Agra News: जिले के रामलाल वृद्धाश्रम में गुरुवार को एक खास और यादगार शादी का आयोजन हुआ। 66 वर्षीय मुन्नालाल और 57 वर्षीय प्रीतिलता ने एक-दूसरे से विवाह करने का निर्णय लिया, जो न केवल उनकी नई जिंदगी की शुरुआत थी, बल्कि एक दूसरे के साथ बिताए गए दर्दनाक दिनों को भूलकर एक-दूसरे का सहारा बनने का वादा था।
आश्रम में बुजुर्गों की शादी का अनोखा अनुभव- Agra News
रामलाल वृद्धाश्रम में गुरुवार सुबह से ही माहौल बदल चुका था। वृद्धाश्रम के मुख्य गेट पर फूलों की मालाएं टंगी हुई थीं और ढोल की आवाज से पूरा वातावरण गूंज रहा था। यमुना किनारे स्थित इस आश्रय गृह में बुजुर्गों की शादी की तैयारी चल रही थी। दूल्हे मुन्नालाल घोड़ी पर सवार होकर आए, जबकि दुल्हन प्रीतिलता लाल जोड़े में शरमाती हुई वरमाला के साथ स्टेज पर पहुंचीं। दोनों के शादी के बंधन में बंधने का दृश्य वृद्धाश्रम में रहने वाले अन्य बुजुर्गों के लिए एक प्रेरणा बन गया।
मुन्नालाल और प्रीतिलता की मुलाकात और शादी का निर्णय
मुन्नालाल और प्रीतिलता की मुलाकात एक माह पहले हुई थी, जब वे दोनों रामलाल वृद्धाश्रम में रहने आए थे। शुरू में दोनों ने एक-दूसरे से अपनी तकलीफें साझा की और धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला बढ़ा। प्रीतिलता के पति की मृत्यु के बाद वह अकेली रह गईं, जबकि मुन्नालाल की जिंदगी भी मुश्किलों से भरी रही, जहां वह अपनी मां कंचा देवी के साथ अकेले जीवन बिता रहे थे। जब उन्होंने एक-दूसरे से अपने दुखों की बात की, तो दोनों को लगा कि उनकी कहानी में बहुत समानताएं हैं, और यही वह समय था जब मुन्नालाल ने प्रीतिलता से शादी करने का प्रस्ताव रखा, जिसे प्रीतिलता ने स्वीकार कर लिया।
पारंपरिक शादी का आयोजन और शहनाई की ध्वनि
रामलाल वृद्धाश्रम के संचालक शिवप्रसाद शर्मा ने बताया कि इस अनोखी शादी को कानूनी रूप से मान्यता देने के लिए उन्होंने आवश्यक सलाह ली। इसके बाद दोनों बुजुर्गों की शादी का आयोजन किया गया, जिसमें शहनाई की ध्वनि ने माहौल को और भी खास बना दिया। इस मौके पर बुजुर्गों की मौजूदगी में मुन्नालाल और प्रीतिलता ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर नए जीवन की शुरुआत की।
मुन्नालाल की कहानी
मुन्नालाल ने बताया कि वह जालौन के निवासी हैं और पिछले एक साल से अपनी मां के साथ रामलाल वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। उनका परिवार बहुत छोटा है, और चाचा-ताऊ ने उनका घर भी कब्जा कर लिया था। ई-रिक्शा चलाकर वह अपनी मां का पालन-पोषण करते थे, लेकिन जब वह काम पर जाते थे तो कोई उनकी मां की देखभाल नहीं करता था, जिसके बाद उन्होंने वृद्धाश्रम में आकर रहने का निर्णय लिया।
प्रीतिलता की कहानी
प्रीतिलता ने बताया कि वह बुलंदशहर की रहने वाली हैं और उनके जीवन में बहुत दुख था। पति की बीमारी के बाद मृत्यु हो गई और फिर उनकी दोनों बेटियों का भी निधन हो गया। रिश्तेदारों ने उन्हें घर से निकाल दिया, जिससे वह अकेली हो गईं और एक माह पहले रामलाल वृद्धाश्रम में आईं। यहां पर उन्होंने मुन्नालाल से मुलाकात की और दोनों के बीच एक गहरा रिश्ता बन गया।
नए जीवन की शुरुआत
शिवप्रसाद शर्मा ने कहा कि मुन्नालाल और प्रीतिलता ने शादी के बाद वृद्धाश्रम में ही रहने का निर्णय लिया है। उन्हें एक अलग कमरा भी आवंटित किया जा रहा है ताकि वे अपनी नई जिंदगी की शुरुआत आराम से कर सकें।