यासीन मलिक को मिली उम्रकैद की सजा, जानिए कब क्या हुआ?

By Ruchi Mehra | Posted on 27th May 2022 | क्राइम
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जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के मुखिया यासीन मलिक को NIA की एक अदालत ने टेरर फ़ंडिंग के मामलों में दोषी क़रार देते हुए उम्र कैद की सज़ा सुनाई है। आइए जानते है इस मामले में और क्या-क्या हुआ।

कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को 25 मई 2022 को टेरर फ़ंडिंग के 2 मामलों में NIA की एक अदालत ने उम्र कैद की सज़ा सुनाई। वहीं इससे पहले भी 19 मई को अदालत ने यासीन मलिक को टेरर फ़ंडिंग के मामलों में दोषी क़रार दिया था। लेकिन यासिन को सज़ा सुनाने के लिए कोर्ट ने 25 मई का दिन तय किया।

किन मामलों में सुनाई गई सज़ा

हालांकि यासीन मलिक की तरफ से केस लड़े वकील उमेश शर्मा ने बताया कि यासीन को दो अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सज़ा मिली है। इसके अलावा कुल 9 मामलों में सज़ा सुनाई गई और 20 लाख का जुर्माना भी लगाया गया। साथ ही यासीन को अलग-अलग धाराओं में सज़ा दी गई। लेकिन NIA ने यासीन को फांसी देने की मांग की थी। 

जाहिर है कि यासीन मलिक पर देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने, आपराधिक साज़िश रचने और ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों में शामिल होने जैसे संगीन आरोप लगे थे। उन पर लगे इन सभी आरोपों को यासीन ने कोर्ट में कबूल कर लिया।

Delhi-NCR में हमले का अलर्ट 

अलगाववादी नेता यासीन मलिक को 25 मई के दिन उम्र कैद की सज़ा सुनाने के बाद Delhi-NCR में हमले का अलर्ट जारी किया गया। खुफिया विभाग की तरफ़ से जानकारी दी गई कि यासीन मलिक की सजा के विरोध में राजधानी दिल्ली में आतंकी हमला होने की संभावना है। ऐसे में पहले ही दिल्ली पुलिस को सुरक्षा एजेंसियों से करीब 6 से 7 संवेदनशील अलर्ट मिल चुके थे।

जवानों की छुट्टियां हुई रद्द

इसके अलावा पाकिस्तान भी यासीन की सज़ा के बाद तिलमिला गया। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने सभी देशों से अपील करते हुए कहा कि वो मोदी सरकार के इस कदम का विरोध करें। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी यासीन मलिक को उम्र कैद की सजा मिलने के बाद भारत की आलोचना की। इमरान ने ट्वीट कर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 'मैं कश्मीरी नेता यासीन मलिक के खिलाफ मोदी सरकार की फासीवादी नीति की कड़ी निंदा करता हूं। इसमें यासीन को अवैध रूप से जेल में रखने से लेकर फर्जी आरोपों में उन्हें सजा देना शामिल है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत अधिकृत कश्मीर में हिंदुत्व फासीवादी मोदी सरकार के राज्य पोषित आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।'  ये मामला बढ़ता देख कश्मीर में तैनात जवानों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई। साथ ही सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया।

यासीन को कहां रखा गया

बता दें कि यासीन मलिक को उम्र कैद की सज़ा सुनाए जाने के बाद कड़ी सुरक्षा के लिए विशेष सेल में रखा गया। उसे तिहाड़ जेल के बैरक नंबर 7 में रखा गया। इस दौरान यासीन पर सीसीटीव कैमरे से पैनी नज़र भी रखी जा रही है। यासीन को जेल में काम या नौकरी देने को लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर हो सकता है कि उसे जेल के अंदर कोई काम न दिया जाए। 

जेल में कैसे कटा यासीन का रात-दिन

यासीन के तिहाड़ जेल पहुंचने के बाद रात बड़ी मुश्किल और बेचैन से कटी। जेल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सजा होने के बाद यासीन मलिक अपनी बैरक में काफी परेशान नजर आया। उसके हाव-भाव बदले हुए और बैचेन दिखे । सुरक्षा की लिहाज से उसकी बैरक में यासीन मलिक के अलावा और कोई भी नहीं है। 

इसके अलावा यासीन ने खाना मिलने के बावजूद उसे थोड़ी देर से खाया। लेकिन वो अपने समय पर ही सो गया था। इसके अलावा यासीन ने अभी तक किसी खास तरह की डिमांड नही रखी है। जेल मैन्युअल के हिसाब से ही नाश्ता भी दिया गया है। जेल अधिकारियों का कहना है कि उसकी सुरक्षा उनके लिए बेहद जरुरी है। यासीन मलिक के जेल के करीब कोई न जाए और वो जेल में खुद को कोई नुकसान न पहुंचाए इसके लिए भी सख्त इंतेज़ाम किए गए है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि कोर्ट ने 19 मई को यासीन मलिक को आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने का दोषी ठहराया गया था। इस मामले में NIA ने 2017 में FIR दर्ज की थी। इससे पहले 18 जनवरी 2018 को NIA ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी। NIA ने कोर्ट में कहा था, 'लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, जेकेएलएफ, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने कश्मीर और देश में बड़े पैमाने पर हमले किए थे।' कोर्ट में यासीन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को कबूल भी लिया था। उसने कहा था कि वह इसे चुनौती नहीं देगा। साथ ही ये भी कहा कि 'सजा पर मैं कुछ नहीं बोलूंगा। जब भी मुझे कहा गया मैंने आत्मसमर्पण किया। अब आपको (कोर्ट) जो भी सजा देनी है, दे दीजिए, मैं कुछ नहीं बोलूंगा। लेकिन ईमानदारी से दीजिएगा।' हालांकि यासीन मलिक के पास इस सजा के बाद भी दो विकल्प बचे है। वो इसे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है।

Ruchi Mehra
Ruchi Mehra
रूचि एक समर्पित लेखक है जो किसी भी विषय पर लिखना पसंद करती है। रूचि पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ, विदेश, राज्य की खबरों पर एक समान पकड़ रखती हैं। रूचि को वेब और टीवी का कुल मिलाकर 3 साल का अनुभव है। रुचि नेड्रिक न्यूज में बतौर लेखक काम करती है।

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