Donald Trump vs PM Modi: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान, भारत के साथ उनके संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए। भारत ने पहले तो ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद उम्मीद जताई थी कि वह दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेंगे, लेकिन समय के साथ ट्रंप के फैसले भारत के लिए एक बड़े झटके के रूप में सामने आए। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में ही भारत के खिलाफ कई ऐसे कदम उठाए, जो देश के आर्थिक और कूटनीतिक हितों को प्रभावित करने वाले थे। इस रिपोर्ट में हम उन पांच प्रमुख फैसलों पर चर्चा करेंगे, जिनसे भारत की विकास यात्रा और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
एलन मस्क की कंपनी टेस्ला को भारत में बैटरी वाली कारें बनाने से रोका- Donald Trump vs PM Modi
ट्रंप ने एलन मस्क की कंपनी टेस्ला को भारत में अपने इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का उत्पादन करने से रोक दिया। यह निर्णय उस समय आया जब टेस्ला भारत में अपने इलेक्ट्रिक कारों के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की योजना बना रही थी। ट्रंप का कहना था कि यह कदम अमेरिका के लिए “अनुचित” होगा क्योंकि इससे अमेरिकी निवेश और रोजगार विदेश में स्थानांतरित हो सकते हैं। इस फैसले ने भारत में टेस्ला की योजनाओं को झटका दिया और भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की उम्मीदों को तोड़ा।
भारतीय उत्पादों पर मोटा टैरिफ लगाने की धमकी
ट्रंप का मानना था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर बहुत अधिक आयात शुल्क लगाता है। इस पर उन्होंने भारत सहित कई देशों को चेतावनी दी थी कि अगर वे अपनी टैरिफ नीति को नहीं बदलते, तो उन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। भारत और अमेरिका के व्यापार संबंधों में यह एक गंभीर चुनौती बन गई। भारतीय निर्यातकों के लिए यह निर्णय बहुत ही नकारात्मक साबित हुआ, क्योंकि इससे व्यापार पर भारी दबाव पड़ा और भारतीय उद्योग को घाटे का सामना करना पड़ा।
अमेरिकी सहायता में कटौती
ट्रंप प्रशासन ने भारत को मिलने वाली विदेशी सहायता में कटौती करने का निर्णय लिया। इससे भारतीय स्वास्थ्य और कृषि परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ। कई ऐसी योजनाएं थीं जो अमेरिकी फंडिंग पर निर्भर थीं, और अब उन योजनाओं के लिए वित्तीय संकट पैदा हो गया है। इसके अलावा, भारतीय शिक्षा और रिसर्च सेक्टर को भी इस कटौती का असर झेलना पड़ा।
भारतीय नागरिकों की अपमानजनक वापसी
अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीय नागरिकों को ट्रंप प्रशासन ने बड़े पैमाने पर वापस भारत भेजा। इस प्रक्रिया के दौरान भारतीय नागरिकों को हाथ-पैर में हथकड़ी लगाकर सैन्य विमान से भारत भेजा गया। यह कदम न केवल भारत के नागरिकों के लिए अपमानजनक था, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी उल्लंघन था। कई नागरिकों ने यह आरोप लगाया कि उन्हें खाने-पीने के बिना 35 घंटे की उड़ान में रखा गया, जो कि मानवाधिकारों का उल्लंघन था।
तेजस फाइटर जेट के लिए इंजन आपूर्ति में देरी
भारत ने अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (GE) कंपनी से तेजस फाइटर जेट के लिए GE-414 इंजन की डील की थी, लेकिन अमेरिकी कंपनी ने कई महीनों तक इंजन की आपूर्ति में देरी की। इसके कारण भारत को अपने रक्षा कार्यक्रम में बदलाव करने पर मजबूर होना पड़ा। GE ने आपूर्ति में और देरी करने के साथ-साथ अतिरिक्त 5 करोड़ डॉलर की मांग की, जिससे भारत को रूस से इंजन खरीदने पर विचार करना पड़ा।
पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप के अन्य फैसले
ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी भारत को कई बड़े झटके लगे थे। 2017 में ट्रंप प्रशासन ने भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेस (GSP) से बाहर कर दिया था, जिससे भारत को अमेरिकी बाजार में कई उत्पादों पर मिलने वाली टैक्स छूट समाप्त हो गई थी। इसके अलावा, ट्रंप ने H-1B वीजा नीति में सख्ती बढ़ा दी, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों पर असर पड़ा। इसके साथ ही, ट्रंप ने भारत को ईरान से कच्चा तेल खरीदने पर भी दबाव डाला, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हुई।
डोनाल्ड ट्रंप के फैसले भारत के लिए कड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। उनके प्रशासन ने व्यापार, आव्रजन, रक्षा और कूटनीतिक मुद्दों पर ऐसे फैसले लिए, जिनका भारत की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा प्रभाव पड़ा। हालांकि, भारत ने इन मुद्दों को लेकर अपनी कूटनीतिक रणनीति को मजबूत किया, लेकिन ट्रंप के फैसलों ने यह साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी भी देश की नीतियां दूसरे देशों के हितों को प्रभावित कर सकती हैं।