Kolkata Vishwakarma Puja holiday controversy: कोलकाता नगर निगम (KMC) ने हाल ही में एक आदेश जारी किया, जिसमें हिंदी मीडियम स्कूलों के लिए विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी रद्द कर दी गई और ईद-उल-फितर की छुट्टी को एक दिन से बढ़ाकर दो दिन कर दिया गया। इस निर्णय को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद नगर निगम को आदेश वापस लेना पड़ा।
विवाद की शुरुआत (Kolkata Vishwakarma Puja holiday controversy)
नगर निगम के इस फैसले से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल गर्मा गया। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे राज्य में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार द्वारा ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का एक उदाहरण बताया। विवाद इतना बढ़ गया कि कोलकाता नगर निगम को न केवल आदेश वापस लेना पड़ा, बल्कि इसे जारी करने वाले अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया। निगम के अनुसार, यह एक ‘टाइपिंग मिस्टेक’ थी, लेकिन भाजपा ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया।
आदेश जारी करने की प्रक्रिया और संशोधन
25 फरवरी 2025 को जारी इस आदेश पर कोलकाता नगर निगम के शिक्षा विभाग के मुख्य प्रबंधक के हस्ताक्षर थे। इस आदेश के अनुसार, 17 सितंबर 2025 को होने वाली विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी को रद्द कर दिया गया था और उसकी जगह 31 मार्च 2025 और 1 अप्रैल 2025 को ईद-उल-फितर के लिए दो दिन की छुट्टी घोषित की गई थी।
विरोध के बाद नगर निगम ने यह स्पष्ट किया कि यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की सहमति के बिना जारी किया गया था, इसलिए इसे तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। अब नगर निगम ने घोषणा की है कि जल्द ही छुट्टियों की संशोधित सूची जारी की जाएगी।
विपक्ष का विरोध
बीजेपी ने इस आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। पार्टी के महासचिव जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा, “यह विश्वास करना कठिन है कि नगर निगम के अधिकारी विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी को रद्द करने और ईद-उल-फितर की छुट्टी बढ़ाने के निर्णय से अनजान थे।” उन्होंने इस आदेश को तृणमूल कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति का हिस्सा बताया।
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि इस आदेश के पीछे उन्हीं का हाथ है। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा पूजा विशेष रूप से ओबीसी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है और इसे रद्द करना तुष्टिकरण की राजनीति का प्रमाण है।
कोलकाता नगर निगम की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद, कोलकाता नगर निगम ने सफाई देते हुए कहा कि यह निर्णय एक टाइपिंग मिस्टेक थी और इसे जल्दबाजी में जारी किया गया था। नगर निगम ने यह भी कहा कि अब छुट्टियों की नई सूची तैयार की जाएगी, जो राज्य सरकार के मौजूदा मानदंडों के अनुसार होगी।
महाकुंभ पर विवाद से बढ़ी सियासी गर्मी
इससे पहले भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विवादों में रही हैं, जब उन्होंने प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ को ‘मृत्युकुंभ’ कह दिया था। 18 फरवरी 2025 को विधानसभा में उन्होंने यह आरोप लगाया था कि आयोजन में वीआईपी लोगों को विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि आम श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उनके इस बयान को लेकर हिंदू संगठनों और भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।
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