वारदात

2022 में कन्नूर जिले में एक छात्र को सिर्फ इसलिए पीटा गया, क्योंकि उसने अपने बाल लंबे कर रखे थे। 12वीं के सीनियर छात्रों ने इस बात को लेकर उसे बुरी तरह मारा और उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

केरल यूनिवर्सिटी में छात्र की मौत

2024 में केरल यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज में जेएस सिद्धार्थ नाम के छात्र की लाश बाथरूम में मिली थी। पुलिस जांच में पता चला कि कुछ सीनियर छात्रों ने उसे हॉस्टल में पीटा था और उस पर एक लड़की से दुर्व्यवहार करने का झूठा आरोप लगाया था। इस मानसिक प्रताड़ना के कारण सिद्धार्थ ने आत्महत्या कर ली।

और पढ़ें: UP News: बाइक विवाद से शुरू हुई हिंसा में दूसरी मौत, बरवा उपाध्याय गांव में तनाव और आरोपी का एनकाउंटर

Unified Pension Scheme: 1 अप्रैल से लागू होने जा रही है UPS, केंद्र सरकार की नई पहल स...

0

Unified Pension Scheme: केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का ऐलान कर दिया है। यह स्कीम अगस्त 2024 में घोषित की गई थी और इसे 1 अप्रैल 2025 से लागू किया जाएगा। UPS का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। यह स्कीम उन कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होगी जो 1 जनवरी 2004 या उसके बाद नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के तहत शामिल हुए थे।

और पढ़ें: Sneha Kushwaha Case: वाराणसी के हॉस्टल में सासाराम की छात्रा की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, जानें क्या है पूरा ममाला

क्या है यूनिफाइड पेंशन स्कीम? (Unified Pension Scheme)

यूनिफाइड पेंशन स्कीम सरकार की एक नई योजना है, जो सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग को देखते हुए लाई गई है। यह योजना NPS के तहत कवर किए गए कर्मचारियों को एक नया विकल्प देती है, जिससे वे अपने पेंशन लाभ को बढ़ा सकते हैं। UPS के तहत, सरकार कर्मचारियों के बेसिक वेतन और महंगाई भत्ते (DA) का 18.5% योगदान देगी, जबकि कर्मचारी 10% योगदान जारी रखेंगे।

Unified Pension Scheme UPS
source: Google

UPS के तहत मिलने वाले लाभ:

  1. गारंटीड पेंशन: रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी को पिछले 12 महीनों की औसत सैलरी का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा।
  2. महंगाई के अनुसार वृद्धि: पेंशन में महंगाई के हिसाब से समय-समय पर वृद्धि की जाएगी।
  3. फैमिली पेंशन: कर्मचारी की मृत्यु के बाद, उनके परिवार को 60% पेंशन मिलेगी।
  4. रिटायरमेंट बेनिफिट्स: ग्रेच्युटी और एकमुश्त राशि का भुगतान किया जाएगा।
  5. मिनिमम पेंशन: कम से कम 10 साल की नौकरी करने वाले कर्मचारियों को ₹10,000 प्रति माह पेंशन की गारंटी मिलेगी।
  6. वॉलंटरी रिटायरमेंट का विकल्प: 25 साल की सेवा पूरी करने के बाद कर्मचारी वॉलंटरी रिटायरमेंट ले सकते हैं। उनकी पेंशन निर्धारित रिटायरमेंट उम्र से शुरू होगी।

UPS के लिए कौन पात्र होगा?

इस योजना का लाभ वही कर्मचारी उठा सकते हैं जिन्होंने कम से कम 10 साल की सरकारी सेवा पूरी कर ली है। इसके अलावा, जो कर्मचारी पहले से NPS में शामिल हैं, वे UPS में शिफ्ट हो सकते हैं। हालांकि, एक बार UPS में आने के बाद वापस NPS में नहीं जाया जा सकता।

Unified Pension Scheme UPS
source: Google

UPS में कैसे ट्रांसफर किया जाएगा फंड?

