Premanand Maharaj ashram controversy: वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज और उनके आश्रम ‘श्री हित राधा केलि कुंज’ को लेकर उठा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ जहां एक युवा साधक की रहस्यमयी मौत और कई नाबालिग बच्चों के लापता होने के दावों से आश्रम की मुश्किलें बढ़ी हैं, वहीं दूसरी तरफ अब खुद प्रेमानंद महाराज की जान पर खतरे की आशंका जताई गई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर संत प्रेमानंद महाराज की तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
दिनेश शर्मा ने आरोप लगाया है कि आश्रम में दो गुट बन चुके हैं और अंदर घुसे कुछ असामाजिक और माफिया तत्व महाराज जी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस पत्र के सामने आते ही धार्मिक और सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
‘आश्रम पर माफिया का कब्जा, महाराज जी को हो सकता है खतरा’| Premanand Maharaj ashram controversy
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में दिनेश शर्मा ने दावा किया कि प्रेमानंद महाराज के परिकर में अब असली और नकली संतों के दो अलग-अलग धड़े बन गए हैं। उन्होंने कहा कि जो असली संत हैं, वे महाराज जी के साथ आश्रम से करीब 20 किलोमीटर दूर यमुना किनारे एकांत में भजन, साधना और तपस्या कर रहे हैं। वहीं दूसरे गुट में भू-माफिया और बच्चा माफिया जैसे संदिग्ध तत्व सक्रिय हो गए हैं, जिन्होंने आश्रम से जुड़े करीब 15 छोटे-बड़े आश्रमों पर अपना कब्जा जमा लिया है।
शर्मा ने आरोप लगाया कि इस माफिया गिरोह ने यमुना खादर की जमीनों को बेचकर अकूत संपत्ति जमा कर ली है। उन्होंने आशंका जताई कि यही माफिया तत्व प्रेमानंद महाराज के साथ कोई अनहोनी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संतों का रक्षक बताते हुए उन्होंने कहा कि महाराज जी ने करोड़ों लोगों को धर्म और सदमार्ग से जोड़ा है, ऐसे में उनकी सुरक्षा देशहित में बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आश्रम परिसर में गुंडागर्दी और साधुओं से जुड़ी आपराधिक घटनाओं के पीछे भी इसी गुट का हाथ हो सकता है।
25 वर्षीय साधक की मौत से शुरू हुआ विवाद
विवाद की मुख्य जड़ 25 सितंबर 2026 को हुई एक दिल दहला देने वाली घटना है। प्रेमानंद महाराज से जुड़े 25 वर्षीय दीक्षित साधक दीपक लोधी (दीक्षांत नाम: रसिक दुलारी शरण) की चौथी मंजिल से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरकर मौत हो गई थी। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके से सुबूत जुटाए, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला और ज्यादा उलझ गया।
रिपोर्ट में सिर और शरीर पर गंभीर चोटों के अलावा गुप्तांग पर चोट और कटने के निशान मिलने की बात सामने आई। इस खुलासे के बाद परिजनों और संतों ने मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज कर दी। पुलिस फिलहाल सभी कोणों से मौत के सही कारणों की पड़ताल कर रही है।
8 दिन बाद आश्रम का आधिकारिक बयान
विवाद बढ़ने के बाद ‘श्री हित राधा केलि कुंज ट्रस्ट’ ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए आधिकारिक बयान जारी किया। ट्रस्ट ने कहा कि इस दर्दनाक घटना से पूज्य महाराज श्री और पूरा आश्रम परिवार बेहद दुखी और आहत है। ट्रस्ट ने दिवंगत साधक के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और साफ किया कि पुलिस जांच में पूरा सहयोग दिया जा रहा है।
साथ ही आश्रम ने श्रद्धालुओं और आम जनता से अपील की कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की अफवाह, अटकलबाजी या भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें। इससे पहले ब्रज संत महिमा की तरफ से भी पत्र जारी कर कुछ कंटेंट क्रिएटर्स और न्यूज़ चैनलों पर टीआरपी के लिए झूठी कहानियां गढ़ने का आरोप लगाया गया था।
लापता बच्चों के मामले और बाल संरक्षण आयोग में शिकायत
इसी बीच आश्रम के बाहर परिजनों के प्रदर्शनों ने भी सबका ध्यान खींचा। हाथरस के सादाबाद निवासी 16 वर्षीय किशोर अनुज, जो दीक्षा लेने के बाद से गायब था, उसके परिजनों ने आश्रम के बाहर धरना दे दिया था। हालांकि, राहत की बात यह रही कि बरसाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अनुज को राधा बाग मार्ग स्थित लाडली दास आश्रम से सकुशल बरामद कर परिजनों को सौंप दिया। वहीं नोएडा की 35 वर्षीय एक महिला के भी 15 अगस्त से लापता होने की बात सामने आई है, जिनके परिजन आश्रम में उनकी तलाश कर रहे हैं।
इधर, दिनेश फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर एक नया मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यात्म के नाम पर कई नाबालिग घर छोड़कर आश्रमों में रह जाते हैं और उनके माता-पिता दर-दर भटकते रहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आश्रम के भीतर किसी नाबालिग के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी किसकी होगी? उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य का समर्थन
बढ़ते विवादों के बीच जाने-माने कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य खुलकर प्रेमानंद महाराज के समर्थन में आ गए हैं। अपनी कथा के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने वालों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल व्यूज और टीआरपी पाने के लिए बिना तथ्य जाने खुद ही जज बनकर फैसला सुनाने लगते हैं। अनिरुद्ध आचार्य ने जोर देकर कहा कि प्रेमानंद महाराज ने लाखों भटके हुए युवाओं को सही राह दिखाई है, इसलिए उन पर उंगली उठाने से पहले लोगों को सच्चाई समझनी चाहिए।














































