Shumaila Khan Bareilly: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे पाकिस्तानी नागरिक शुमायला खान ने सहायक अध्यापक की सरकारी नौकरी हासिल कर ली। 2015 में नौकरी शुरू करने वाली शुमायला के खिलाफ 9 साल बाद कार्रवाई हुई, जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने अक्टूबर 2024 में उसे निलंबित कर दिया। अब उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है और उससे 46.88 लाख रुपये वसूलने की तैयारी चल रही है।
कैसे हुआ खुलासा? (Shumaila Khan Bareilly)
जिलाधिकारी बरेली रविंद्र कुमार को एक गुप्त शिकायत मिली, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि शुमायला ने अपने नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान रामपुर सदर एसडीएम के कार्यालय से जारी एक फर्जी निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। सत्यापन में यह प्रमाण पत्र अमान्य पाया गया और पुष्टि हुई कि वह वास्तव में एक पाकिस्तानी नागरिक है।
एसडीएम सदर, रामपुर की जांच रिपोर्ट के अनुसार, शुमायला का निवास प्रमाण पत्र त्रुटिपूर्ण था और इसे बनवाने में जानबूझकर गलत जानकारी दी गई थी। इसके आधार पर, बेसिक शिक्षा विभाग ने शुमायला को 3 अक्टूबर 2024 को निलंबित कर दिया और 10 जनवरी 2025 को उसके खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
नौकरी पाने का तरीका और फर्जीवाड़ा
शुमायला खान ने फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर प्राथमिक विद्यालय माधौपुर में सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल की थी। वह 2015 से इस पद पर कार्यरत थी और लाखों रुपये का वेतन ले चुकी थी। वसूली के लिए वित्त एवं लेखाधिकारी नीरज पाठक ने खंड शिक्षा अधिकारी से प्राप्त रिपोर्ट का सत्यापन शुरू कर दिया है।
बेसिक शिक्षा विभाग की कार्रवाई
खंड शिक्षा अधिकारी फतेहगंज पश्चिमी ने शुमायला के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई। विभाग ने उसके वेतन, भत्ते और दो बार मिले बोनस (2016-17 और 2020-21) को जोड़कर 46.88 लाख रुपये की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बीएसए संजय सिंह ने बताया कि शुमायला से कई बार प्रमाण पत्र की सत्यता के लिए स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन वह इसे साबित नहीं कर सकी। इस कारण से पिछले साल उसका निवास प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था।
पुलिस और प्रशासन का बयान
पुलिस अधीक्षक उत्तरी, मुकेश चंद्र मिश्र ने बताया कि शुमायला खान के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और शुमायला के सभी दस्तावेजों की गहन पड़ताल जारी है।
वसूली की प्रक्रिया
शुमायला से की जाने वाली वसूली में उसका वेतन, भत्ते और बोनस शामिल हैं। वित्त एवं लेखाधिकारी ने बताया कि तैनाती से लेकर बर्खास्तगी तक की सभी वित्तीय गणनाएं की जा रही हैं। सत्यापन के बाद रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर वसूली शुरू होगी।
बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का संकेत
इस घटना ने सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की खामियों को उजागर किया है। शुमायला का मामला केवल एक उदाहरण हो सकता है, जो बताता है कि कैसे फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सरकारी तंत्र में सेंध लगाई जा रही है।