यदि कोई कर्मचारी NPS से UPS में आना चाहता है, तो उसे अपना पूरा NPS फंड UPS में ट्रांसफर करना होगा। यदि NPS में जमा राशि UPS के लिए तय न्यूनतम रकम से कम होगी, तो कर्मचारी को अंतर की राशि खुद भरनी होगी। यदि NPS में जमा राशि तय सीमा से अधिक होगी, तो अतिरिक्त राशि कर्मचारी को वापस कर दी जाएगी।

DA और DR का गणना कैसे होगी?

UPS के तहत,

  • सरकार का योगदान 14% से बढ़ाकर 18.5% कर दिया गया है।
  • कर्मचारी का योगदान बेसिक वेतन और महंगाई भत्ता (DA) का 10% बना रहेगा।
  • महंगाई राहत (DR) की गणना उसी तरह की जाएगी जैसे वर्तमान कर्मचारियों के लिए DA की जाती है। DR का भुगतान रिटायरमेंट के बाद ही शुरू होगा।
  • रिटायरमेंट के बाद हर 6 महीने की सेवा पर, बेसिक वेतन और DA का 10% एकमुश्त भुगतान किया जाएगा।

UPS vs NPS: कौन-सी योजना बेहतर?

विशेषता NPS UPS
गारंटीड पेंशन ❌ नहीं ✅ हां
सरकार का योगदान 14% 18.5%
कर्मचारी का योगदान 10% 10%
पेंशन की गणना मार्केट-आधारित अंतिम वेतन का 50%
फैमिली पेंशन उपलब्ध उपलब्ध
DA & DR समायोजन ❌ नहीं ✅ हां

UPS उन कर्मचारियों के लिए बेहतर विकल्प है, जो पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसी गारंटीड पेंशन चाहते हैं।

यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) केंद्र सरकार द्वारा 23 लाख से अधिक कर्मचारियों के लिए एक बड़ी पहल है। यह योजना रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करेगी और पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) की मांगों को भी आंशिक रूप से पूरा करेगी। हालांकि, एक बार UPS में शामिल होने के बाद कर्मचारी वापस NPS में नहीं जा सकते। यह योजना 1 अप्रैल 2025 से लागू होगी, जिससे लाखों कर्मचारियों को बेहतर पेंशन और सुरक्षा मिलेगी।

और पढ़ें: UP News: बाइक विवाद से शुरू हुई हिंसा में दूसरी मौत, बरवा उपाध्याय गांव में तनाव और आरोपी का एनकाउंटर

Sambhal violence case: जामा मस्जिद की दीवारों पर लगे हिंसा के 74 उपद्रवियों के पोस्टर...

0

Sambhal violence case: उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान 24 नवंबर को भड़की हिंसा के मामले में पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। फरार चल रहे उपद्रवियों की धर-पकड़ के लिए पुलिस ने एक नया तरीका अपनाया है। 74 उपद्रवियों की पहचान कर उनके पोस्टर शहर भर में चिपकाए गए हैं, जिससे आम जनता से उनकी पहचान करने में मदद मांगी गई है। पुलिस ने जानकारी देने वालों के लिए इनाम की भी घोषणा की है।

और पढ़ें: UP News: बाइक विवाद से शुरू हुई हिंसा में दूसरी मौत, बरवा उपाध्याय गांव में तनाव और आरोपी का एनकाउंटर

पोस्टर लगाने पर विवाद, एएसपी ने सुनाई खरी-खरी- Sambhal violence case

शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद पुलिस ने जामा मस्जिद की पश्चिमी दीवार पर भी पोस्टर लगाए, जहां हिंसा सबसे ज्यादा भड़की थी। कुछ ही देर बाद जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली सहित अन्य लोग वहां पहुंच गए और मस्जिद की दीवारों पर पोस्टर लगाने का विरोध करने लगे।

मौके पर पहुंचे अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) श्रीश चंद्र ने विरोध करने वालों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि अपराधियों की पहचान के लिए लगाए गए पोस्टर नहीं हटेंगे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब उपद्रवियों ने पत्थरबाजी और आगजनी की थी, तब मस्जिद कमेटी के लोगों ने उन्हें रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया।

क्या है हिंसा का मामला?

