कैसे रखा गया दिल्ली का नाम? क्यों ये ही बनी देश की राजधानी? जानिए इससे जुड़ा पूरा इतिहास

By Ruchi Mehra | Posted on 16th Jan 2021 | इतिहास के झरोखे से
Delhi history,Delhi Capital of India

दिल्ली ये अपने आप में भारी भरकम इतिहास समाए बैठी है और दिन ब दिन घनी होती जा रही है। दिल्ली के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इसे कई बार बसाया गया और कई बार ये उजड़ी। जहां तक नई दिल्ली की बात करें तो ये भारत की राजधानी है। नई दिल्ली, दिल्ली महानगर के अंदर आती है और दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के ग्यारह ज़िलों में से ये एक जिला है। आइए दिल्ली शहर और नई दिल्ली से जुड़ी कुछ अहम बातें जानते हैं...

कहां से आया दिल्ली नाम?

सबसे पहले बात करते हैं दिल्ली के नामकरण की। ज्यादातर शहरों या फिर देश के नाम के पीछे कोई न कोई हिस्ट्री जरूर होती है। ऐसे में कुछ कहानी दिल्ली के नाम से भी जुड़ी हैं। एक कहानी के मुताबिक, 50 ईसा पूर्व में ढिल्लू नाम के एक राजा के द्वारा यहां एक शहर बसाया गया और उसी के नाम पर शहर को दिल्ली कहा जाने लगा। एक किस्सा ये है कि दिल्ली नाम प्राकृत भाषा के ढीली शब्द से आया। जिसका इतिहास है कि दिल्ली के लिए ढीली शब्द को यूज में 8वीं सदी में तोमर शासक ने ऐसा इस वजह से क्योंकि दिल्ली के लौह स्तंभ की नींव ही कमजोर थी जिसे शिफ्ट करना पड़ा था। ऐसे सबूत हैं कि जो सिक्का तोमर वंश के शासनकाल में प्रचलन में था उसे देल्हीवाल कहते थे और इसी के नाम पर इस शहर को देल्ही या दिल्ली पुकारा जाने लगा। ऐसा भी माना जाता है कि ईसा पूर्व छठी सदी में यह शहर पहली बार बताया गया।

राजधानी कब बनी दिल्ली?

दिल्ली 13 फरवरी 1931 को अविभाजित भारत की राजधानी बनाई गई। 12 दिसंबर, 1911 को किंग जॉर्ज V ने एक शाही समारोह नई दिल्ली दरबार के दौरान नई राजधानी की नींव रखी। उन्होनें इस मौके पर अनाउंसमेंट कर दी कि दिल्ली अब कलकत्ता की जगह भारत की राजधानी होगी। फिर 20 सालों के इंतजार के बाद 13 फरवरी, 1931 को नई दिल्ली का लॉर्ड इरविन ने उद्घाटन किया। दिल्ली छावनी अंतरिम राजधानी के तौर पर साल 1912 से 1931 तक भारत की राजधानी रही। वहीं जब 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ तो नई दिल्ली को राजधानी बनाने का डिसिजन लिया गया।

दिल्ली ही क्यों राजधानी बनी?

इसके पीछे अंग्रेजों की एक अलग दलील थी। कोई 100 साल पहले भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग ने एक लेटर लिखा जिसमें उन्होंने बताया कि कलकत्ता की जगह दिल्ली को अपने साम्राज्य की राजधानी ग्रेट ब्रिटेन को आखिर क्यों बनाना चाहिए। 25 अगस्त, 1911 को यह लेटर शिमला से लंदन भेजा गया। साथ ही सेक्रटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया को संबोधन दिया गया। हार्डिंग की इस बारे में दलील थी कि दिल्ली केंद्र में स्थित है ऐसे में यह ज्यादा फायदेमंद होगी।

इसके अलावा अंग्रेज शासकों ऐसा लगा कि देश का शासन अच्छे से चलाने के लिए कलकत्ता को नहीं बल्कि दिल्ली को राजधानी बनाया गया तो अच्छा होगा। ऐसा इस वजह से क्योंकि यहां से शासन चला पाना ज्यादा असरदार होगा। ऐसा सोचकर देश की राजधानी को दिल्ली ले जाने के आदेश अंग्रेज महाराजा जॉर्ज पंचम ने दिए।

आजादी के बाद का हाल जान लेते हैं...

आजादी के बाद नई दिल्ली को ही देश की राजधानी बनाया गया। दिल्ली के इतिहास में 1 नवंबर 1956 को एक अहम चैप्टर जोड़ा गया जब इस दिन राज्य पुनर्गठन कानून, 1956 लागू होने के साथ ही इसे केंद्र शासित प्रदेश यानि कि Union Territory का दर्जा दिया गया। संविधान (उनहतरवां संशोधन) अधिनियम, 1991 के तहत दिल्ली केन्द्रशासित प्रदेश को औपचारिक तौर पर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बदला गया। प्रदेश में चुनी हुई सरकार को कई अधिकार दिए गए तो वहीं केंद्र सरकार के अंडर कानून और व्यवस्था की गई। 1993 में कानून का Actual enforcement आया।

दिल्ली की सत्ता किस किस के हाथों में रही?

अगर इसकी बात करें तो दिल्ली की गद्दी पर साल 1952 में कांग्रेस नेता चौधरी ब्रह्म प्रकाश सीएम थे तब चीफ़ कमिश्नर आनंद डी पंडित के साथ लंबे वक्त तक तनातनी चलने के बाद 1955 में सीएम को पद छोड़ना पड़ा।

फिर साल 1956 में केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली को बनाया गया और दिल्ली की विधानसभा और मंत्रिमंडल का प्रावधान ही खत्म किया गया। 1966 में दिल्ली नगरपालिका का दिल्ली एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट के तहत गठन हुआ और इसके प्रमुख उपराज्यपाल होते थे। विधायी शक्तियां नहीं थी नगरपालिका के पास। फिर साल 1990 तक दिल्ली में ऐसे ही शासन चलता रहा।

इसके बाद संविधान में 69वां संशोधन विधेयक को पारित कर दिया गया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम, 1991 के संशोधन के बाद लागू हो जाने से विधानसभा गठित हुआ। दिल्ली में और मौजूदा समय में दिल्ली विधानसभा में 70 सदस्य तय है। 5 साल के लिए विधायक चुने जाते हैं।

Ruchi Mehra
Ruchi Mehra
रूचि एक समर्पित लेखक है जो किसी भी विषय पर लिखना पसंद करती है। रूचि पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ, विदेश, राज्य की खबरों पर एक समान पकड़ रखती हैं। रूचि को वेब और टीवी का कुल मिलाकर 3 साल का अनुभव है। रुचि नेड्रिक न्यूज में बतौर लेखक काम करती है।

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