24 नवंबर 2023 को संभल की जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान भारी हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन 74 उपद्रवी अभी भी फरार हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों के आधार पर इनकी पहचान की है और पोस्टर जारी किए हैं।

मस्जिद कमेटी ने जताया विरोध, एएसपी का सख्त रुख

जब मस्जिद कमेटी के लोगों ने मस्जिद की दीवार पर पोस्टर लगाने का विरोध किया, तो एएसपी ने साफ कहा कि “यह संपत्ति आपकी नहीं, बल्कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की है। जो निर्णय लेना होगा, वह ASI लेगा।” उन्होंने यह भी पूछा कि जब हिंसा हो रही थी, तब मस्जिद कमेटी के लोगों ने उपद्रवियों को रोकने की कोई कोशिश क्यों नहीं की।

पोस्टर नहीं हटेंगे: पुलिस का कड़ा संदेश

मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली ने पोस्टर हटाने की मांग करते हुए कहा कि पुलिस चाहे तो एक बोर्ड लगा सकती है, लेकिन दीवारों पर इस तरह पोस्टर लगाना सही नहीं है। इस पर एएसपी ने सख्त लहजे में कहा कि “हमें अपराधियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करनी है, यह हमें कोई नहीं बताएगा। यह पोस्टर नहीं हटाए जाएंगे। जिन लोगों ने हिंसा की, वे किसी भी हाल में बख्शे नहीं जाएंगे।”

हिंसा के मुख्य आरोपी अब भी फरार

संभल हिंसा में शामिल 74 आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। पोस्टर लगाने के बाद पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले हैं और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस ने साफ किया कि इस हिंसा में शामिल कोई भी दोषी कानून से बच नहीं पाएगा।

संभल हिंसा मामले में पुलिस की सख्ती लगातार जारी है। 74 उपद्रवियों के पोस्टर जारी कर पुलिस ने जनता से उनकी पहचान के लिए मदद मांगी है। मस्जिद कमेटी द्वारा पोस्टर लगाने का विरोध करने पर पुलिस ने स्पष्ट कर दिया कि कानून के तहत हर कार्रवाई होगी और कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।

और पढ़ें: Sneha Kushwaha Case: वाराणसी के हॉस्टल में सासाराम की छात्रा की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, जानें क्या है पूरा ममाला

Sneha Kushwaha Case: वाराणसी के हॉस्टल में सासाराम की छात्रा की संदिग्ध मौत, परिजनों ...

0

Sneha Kushwaha Case: वाराणसी के भेलूपुर स्थित रामेश्वरम गर्ल्स हॉस्टल में बिहार के सासाराम की 17 वर्षीय छात्रा स्नेहा कुशवाहा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस इसे आत्महत्या का मामला बता रही है, जबकि स्नेहा के परिजन इसे हत्या का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं।

और पढ़ें: UP News: बाइक विवाद से शुरू हुई हिंसा में दूसरी मौत, बरवा उपाध्याय गांव में तनाव और आरोपी का एनकाउंटर

इसी बीच, नौ दिन बाद सोमवार रात को भेलूपुर थाने में हॉस्टल संचालक रामेश्वरम पांडेय के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। यह कार्रवाई छात्र के पिता बिहार के रोहतास जिले के सासाराम तकिया निवासी सुनील सिंह की तहरीर पर की गई है।

घटना का विवरण-  Sneha Kushwaha Case

1 फरवरी 2025 को स्नेहा का शव हॉस्टल के कमरे में खिड़की से लटका हुआ पाया गया। परिजनों के अनुसार, स्नेहा का एक पैर बिस्तर पर मुड़ा हुआ था, जबकि दूसरा फर्श को छू रहा था, जो आत्महत्या के सामान्य मामलों से भिन्न है। परिजनों का दावा है कि उन्हें पुलिस या हॉस्टल प्रशासन द्वारा घटना की सूचना नहीं दी गई; बल्कि बनारस में रहने वाले एक परिचित से उन्हें इस घटना की जानकारी मिली। जब वे हॉस्टल पहुंचे, तो स्नेहा का शव पहले ही नीचे उतारकर बिस्तर पर रखा गया था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जल्दबाजी में पोस्टमार्टम करवाया और बिना उनकी अनुमति के अंतिम संस्कार के लिए दबाव डाला।

परिजनों के आरोप

स्नेहा के माता-पिता, सुनील सिंह और रूबी देवी, का कहना है कि 31 जनवरी की रात तक स्नेहा से उनकी बातचीत हुई थी और वह पूरी तरह सामान्य थी। वे मानने को तैयार नहीं हैं कि उनकी बेटी आत्महत्या कर सकती है। उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें पोस्टमार्टम से पहले शव देखने नहीं दिया और वाराणसी में ही अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया। परिजनों को हॉस्टल संचालक पर संदेह है और वे इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने सासाराम पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “यह बहुत दुखद घटना है। मैं व्यक्तिगत रूप से इस मामले की पूरी जानकारी लूंगा और यूपी सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग करूंगा। जो भी दोषी होगा, उसे सजा जरूर मिलेगी।”

Sneha Kushwaha Case sasaram crime news
source: Google

समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे हत्या करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने ट्वीट किया, “सासाराम (बिहार) की बिटिया स्नेहा कुशवाहा जो एजुकेशन के लिए वाराणसी में जेईई/नीट की तैयारी कर रही थी, हॉस्टल में लड़की की मौत प्रथम दृष्टया हत्या प्रतीत होती है।”

Sneha Kushwaha Case sasaram crime news
source: Google

स्थानीय प्रतिक्रिया

स्नेहा की मौत के बाद सासाराम में आक्रोश व्याप्त है। विभिन्न संगठनों ने कैंडल मार्च निकालकर स्नेहा को न्याय दिलाने की मांग की। भीम आर्मी के नेता अमित पासवान ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और स्नेहा को न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन किया जाएगा।

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Gumnaam Baba (@gumnaam.baba22)

पुलिस की प्रतिक्रिया

वाराणसी पुलिस इस मामले को आत्महत्या के रूप में देख रही है, लेकिन परिजनों के आरोपों और राजनीतिक दबाव के बीच निष्पक्ष जांच की मांग बढ़ती जा रही है। पुलिस ने कहा है कि वे सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं और सच्चाई सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं।

स्नेहा कुशवाहा की संदिग्ध मृत्यु ने कई सवाल खड़े किए हैं। परिजनों के आरोप, राजनीतिक हस्तक्षेप, और स्थानीय आक्रोश के बीच, यह आवश्यक है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच हो ताकि सच्चाई सामने आ सके और न्याय सुनिश्चित हो सके।

और पढ़ें: Virdharam Seoul Net Worth: ड्रग्स से करोड़ों कमाने वाले विरधाराम सियोल की संपत्ति जब्त होते ही सड़क हादसे में हुई मौत

Honda and Nissan officially part ways: होंडा और निसान की साझेदारी खत्म, दोनों कंपनियो...

0

Honda and Nissan officially part ways: जापान की दो सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों होंडा मोटर कंपनी और निसान मोटर कंपनी ने आधिकारिक तौर पर अलग होने का फैसला किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों कंपनियां वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तकनीकी उन्नति से निपटने के लिए नए तरीके तलाश रही हैं। तीन महीने पहले दोनों कंपनियों के बीच गठबंधन को लेकर काफी चर्चा थी और ऐसा लग रहा था कि यह साझेदारी उन्हें वैश्विक बाजार में नई ताकत देगी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, यह साफ होता गया कि दोनों कंपनियां कई रणनीतिक और परिचालन मुद्दों पर सहमत नहीं हो पा रही हैं।

और पढ़ें: Vespa 2025 Launch: Piaggio ने लॉन्च की 2025 Vespa 125 और 150 स्कूटर सीरीज, जानें नई खूबियां और कीमत

होंडा और निसान के प्रमुखों की प्रतिक्रियाएँ- Honda and Nissan officially part ways

होंडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तोशीहिरो मिबे ने गुरुवार को इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हालांकि यह परिणाम दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान हमें अपनी साझा ताकतों का बेहतर आकलन करने का अवसर मिला, जिसका उपयोग हम भविष्य की रणनीतिक साझेदारियों में कर सकते हैं।”

Honda and Nissan officially part ways
source: Google

निसान के सीईओ मकोतो उचिदा ने अधिक स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि निसान के लिए भविष्य में किसी साझेदारी पर निर्भर हुए बिना जीवित रहना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा, “हमें ऐसे साझेदार की जरूरत होगी जो हमें वित्तीय और तकनीकी स्थिरता प्रदान कर सके।” हालांकि, इस समय निसान के लिए नए साझेदार खोजना आसान नहीं होगा।

निसान की वित्तीय चुनौतियाँ और संभावित साझेदार

मैक्वेरी सिक्योरिटीज के विश्लेषक जेम्स होंग के अनुसार, “निसान को किसी बड़े ऑटोमेकर का समर्थन चाहिए, अन्यथा उसकी स्थिति कठिन होती जाएगी।”

Honda and Nissan officially part ways
source: Google

निसान और होंडा ने अपने अलगाव की पुष्टि करते हुए औपचारिक रूप से बातचीत समाप्त कर दी है, जिससे दोनों कंपनियां दिसंबर में हस्ताक्षरित समझौते के तहत निर्धारित ¥100 बिलियन ($650 मिलियन) ब्रेकअप शुल्क से बच गईं।

इस निर्णय के बाद, ताइवान की आईफोन निर्माता कंपनी होन हाई प्रिसिजन इंडस्ट्री कंपनी (फॉक्सकॉन) के लिए निसान के साथ संभावित सहयोग के रास्ते खुल गए हैं। फॉक्सकॉन के चेयरमैन यंग लियू ने कहा कि वे निसान में रेनॉल्ट एसए की 36% हिस्सेदारी खरीदने के लिए तैयार हैं। हालांकि, निसान के सीईओ उचिदा ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।

निसान के लिए नए दावेदार और वित्तीय संकट

ब्लूमबर्ग न्यूज के अनुसार, केकेआर एंड कंपनी निसान की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए इक्विटी या ऋण निवेश के विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है। निसान पहले से ही नौकरियों में कटौती और उत्पादन लागत कम करने की योजना बना रहा है।

ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के वरिष्ठ विश्लेषक तात्सुओ योशिदा ने कहा, “निसान को एक मजबूत वित्तीय साझेदार की आवश्यकता है।”

क्या चूक गया अवसर?

यदि होंडा और निसान का यह गठबंधन सफल होता, तो यह उन्हें वैश्विक ऑटो उद्योग में टॉप खिलाड़ियों के करीब ले जाता। यह साझेदारी जापान में टोयोटा मोटर कॉर्प के प्रभुत्व को चुनौती देने का भी एक प्रभावी तरीका हो सकती थी।

लेकिन अब अलग होने के बाद, होंडा और निसान वैश्विक उत्पादन के मामले में क्रमशः आठवें और नौवें स्थान पर बने हुए हैं। चीन की गेली ऑटोमोबाइल होल्डिंग्स लिमिटेड जैसी कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिससे जापानी ऑटो निर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन होती जा रही है।

होंडा की स्थिति और भविष्य की योजनाएँ

होंडा अभी भी तुलनात्मक रूप से बेहतर वित्तीय स्थिति में है। गुरुवार को जारी तीसरी तिमाही के परिणामों के अनुसार, कंपनी का अनुमानित परिचालन लाभ ¥1.42 ट्रिलियन रहेगा। इसके अलावा, होंडा अभी भी निसान और मित्सुबिशी मोटर्स के साथ बैटरी, स्वायत्त ड्राइविंग और ईवी तकनीक के क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी जारी रखेगा।

निसान के लिए आगे की राह

निसान को अपने पुराने मॉडल लाइनअप को अपडेट करने और नई तकनीकों में निवेश करने की आवश्यकता है, विशेष रूप से चीन और अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में, जहाँ प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ रही है।

और पढ़ें: 2025 MG Astor Launched: नए फीचर्स और किफायती कीमत के साथ भारत में लॉन्च, पैनोरमिक सनरूफ अब शाइन ट्रिम में